डाकघर बचत योजनाओं में कैसे करें निवेश और क्या हैं उनके फ़ायदे

डाकघर बचत योजनाओं में कैसे करें निवेश और क्या हैं उनके फ़ायदे

डाकघर सावधि जमा खातों के लिए आप चार संभावित कार्यकाल चुन सकते हैं, यानी 1 वर्ष, 2 वर्ष, 3 वर्ष और 5 वर्ष। इस खाते में न्यूनतम जमा राशि 1,000 रुपये होती है। ब्याज की गणना त्रैमासिक रूप से की जाती है लेकिन यह वार्षिक आधार पर दी जाती है।

डाकघर बचत योजनाओं में कई प्रोडक्ट्स शामिल होते हैं जो निवेश पर विश्वसनीयता और जोखिम मुक्त रिटर्न प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ पूरे देश में फैले लगभग 1.54 लाख डाकघरों के माध्यम से संचालित की जाती हैं। डाकघर योजनाएं भरोसेमंद और लोकप्रिय होती हैं। ये योजनाएं स्टेबल रिटर्न और सुनिश्चित ब्याज दर प्रदान करती हैं। अधिकतम ब्याज दरों वाली कुछ लोकप्रिय डाकघर योजनाएं जैसे सुकन्या समृद्धि योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, सार्वजनिक भविष्य निधि योजना, किसान विकास पत्र और राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र योजनाएं काफी लोकप्रिय और फायदेमंद हैं।

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आइए जानते हैं डाकघर द्वारा पेश किए गए विभिन्न निवेश विकल्पों और उनके लाभों के बारे में:

डाकघर सावधि जमा खाता (टीडी)

डाकघर सावधि जमा खातों के लिए आप चार संभावित कार्यकाल चुन सकते हैं, यानी 1 वर्ष, 2 वर्ष, 3 वर्ष और 5 वर्ष। इस खाते में न्यूनतम जमा राशि 1,000 रुपये होती है। ब्याज की गणना त्रैमासिक रूप से की जाती है लेकिन यह वार्षिक आधार पर दी जाती है। 3 साल तक के कार्यकाल के लिए ब्याज़ दर 5.5% प्रति वर्ष है और 5 साल के कार्यकाल के लिए यह 6.7% प्रति वर्ष होती है। 

डाकघर मासिक आय योजना खाता (एमआईएस)

इस स्कीम के अंतर्गत आप सिंगल अकाउंट में 1,000 रुपये से लेकर 4.5 लाख रुपये तक और जॉइंट अकाउंट में 9 लाख रुपये तक जमा कर सकते हैं। इस खाते में 6.6% प्रति वर्ष की ब्याज दर से लाभ लिया  जा सकता है। इस योजना से आप मासिक निश्चित आय प्राप्त कर सकते हैं। आप एक वर्ष पूरा करने से पहले खाता बंद नहीं कर सकते। एक वर्ष से अधिक समय से पहले बंद करने पर पेनाल्टी लग सकती  है।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस)

यह एक सरकार द्वारा समर्थित सेवानिवृत्ति योजना है जो आपको एक ही बार में एकमुश्त राशि जमा करने की अनुमति देती है। यह डिपाजिट अमाउंट 1,000 रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक हो सकती है। यह योजना 7.4% प्रति वर्ष की ब्याज दर प्रदान करती है। 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति इस खाता को खोलने के पात्र होते हैं।

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15 वर्षीय पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड अकाउंट (पीपीएफ)

कई वेतनभोगी व्यक्ति पीपीएफ को इन्वेस्टमेंट के रूप में पसंद करते हैं क्योंकि यह योजना प्रति वित्तीय वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक आयकर कटौती प्रदान करती है। खाता खोलने के लिए आवश्यक न्यूनतम जमा राशि 500 रुपये है और ऊपरी सीमा 1.5 लाख रुपये है।

हालांकि खाते का कार्यकाल 15 वर्ष का होता है लेकिन खाते को सक्रिय रखने के लिए आपको प्रति वित्तीय वर्ष केवल 500 रुपये का ही भुगतान करना होगा। इस योजना में  7.1% प्रति वर्ष की ब्याज दर से रिटर्न आता  है। ब्याज सालाना चक्रवृद्धि होता है। साथ ही इस अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री होता है।

राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी)

एनएससी पांच साल के कार्यकाल का होता है जहां आपको न्यूनतम 1,000 रुपये जमा करने की आवश्यकता होती है। इस खाते के लिए कोई अधिकतम जमा निर्धारित नहीं की गयी है। 6.8% प्रति वर्ष की ब्याज दर के साथ, ब्याज सालाना चक्रवृद्धि हो जाता है और केवल परिपक्वता पर ही इसका भुगतान किया जाता है।

इस योजना के तहत कोई भी व्यक्ति कितने भी खाते खोल सकता है। सर्टिफिकेट को गिरवी रखा जा सकता है या आवास वित्त कंपनी, बैंकों, सरकारी कंपनियों और अन्य को सिक्योरिटी के रूप में प्लेज या स्थानांतरित किया जा सकता है।

किसान विकास पत्र (केवीपी)

इस योजना  के अंतर्गत आपका निवेश दोगुना हो जाता है। इस खाते के लिए न्यूनतम जमा राशि 1,000 रुपये है। वित्तीय वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही पर लागू दरों के अनुसार लागू ब्याज दर 6.9% प्रति वर्ष है और खाते की अवधि 124 महीने की है। खाते की अवधि ब्याज दर में बदलाव के साथ बदलती रहती है।

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सुकन्या समृद्धि अकाउंट (एसएसए)

यह एक सरकारी योजना है जो बालिकाओं की वित्तीय सहायता के लिए लागू की गयी है। केवल 10 वर्ष से कम उम्र की बच्चियां ही इस खाते का लाभ पाने की पात्र होती हैं। खाता माता-पिता या अभिभावकों द्वारा खोला और संचालित किया जाना चाहिए।

आवश्यक न्यूनतम जमा राशि 250 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये प्रति वित्तीय वर्ष होती है और 7.6% प्रति वर्ष की ब्याज दर दी जाती है। ब्याज की गणना सालाना आधार पर की जाती है और सालाना चक्रवृद्धि होती रहती है। जब तक बालिका 18 वर्ष की नहीं हो जाती तब तक अभिभावक खाते का संचालन कर सकते हैं। यह निवेश खाता खोलने की तिथि से अधिकतम 15 वर्षों के लिए जमा किया जा सकता है।

- जे. पी. शुक्ला