होम लोन के जरिये टैक्स बचाने में आपकी बड़ी मदद करेंगी यह जरूरी बातें

  •  अनिशा अरोड़ा
  •  फरवरी 15, 2019   15:44
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होम लोन के जरिये टैक्स बचाने में आपकी बड़ी मदद करेंगी यह जरूरी बातें
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इस कारण अगर आप अपने सपनों का घर खरीदना या बनवाना चाहते हैं तो होम लोन लेना आपके लिए एक कारगर उपाय साबित हो सकता है। यही नहीं, क्या आप जानते हैं कि लोन के द्वारा आप इन्कम टैक्स में भी भारी बचत पा सकते हैं ?

भारत में होम लोन लेने की प्रक्रिया अब और अधिक व्यापक और सरल हो गयी है। कम समय में वेरिफ़िकेशन और लोन वितरण, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर द्वारा अपने लिए उपयुक्त धनराशि की आसानी से गणना जैसी तमान खूबियाँ, होम लोन को एक आकर्षक विकल्प बनाती हैं। 

इस कारण अगर आप अपने सपनों का घर खरीदना या बनवाना चाहते हैं तो होम लोन लेना आपके लिए एक कारगर उपाय साबित हो सकता है। यही नहीं, क्या आप जानते हैं कि लोन के द्वारा आप इन्कम टैक्स में भी भारी बचत पा सकते हैं ? 

जी हाँ, लोन राशि वापस चुकाने पर आप इन्कम टैक्स की सेक्शन 80C, सेक्शन 24 (b) और सेक्शन 80EE (पूर्व में) के अंतर्गत टैक्स में कटौती के हकदार हैं। फिर चाहे आप मूलधन का भुगतान करें या फिर ब्याज का, दोनों ही सूरतों में आप इस छूट के अधिकारी होंगे। आइए हम होम लोन और उससे जुड़े कर लाभ के बारे में और गहराई से पड़ताल करें। 

1. सेक्शन 80C के अंतर्गत मूलधन की अदायगी पर टैक्स लाभ

यदि आप होम लोन के मूलधन को चुकाते हैं, तो आप सेक्शन 80C के तहत अधिकतम रु. 1,50,000 तक बचा सकते हैं। लेकिन, घर का निर्माण पूरा होने के बाद मूल ऋण राशि की अदायगी पर ही आप इस कर लाभ के भागीदारी बन सकते हैं। 

इसके अतिरिक्त, जो राशि आपने स्टैम्प ड्यूटी चार्जेस और रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में देते हैं, उस पर भी आप 80C के अंतर्गत छूट ले सकते हैं। स्टैम्प ड्यूटी चार्जेस और रजिस्ट्रेशन फीस देने पर आप बिना होम लोन लिए भी, टैक्स में छूट का लाभ उठा सकते हैं। 

2. सेक्शन 24 (b) के तहत ब्याज की अदायगी पर टैक्स लाभ

सेक्शन 24 (b) के अंतर्गत यदि आप होम लोन पर देय ब्याज का भुगतान करते हैं, तो आपको जमा की गयी राशि पर टैक्स छूट मिलती हैं। इस सेक्शन के तहत आप एक आर्थिक वर्ष में अधिकतम रु. 2 लाख तक का टैक्स सेविंग कर सकते हैं। 

लेकिन यदि आपके मकान का निर्माण लोन लेने के तीन वर्ष के भीतर पूरा नहीं होता है, तो आप केवल रु. 30,000 तक की रियायत ही ले सकते हैं। साथ ही, अगर आपने लोन मकान की मरम्मत या नवीकरण करवाने के लिए लिया है, तो भी आप सेक्शन 24(b) के अंतर्गत टैक्स राहत प्राप्त नहीं कर सकते हैं। 

3. होम लोन पर टैक्स लाभ क्लेम करने की प्रक्रिया

अपने होम लोन पर टैक्स लाभ क्लेम प्रक्रिया बहुत ही सरल है। यदि आप भी टैक्स में कटौती का दावा करना चाहते हैं तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें - 

स्टेप 1: सबसे पहले आप टैक्स कटौती की गणना कर लें जिसके आप हकदार हैं। 

स्टेप 2: ये बात सुनिश्चित कर लें कि मकान आपके नाम पर है अथवा आप लोन के सह-उधारकर्ता हैं। 

