युवा बजट 2026-27 के आर्थिक मायने विशिष्ट, सियासी प्रभाववश विकसित भारत 2047 के सपने पूरे होंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट 2026-27 को 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। उन्होंने इसे सुधारों को मजबूत करने और विकसित भारत के लिए स्पष्ट रोडमैप करार दिया। मोदी ने कहा कि यह बजट नारी शक्ति का सशक्त प्रतिबिंब है और अपार अवसर प्रदान करता है।
भारत सरकार का 2026-27 का केंद्रीय बजट विकास, रोजगार सृजन और राजकोषीय अनुशासन पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026, दिन रविवार को इसे संसद की पटल पर प्रस्तुत करके एक नया रिकॉर्ड कायम किया। लिहाजा इसके आर्थिक मायने और राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण है। इसपर बहस तेज हो गई, जो कई कारणों से अभिप्रेरित है। जहां सत्ता पक्ष ने इसे युवा शक्ति का प्रतीक बजट ठहराया, वहीं विपक्ष ने इसे अदृश्य बजट करार देते हुए जमकर आलोचना की।
जहां तक कुल बजट आकार की बात है तो यह 53.5 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया। भले ही राजकोषीय घाटा जीडीपी (GDP) का 4.3% रखा गया, जो पिछले साल के 4.4% की तुलना में कुछ कम है। वहीं, जहां तक कर सुधार की बात है तो आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं आया; जबकि नया आयकर अधिनियम 2026 अप्रैल से लागू होगा। वहीं, एफ एंड ओ (F&O) पर एसटीटी (STT) बढ़ाकर 0.05-0.15% किया गया, विदेशी पर्यटन/शिक्षा हेतु टीसीएस (TCS) 2% किया गया।
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जहां तक बजट में क्षेत्रीय प्रावधान किये जाने की बात है तो रोजगार-एमएसएमई के लिए 10,000 करोड़ का वृद्धि कोष प्रस्तावित है, जबकि क्रेडिट गारंटी दोगुनी की गई। वहीं, बुनियादी ढांचा हेतु 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का विकास, शहरी विकास के लिए 5,000 करोड़ प्रति वर्ष का प्रस्ताव और स्वास्थ्य-कृषि क्षेत्र में 17 कैंसर दवाएं सस्ती किये जाने की घोषणा, बायोफार्मा को 10,000 करोड़ दिए जाने का प्रस्ताव और मखाना बोर्ड मजबूत किये जाने का प्रस्ताव शामिल है। वहीं, अन्य महत्वपूर्ण बजट घोषणाओं में नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्यात प्रोत्साहन पर फोकस प्रदान करते हुए सुधारों का 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' जारी रखा गया। लिहाजा यह विकसित भारत 2047 का रोडमैप है।
इन बजट प्रस्तावों के आर्थिक मायने दूरगामी महत्व वाले हैं, क्योंकि बजट में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जो बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देगा। वहीं, राजकोषीय घाटा 4.3% जीडीपी (GDP) पर लक्षित है, जबकि ऋण-जीडीपी अनुपात 55.6% तक सुधरेगा, जो वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा। वहीं, कर राहत जैसे टीसीएस (TCS)/टैक्स सीमा बढ़ाना, एमएसएमई (MSME) क्रेडिट गारंटी दोगुनी करना और स्टार्टअप फंड कंज्यूमर (consumer) खर्च व निवेश को प्रोत्साहित करेगा।
जहां तक बजट प्रस्तावों के राजनीतिक प्रभाव की बात है तो निश्चय ही सरकार ने रोजगार (जैसे चमड़ा क्षेत्र में 22 लाख नौकरियां), किसान योजनाएं (मखाना बोर्ड) और स्वास्थ्य (10,000 मेडिकल सीटें) पर फोकस कर एनडीए (NDA) सहयोगियों व ग्रामीण मतदाताओं को मजबूत संदेश दिया है। जबकि विपक्ष ने इसे 'राजनीतिक बजट' करार दिया है, खासकर राज्य-विशिष्ट घोषणाओं पर, लेकिन विकास लक्ष्य (विकसित भारत 2047) बीजेपी की छवि को मजबूत करेंगे। कुल मिलाकर, यह गठबंधन स्थिरता और 2029 के आम चुनाव सहित 2026, 27 और 28 की विधानसभा चुनाव की तैयारी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
लिहाजा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट 2026-27 को 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। उन्होंने इसे सुधारों को मजबूत करने और विकसित भारत के लिए स्पष्ट रोडमैप करार दिया। मोदी ने कहा कि यह बजट नारी शक्ति का सशक्त प्रतिबिंब है और अपार अवसर प्रदान करता है। युवाओं के लिए नया आयाम तथा हर घर लक्ष्मी का आगमन सुनिश्चित करने वाला बताया। विकास फोकस करते हुए उन्होंने इसे आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और समावेशी विकास का माध्यम माना, जो देश को 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाएगा। विपक्ष की आलोचना के बीच सरकार की सकारात्मक छवि मजबूत करने वाला कदम है।
हालांकि, भारत के 2026-27 बजट पर विपक्ष ने कड़ी आलोचना की है। विभिन्न दलों ने इसे निराशाजनक, फीका और अपेक्षाओं से कम बताया। जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने इसे "पूरी तरह फीका" कहा, जिसमें भारी माहौल के बावजूद कोई स्पष्ट आवंटन या पारदर्शिता नहीं है। जबकि कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि सरकार अर्थव्यवस्था को गर्त में डुबो रही है। वहीं कांग्रेस नेता जेबी माथेर ने केरल के लिए इसे निराशाजनक बताया है।
वहीं, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि इस बजट में महिलाओं, युवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य व कृषि के लिए कुछ नहीं है। जबकि सपा नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे गरीब-किसान-युवा विरोधी बजट बताया। जबकि सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि "मोदी सरकार से ही उन्हें कोई उम्मीद नहीं है।"
वहीं, टीएमसी नेत्री और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौजूदा बजट में भी बंगाल की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए इसे "दिशाहीन" बजट कहा। जबकि तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि यह बजट उनकी समझ में नहीं आया, इसलिए कोई नंबर नहीं देंगे। कुल मिलाकर विपक्ष ने राज्य-विशिष्ट घोषणाओं की कमी, मध्यम वर्ग व किसानों की अनदेखी तथा राजनीतिक बजट करार दिया।
हालांकि, भारत के 2026-27 बजट पर विपक्ष की आलोचना के जवाब में भाजपा सरकार ने इसे ऐतिहासिक, समावेशी और विकासोन्मुखी बजट बताया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष नकारात्मक राजनीति कर रहा है। जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बजट को सराहते हुए विपक्ष पर तंज कसा कि वे अर्थव्यवस्था की मजबूती को नहीं देख पा रहे। वहीं, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे विकसित भारत के संकल्प में मील का पत्थर करार देते हुए कहा कि यह बजट हर वर्ग के लिए कल्याणकारी है। जबकि यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसे विकसित भारत का रोडमैप करार दिया, और कहा कि इसके विभिन्न प्रस्तावों से सामाजिक-आर्थिक विकास का स्वर्णिम अध्याय पूरा होगा। कुलमिलाकर सरकार ने जोर दिया कि कैपेक्स, रोजगार और किसान योजनाएं विपक्ष की 'फीका' टिप्पणी को गलत साबित करेंगी। इस प्रकार यह बजट एनडीए की एकजुटता को भी दिखाता है।
- कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
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