विकसित भारत के दृष्टिगत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मायने

Economic Survey
Prabhasakshi
कमलेश पांडे । Jan 30 2026 12:27PM

वहीं, स्वदेशी और उत्पादन रणनीति के क्षेत्र में अनुशासित स्वदेशी अपनाने, निवेश लागत कम करने, उन्नत विनिर्माण मजबूत करने और रणनीतिक अपरिहार्यता की त्रिस्तरीय रणनीति का आह्वान किया गया है। जबकि राष्ट्रीय इनपुट लागत न्यूनीकरण रणनीति के तहत संसाधनों को किफायती बनाकर निर्यात और रोजगार बढ़ेगा।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को दर्शाता है, जिसमें वैश्विक चुनौतियों के बावजूद उच्च वृद्धि दर का अनुमान है। देखा जाए तो यह बजट 2026-27 से पहले नीतिगत दिशा तय करता है और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों पर जोर देता है। यही वजह है कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में वैसे नीतिगत सुधारों पर बल दिया गया है जो आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा दें। कहना न होगा कि ये सभी सुझाव वैश्विक चुनौतियों के बीच लचीलेपन और संरचनात्मक परिवर्तन पर केंद्रित हैं।

जहां तक इस आर्थिक सर्वेक्षण की मुख्य विशेषताओं की बात है तो इस सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी वृद्धि 7.4% और जीवीए 7.3% का प्रथम अनुमान दिया गया है, जबकि एफ वाई (FY) 2027 के लिए 6.8-7.2% का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। वहीं, निजी उपभोग (जीडीपी का 61.5%) और निवेश (30%) प्रमुख चालक हैं, साथ ही मुद्रास्फीति अप्रैल-दिसंबर 2025 में औसतन 1.7% रही। जबकि राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष (FY) 2026 में 4.4% तक कम होने का लक्ष्य है, जो नीतिगत स्थिरता दर्शाता है।

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कुल मिलाकर अर्थिक सर्वेक्षण के प्रमुख क्षेत्रीय प्रदर्शन इस प्रकार हैं-  क्षेत्र - मुख्य उपलब्धियाँ 

विनिर्माण:  उच्च-तकनीकी गतिविधियों का 46.3% योगदान है; जबकि मोबाइल उत्पादन में 30 गुना वृद्धि (FY15-FY25) हुई है।

कृषि: खाद्यान्न उत्पादन 3577.3 लाख मीट्रिक टन हो चुका है; जबकि पशुपालन में 6.1% वृद्धि दर्ज की गई है।

सेवाएँ:  जीवीए में 9.3% वृद्धि (H1 FY26) हुई है; जबकि वैश्विक निर्यात में 4.3% हिस्सा हो चुका है।

बुनियादी ढांचा: राजमार्ग 60% बढ़े हैं; जबकि विदेशी मुद्रा भंडार $701.4 अरब पर पहुंच चुका है।

इस प्रकार ये आंकड़े उत्साहित करते हैं, क्योंकि जहां विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाऐं संघर्ष कर रही हैं, वही भारतीय अर्थव्यवस्था फर्राटे भर रही है।  

जहां तक आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के नीतिगत निहितार्थ की बात है तो यह सर्वेक्षण आत्मनिर्भरता, स्वदेशी और रणनीतिक लचीलेपन पर जोर देता है, जिसमें पीएलआई (PLI) योजनाओं से 12.6 लाख नौकरियाँ सृजित हुईं हैं। यह ग्रामीण रोजगार में मनरेगा के स्थान पर 'विकसित भारत-जी राम जी' मिशन और एआई (AI) तथा स्वच्छ ऊर्जा पर फोकस सुझाता है, जो रोजगार-सघन विकास को बढ़ावा देगा। कुल मिलाकर, यह उच्च वृद्धि, कम महंगाई और समावेशी नीतियों से 2047 के विकसित भारत लक्ष्य को मजबूत बनाता है।

कहना न होगा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में उन नीतिगत सुधारों पर जोर दिया गया है जो आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा दें। ये सुझाव वैश्विक चुनौतियों के बीच लचीलेपन और संरचनात्मक परिवर्तन पर केंद्रित हैं। यदि ग्रामीण रोजगार सुधार की दृष्टि से देखा जाए तो मनरेगा के स्थान पर 'विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025' की स्थापना का सुझाव दिया गया है, जो जवाबदेही बढ़ाएगा, अवसंरचना सुधरेगी और आय सुरक्षा मजबूत करेगा। यह ग्रामीण रोजगार को विकसित भारत 2047 के अनुरूप संरेखित करेगा।

वहीं, स्वदेशी और उत्पादन रणनीति के क्षेत्र में अनुशासित स्वदेशी अपनाने, निवेश लागत कम करने, उन्नत विनिर्माण मजबूत करने और रणनीतिक अपरिहार्यता की त्रिस्तरीय रणनीति का आह्वान किया गया है। जबकि राष्ट्रीय इनपुट लागत न्यूनीकरण रणनीति के तहत संसाधनों को किफायती बनाकर निर्यात और रोजगार बढ़ेगा। वहीं, एआई (AI) और प्रौद्योगिकी पर फोकस के तहत एआई (AI) को भारत की पूँजी, ऊर्जा और बाजार की वास्तविकताओं के अनुरूप अपनाने पर जोर दिया गया है, जबकि डेटा को रणनीतिक संसाधन मानते हुए घरेलू मूल्य बनाए रखने का ढांचा सुझाया गया।

वहीं, संप्रभु एआई (AI) बनाम एप्लीकेशन्स के ट्रेड-ऑफ बैलेंस करने की सिफारिश की गई है। जबकि ऊर्जा और पर्यावरण सुधार के दृष्टिगत राष्ट्रीय न्यूक्लियर एनर्जी मिशन को ₹20,000 करोड़ आवंटन से 2047 तक 100 GW क्षमता का लक्ष्य ,निर्धारित किया गया है। जबकि सौर/पवन ट्रांजिशन के संसाधन तीव्रता पर ध्यान देने की आवश्यकता जताई गई है। वहीं, PPP ढांचे को ट्रांजेक्शन-सेंट्रिक से सिस्टम-लेवल मार्केट बिल्डिंग की ओर ले जाना महत्वपूर्ण पहल है।

वहीं, अन्य प्रमुख सुझाव के दृष्टिगत श्रम कोड्स लागू कर 77 लाख नौकरियाँ सृजित करना और गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण फहल की गई है। जबकि डिजिटल कृषि मिशन, ई-नाम विस्तार और पीएम (PM) किसान जैसी योजनाओं से किसान आय सुरक्षा की जरूरत पर बल दिया गया है। वहीं, संस्थागत क्षमता गहराई और संरचनात्मक सुधारों से संप्रभु रेटिंग सुधार जैसी दूरदर्शिता पूर्ण पहल की गई है। कहना न होगा कि इन नीतिगत सुधारों से आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। 

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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