स्टेप 3: स्रोत पर कर कटौती (TDS) को समायोजित करने के लिए अपने नियोक्ता को अपना होम लोन ब्याज प्रमाणपत्र जमा करें।

स्टेप 4: यदि आप उपरोक्त प्रमाणपत्र जमा नहीं करते हैं तो आपको टैक्स रिटर्न खुद से ही भरना पड़ेगा। 

स्टेप 5: यदि आप व्यवसायी हैं तो आपको यह सभी दस्तावेज़ कहीं जमा नहीं करने पड़ेंगे। किन्तु आप उन्हें संभाल के रखें ताकि समय आने पर आप इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा सुनियोजित किसी भी कार्यवाही का जवाब दे सकें।

4. होम लोन पर टैक्स लाभ की गणना करने की प्रक्रिया 

आप Axis Bank जैसे सम्मानित बैंकों की वेबसाइट पर उपलब्ध ऑनलाइन टैक्स कैलकुलेटर की मदद से बड़ी ही आसानी द्वारा अपने होम लोन पर मिलने वाले टैक्स लाभ की गणना कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपने लोन से जुड़ी कुछ ज़रूरी बातों का विवरण जानना आवश्यक है जैसे: 

- लोन राशि 

- लोन की अवधि 

- ब्याज दर 

- लोन शुरू होने की तारीख

- कुल वार्षिक आय 

- सेक्शन 80C के अंतर्गत मिलने वाली छूट

5. पहली बार मकान खरीदने के लिए होम लोन पर सेक्शन 80EE द्वारा टैक्स में छूट 

पूर्व में मकान ख़रीदने के लिए यदि आप ने होम लोन लिया था तो आप लोन की देय ब्याज राशि पर सेक्शन 80EE के अंतर्गत टैक्स में छूट ले सकते हैं। हालांकि, इस सेक्शन के तहत कर लाभ प्राप्त करने कि कुछ प्रमुख शर्तें हैं- 

- होम लोन 1 अप्रैल 2013 से लेकर 31 मार्च 2014 के बीच मंजूर किया गया हो। 

- लोन राशि रु. 25 लाख तक ही होनी चाहिए 

- गृह संपत्ति का कुल मूल्य रु. 40 लाख से अधिक नहीं होना चाहिए। 

सेक्शन 80EE के अंतर्गत आप रु. 1 लाख तक की अधिकतम कर छूट प्राप्त कर सकते हैं। किन्तु यह टैक्स छूट केवल साल 2014 या उससे पहले लिए गए लोनों पर लागू है। यदि आपने 2015 या उसके बाद होम लोन लिया है तो आप सेक्शन 80EE के तहत कर में राहत नहीं पा सकते। 

होम लोन पर टैक्स लाभ लेना है आसान 

यदि आप होम लोन लेते हैं तो आप लोन के मूलधन और देय ब्याज, दोनों के ऊपर टैक्स लाभ पाने के हकदार बन जाते हैं। मूलधन की वापसी करने पर आपको इन्कम टैक्स एक्ट 1961 की सेक्शन 80C के तहत कर में छूट मिलती है। साथ ही आपको सेक्शन 24(b) के अंतर्गत रु. 2 लाख तक की ब्याज राशि के भुगतान पर उतनी ही राशि के बराबर कर कटौती मिलती है। इस कारण जब भी आप मकान बनवाने या फिर खरीदने जाएँ तो होम लेने से हिचकें मत, बल्कि उसका फायदा उठाएँ।

- अनिशा अरोड़ा







भूमि, सोना और मकान में निवेश करने से पहले कीजिए यह विचार

  •  कमलेश पांडेय
  •  दिसंबर 4, 2020   16:50
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भूमि, सोना और मकान में निवेश करने से पहले कीजिए यह विचार
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दरअसल जानकारों का मानना है कि आप भूमि में उसी पैसे को निवेशित करें जिसकी जरूरत आपको निकट भविष्य में नहीं पड़े। क्योंकि भूमि सौदे को खरीदना जितना मुश्किल है, उससे भी ज्यादा परेशानी आती है उसे बेचने में। और जब तक बिक नहीं जाए, तब तक मन में संशय बना रहता है।

आपने देखा होगा कि जब भी किसी के पास जीवन-यापन से अतिरिक्त पैसा बचता है तो वह उसे उन जगहों पर लगाना चाहता है, जहां पर वे सुरक्षित हों और उससे बेहतर रिटर्न भी मिले और फिर मिलता रहे। इस नजरिए से भूमि, सोना और मकान को लम्बी अवधि के लिए बेहतर रिटर्न देने वाला साधन तो माना जा सकता है। लेकिन यदि आपको कम अवधि के लिए निवेश करना हो तो निवेश के अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे, या फिर उपयुक्त तरीके से अनुभवी लोगों से बातचीत करके उसपर गौर फरमाएंगे तो अच्छा रहेगा।

अमूमन, ऐसा इसलिए कि पुरानी मान्यताओं को तरजीह देने वाले  भारतीय समाज के लोग आज भी भूमि, सोना या मकान में निवेश करना ज्यादा उपयुक्त और सुरक्षित समझते हैं। क्योंकि भूमि में बगान लग जाने और मकान में दुकान निकल जाने से उसके मूल्य में काफी बढोत्तरी हो जाती है। यहां पर एक कहावत भी प्रचलित है कि सोना बेचकर कोना खरीदा जाता है, लेकिन कोना बेचकर सोना कतई नहीं खरीदा जाता। क्योंकि सोना चल सम्पत्ति है, जबकि भूमि अचल प्रॉपर्टी। यही वजह है कि कुछ अपवादों को छोड़कर जो लोग इसमें निवेश करते हैं, वे बदलते वक्त के साथ बेहतर रिटर्न नहीं ले पाते। इसके दो कारण हैं:- एक, इसमें बहुत ज्यादा पूंजी की जरूरत पड़ती है, और दूसरा, जानकारी के अभाव में लोग भूमि, सोना या मकान का सही क्रय और वाजिब उपयोग नहीं कर पाते हैं।

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# भूमि में दीर्घ अवधि का निवेश ही देता है फायदा

दरअसल जानकारों का मानना है कि आप भूमि में उसी पैसे को निवेशित करें जिसकी जरूरत आपको निकट भविष्य में नहीं पड़े। क्योंकि भूमि सौदे को खरीदना जितना मुश्किल है, उससे भी ज्यादा परेशानी आती है उसे बेचने में। और जब तक बिक नहीं जाए, तब तक मन में संशय बना रहता है। इसलिए कि जरूरतमंद भूमि बिक्रेता को प्रायः अच्छा भाव नहीं मिल पाता है। इसके अलावा, कागजी कार्रवाई यथा- रजिस्ट्री, म्यूटेशन में लगा मोटा धन तुरंत बेचने पर प्रायः वापस नहीं लौट पाता।

यदि भूमि की खरीद-बिक्री के बीच में कोई प्रॉपर्टी डीलर या दलाल है तो और भी अधिक सजग रहें, क्योंकि कमीशन के अलावा दोनों ओर से टांके मारकर वह मोटी धनराशि पर हाथ फेर लेता है। यही नहीं, इसी चालबाजी और आपाधापी में कभी कभी खरीद-बिक्री का बना बनाया काम भी चौपट हो जाता है, क्योंकि क्रेता या बिक्रेता में से कोई न कोई नाराज हो ही जाता है। इसलिए व्यावसायिक पारदर्शिता की नीति को यहां भी लागू करें।

# भूमि सम्बन्धी कुछ महत्वपूर्ण पड़ताल करने से आपको मिलेगा अतिरिक्त लाभ और मानसिक सुकून

मसलन, जब भी आपको भूमि में निवेश करने की जरूरत पड़े तो हमेशा यह ध्यान रखिए कि उस भूमि का महत्व क्या है? उसका सर्कल रेट क्या है? उसका मार्केट मूल्य क्या है? दोनों में अंतर कितना है? वह व्यावसायिक भूखंड है या औद्योगिक या फिर रिहायशी। मुख्य बाजार या फिर अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से उसकी दूरी क्या है? उसका रेंटल वैल्यू क्या है? क्या वह कृषि भूमि है, या फिर बाड़ी-झाड़ी?

ऐसा करते समय आप यह भी सोचिए कि क्या उस पर बगान लगाया जा सकता है? क्या उस पर व्यावसायिक काम किया जा सकता है? क्या उस पर मकान या गोदाम बनाकर नियमित रेंटल आमदनी विकसित की जा सकती है। यदि वह रिहायशी भूमि है तो कैसी कॉलोनी में है- नई कॉलोनी में या फिर पुरानी कॉलोनी में। क्योंकि नई कॉलोनी में अधिक रिटर्न मिलेगा, जबकि पुरानी कॉलोनी में कम। किसी भी नई या पुरानी कॉलोनी में बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, अस्पताल, मार्केट काम्प्लेक्स, उपासना स्थल, खेल के मैदान, पार्क, सामुदायिक भवन आदि की उपलब्धता के आधार पर भी कीमत घटती-बढ़ती रहती है। ऐसी कॉलोनी की कीमत बस स्टैंड से दूरी, रेलवे स्टेशन से दूरी, हवाई अड्डे से दूरी, बाजार से दूरी, प्रमुख प्रतिष्ठानों से दूरी, मुख्य सड़क से दूरी के आधार पर भी निर्धारित होती है।

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# भूमि लेने से पहले पता कीजिए यह महत्वपूर्ण बातें

दरअसल, ये ऐसी बातें हैं जो किसी भी भूमि के मूल्य में इजाफा करती हैं। इसलिए आप यह भी पता कीजिए कि सम्बन्धित कॉलोनी या व्यावसायिक इलाका कच्ची है या पक्की। स्थानीय अथॉरिटी से स्वीकृत है या फिर लाल डोरा क्षेत्र। उस भूमि पर बैंक लोन हो सकता है या नहीं। यदि हो सकता है तो फिर कितना? क्योंकि जितना हो सकता है, वही उसका वास्तविक मूल्य हुआ, जिसका भुगतान आप चेक या ड्राफ्ट के माध्यम से करते हैं। और जो आपसे ब्लैक में या नगद मांगा जाएगा, वह इस पेशे में जुड़े लोगों और बिक्रेता का अतिरिक्त लाभ होता है जिसकी अब परम्परा बन चुकी है। लेकिन यह दबी जुबान से चलती है, खुल्लमखुल्ला नहीं। इसलिए अपेक्षित सावधानी बरतें।

इसके अलावा, जब भी आप भूमि खरीदें तो लोन अवश्य करवाएं, इससे जमीन सम्बन्धी कमियों का पता अपने आप चल जाता है। साथ ही, पेपर चेन अवश्य लें। यदि रजिस्ट्री हो तो तुरंत करवाएं और पावर ऑफ अटॉर्नी के चक्कर में न पड़ें। साथ ही, म्यूटेशन भी अवश्य करवा लें। इससे आपकी भूमि परफेक्ट हो जाएगी और जब भी आप इसे बेचना चाहेंगे तो आसानी से बिक जाएगी और ठीकठाक मुनाफा देगी, बशर्ते कि आप चालाकी पूर्वक अपना काम करने को ततपर रहिए।

# मकान, दुकान, फ्लैट, कोठी, फैक्ट्री खरीदने से पहले जुटाइये महत्वपूर्ण जानकारियां, ताकि सुरक्षित रहे आपका निवेश

ये तमाम बातें किसी मकान, दुकान, फ्लैट, कोठी, फैक्ट्री आदि पर भी लागू होती हैं। हालांकि, कुछ अतिरिक्त कानूनी सावधानियां भी बरतनी पड़ती हैं और सम्बन्धित संस्थाओं के प्रावधानों के मुताबिक सौदे को जांचना-जंचवाना पड़ता है।जैसे, किसी भी मकान, दुकान, फ्लैट, कोठी या फैक्ट्री को खरीदने से पहले ये पता कीजिए कि उसका नक्शा सम्बन्धित निकाय से विधिवत पास हुआ है या नहीं। इसी तरह बिजली, पानी का लीगल कनेक्शन लगा हुआ है या नहीं। इस मामले में फैक्ट्री की भूमि, भवन का नियंत्रण प्रायः अलग संस्था के पास होता है, जहां से पॉल्युशन आदि के प्रावधानों की भी बरीकीपूर्वक जांच करनी-करवानी पड़ती है। बनी बनाई मकान, फ्लैट, कोठी आदि के निर्माण की गुणवत्ता का ख्याल अवश्य रखें और किसी अनुभवी अभियंता से इसकी जांच करवाएं। 

ऐसा नहीं हो कि मकान, दुकान, फ्लैट, कोठी आदि खरीदने के बाद उसमें मरम्मत या तोड़फोड़ करवानी पड़े। सम्भव हो तो किसी वास्तुविद से भी सलाह जरूर करें। ये ऐसी बारीकियां हैं जिससे आपका निवेश परिपक्व समझा जाएगा और उससे आपको अपेक्षा से अधिक लाभ भी मिल सकता है। इसलिए धैर्यपूर्वक डील करें, सस्ता सौदा खरीदें, महंगे दामों पर बेचें, ताकि आपके निवेश पर आपको अव्वल रिटर्न मिले। अब तक के ट्रेंड के मुताबिक प्रायः 10-12 साल में जमीन की कीमत दोगुनी हो ही जाती है। इसलिए इत्मीनान पूर्वक निवेश करें।

# सोने में निवेश से पहले कीजिए यह महत्वपूर्ण विचार

जहां तक सोने में निवेश की बात है तो सोने के सिक्के या बिस्कुट में ही निवेश करें। किसी भी तरह के स्वर्ण आभूषण में यदि निवेश करना पड़े तो हॉल मार्क वाले आभूषण में निवेश करें, क्योंकि ऐसा करने से टांके का चक्कर नहीं पड़ता है। क्योंकि आमतौर पर टांके के खेल में आपका लाभ प्रायः स्वर्णकार ही हड़प जाता है। दरअसल, किसी भी सोने की कीमत प्रायः कैरेट के हिसाब से ही तय होती है, लेकिन बिस्कुट आपको 24 कैरेट के मिल जाएंगे, किन्तु स्वर्णाभूषणों में 20-22 कैरेट या 16-18 कैरेट का प्रचलन ज्यादा है। इसका असर सोने की गुणवत्ता और कीमत पर भी पड़ता है। आपको पता होना  वैसे तो सोने के भाव प्रायः ऊपर ही जाता है, लेकिन ऑफ सीजन में ये कभी कभार 2-3 हजार रुपये तक डाउन भी हो जाता है। अब तक के ट्रेंड के मुताबिक, अमूमन 8-10 सालों में सोने के भाव दुगुने हो ही जाते हैं। इसलिए आपका निवेश दुगुना हो जाएगा।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार







मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग के बिना अटल पेंशन योजना अकाउंट कैसे खोलें

  •  जे. पी. शुक्ला
  •  दिसंबर 2, 2020   13:24
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मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग के बिना अटल पेंशन योजना अकाउंट कैसे खोलें
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आपको बता दें कि वर्तमान में कुछ बैंक नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन APY खाता खोल रहे हैं। हालांकि, अभी भी बहुत से ऐसे बैंक खाता धारक हैं, जो APY के तहत नामांकित हो सकते हैं, वे नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप सुविधा का उपयोग नहीं कर रहे हैं।

क्या आपके पास बैंक खाता है, लेकिन अभी तक अटल पेंशन योजना (APY) खाता नहीं खोल पाए हैं, क्योंकि आप नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप सुविधा का उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो आपके लिए खुशखबरी है, क्योंकि APY खाता खोलने की प्रक्रिया को जल्द ही आसान बनाया जा रहा है।

अटल पेंशन योजना (APY), जो 2015 में सामान्य लोगों के साथ साथ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, जैसे नौकरानियों, माली और ड्राइवरों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा योजना के रूप में शुरू की गई थी, अब नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप विधि के अलावा एक आसान वैकल्पिक तंत्र के माध्यम से शुरू होने जा रही है।

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जिन लोगों के पास बैंक खाता है, लेकिन वे नेट बैंकिंग सुविधा का उपयोग नहीं कर रहे हैं, उनके लिए अटल पेंशन योजना (APY) खाता खोलना जल्द ही आसान हो जाएगा। APY ग्राहकों के लिए ऑन-बोर्डिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए APY-POP को पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा उनके मौजूदा बचत खाताधारकों के ऑन-बोर्डिंग के लिए एक वैकल्पिक चैनल शुरू करने की अनुमति दी जा रही है। नए चैनल के तहत कोई भी नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप का उपयोग किए बिना एपीवाई खाता खोल सकता है।

आपको बता दें कि वर्तमान में कुछ बैंक नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन APY खाता खोल रहे हैं। हालांकि, अभी भी बहुत से ऐसे बैंक खाता धारक हैं, जो APY के तहत नामांकित हो सकते हैं, वे नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप सुविधा का उपयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे हालात में ये खाता धारक ऑनलाइन या डिजिटल मोड के माध्यम से एपीवाई खाता नहीं खोल सकते हैं।

लेकिन अब इस नए कदम से उन बैंक खाताधारकों को मदद मिलेगी, जो नेट बैंकिंग का उपयोग नहीं करते हैं और अपनी रिटायरमेंट की जरूरतों के लिए APY में निवेश करना चाहते हैं।

क्या है प्रक्रिया?

अगर आप APY के अंतर्गत खाता खोलना चाहते हैं तो आप अपनी उस बैंक शाखा से संपर्क कर सकते हैं, जहां आपका बचत खाता है। वहां जाकर अटल पेंशन योजना पंजीकरण फॉर्म भरें और उसे सबमिट करें। आपको अपना एक वैध फोन नंबर देना होगा और उसी पंजीकृत मोबाइल नंबर पर सभी विवरण एसएमएस के माध्यम से  आपको भेजे जाएंगे। आपको ग्राहक आईडी या बैंक खाता संख्या या पैन या आधार प्रदान करके पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करनी होगी। पंजीकरण पूरा करने के लिए ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण किया जाएगा।

अटल पेंशन योजना में कौन निवेश कर सकता है?

अटल पेंशन योजना में निवेश करने और वहां से पेंशन प्राप्त करने में सक्षम होने के लिए व्यक्तियों को निम्नलिखित आवश्यकताओं को पूरा करना होगा -

इसे भी पढ़ें: जानिये क्या है स्वामित्व योजना ? इससे आपको क्या और कैसे मिलेगा फायदा ?

1. वह भारतीय नागरिक होना चाहिए

2. उसके पास एक सक्रिय मोबाइल नंबर होना चाहिए

3. न्यूनतम 20 वर्षों के लिए योजना में योगदान होना चाहिए

4. वह 18 वर्ष और 40 वर्ष की आयु वर्ग के भीतर होना चाहिए

5. उसके पास अपने आधार से जुड़ा एक बैंक खाता होना चाहिए

6. उसे किसी भी अन्य सामाजिक कल्याण योजना का लाभार्थी नहीं होना चाहिए

मासिक योगदान और भुगतान का तरीका क्या है?

APY एक आवधिक योगदान आधारित पेंशन योजना है जो 1000 / 2000 / 3000 / 4000 या 5000 रुपये की निश्चित मासिक पेंशन प्रदान करता है। आपका मासिक योगदान उस मासिक पेंशन की निर्धारित राशि पर निर्भर करता है जिसे आप चाहते हैं। पेंशन 60 साल की उम्र में शुरू होती है। इसलिए, भले ही आप 40 वर्ष की आयु में एपीवाई में शामिल हों, आपको पेंशन का लाभ उठाने के लिए न्यूनतम 20 वर्ष तक प्रीमियम का भुगतान करना होगा।

अटल पेंशन योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

भारत के सभी बैंकों को अटल पेंशन योजना के तहत पेंशन खाता खोलने का अधिकार है। APY के लिए आवेदन करने के आपको निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी होगी  -

- उस बैंक की निकटतम शाखा पर जाएँ जहाँ आपका खाता है

- आवश्यक विवरण के साथ आवेदन पत्र को विधिवत भरें

- इसे अपने आधार कार्ड की दो फोटोकॉपी के साथ जमा करें

- अपना सक्रिय मोबाइल नंबर प्रदान करें

60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद आपको अपने संबंधित बैंक या डाकघर से संपर्क करना होगा और पेंशन के लिए रिक्वेस्ट फॉर्म जमा करना होगा। हालांकि, अगर 60 वर्ष के बाद ग्राहक की मृत्यु के मामले में, मासिक पेंशन की समान राशि पति / पत्नी या जो भी नॉमिनी हैं, उन्ही को मिलती है। 

60 वर्ष की आयु से पहले एग्जिट:

APY में स्वैच्छिक निकास की अनुमति नहीं है। हालांकि असाधारण परिस्थितियों, जैसे कि टर्मिनल बीमारी या ग्राहक की मृत्यु के मामले में इसकी अनुमति दी जा सकती है। यदि कोई ग्राहक, जिसने APY के तहत सरकार के सह-योगदान का लाभ उठाया है और APY से स्वैच्छिक रूप से बाहर निकलने का विकल्प चुनता है तो उसे केवल APY को उसके द्वारा दिए गए योगदान के साथ शुद्ध वास्तविक अर्जित आय वापस कर दी जाएगी, लेकिन खाता रखरखाव शुल्क में कटौती के बाद। सरकार के सह-योगदान और उस योगदान पर अर्जित आय, ऐसे ग्राहकों को वापस नहीं की जाएगी।

जे. पी. शुक्ला







रिटर्न दाखिल करते समय इन त्रुटियों से बचें, ताकि आपको नोटिस ना मिले

  •  जे. पी. शुक्ला
  •  नवंबर 28, 2020   17:11
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रिटर्न दाखिल करते समय इन त्रुटियों से बचें, ताकि आपको नोटिस ना मिले
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80 सी, 80 डी और 24 (बी) जैसे विभिन्न वर्गों के तहत आयकर निर्धारणकर्ताओं की विभिन्न कर कटौती उपलब्ध हैं। ये कटौती निवेश या खर्च के लिए उपलब्ध हैं। इनके अलावा, कटौती और छूट की गणना करते समय विचार करने के लिए विभिन्न नियम और सीमाएं हैं।

कर नोटिस प्राप्त करना, वह भी करों का भुगतान करने और आईटीआर दाखिल करने के बाद! शायद वह आखिरी चीज होगी जो आप नहीं चाहेंगे।

पिछले कुछ वर्षों से आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया बन गई है। हालाँकि, जैसा कि आपको विभिन्न विवरणों को भरना और आईटीआर दाखिल करते समय विभिन्न चरणों का पालन करना आवश्यक है, गलतियाँ करने या गलत जानकारी भरने की थोड़ी संभावना अवश्य रहती है। उदाहरण के लिए, आप पूरी तरह से गलत आईटीआर फॉर्म चुन सकते हैं, किसी आय का उल्लेख करने से चूक सकते हैं, गलत स्व-मूल्यांकन कर चालान विवरण या गलत टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) विवरण, कर कटौती खाता संख्या या कोई अन्य विवरण हो- ये सभी आपको एक कर नोटिस प्राप्त करने के कारण बन सकते हैं।

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आइए सबसे आम गलतियों पर नज़र डालते हैं जो आप कर सकते हैं और उनसे कैसे बचा जाए।

1. गलत आईटीआर फॉर्म का चयन करना

केवल वही आईटीआर फॉर्म चुनें जो आपके लिए लागू है। सरकार ने करदाताओं के विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग आईटीआर फॉर्म निर्धारित किए हैं, जो उनकी आवासीय स्थिति पर निर्भर करता है, जिसके तहत उनके आय के स्रोत आते हैं, जैसे कर योग्य आय का स्तर, किसी कंपनी में शेयर / निर्देशन या एक साझेदारी फर्म में सदस्य आदि। अक्सर करदाता इनमें से कुछ शर्तों की अनदेखी कर जाते हैं और इस तरह अनजाने में गलत फॉर्म का चयन कर लेते हैं। 

इसलिए, उपयुक्त आईटीआर फॉर्म का चयन करना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। यदि आप गलत आईटीआर फॉर्म में अपनी रिटर्न फाइल करते हैं तो इसे अमान्य माना जाता है या बिल्कुल भी दायर नहीं माना जाता है और ऐसे मामलों में आपको कर विभाग से नोटिस मिल सकता है।

2. किसी आय का छूट जाना

दूसरी सबसे आम गलती, जो ज्यादातर कर फाइलर करते हैं, वो है कुछ निश्चित आय की अनदेखी करना। आपके नियोक्ता टैक्स काटते हैं और आपको फॉर्म 16 देते हैं। लेकिन क्या वह एकमात्र आय है जो आपने अर्जित की है? एक साधारण बचत बैंक बैलेंस से आपको ब्याज भी तो मिलता है। वह भी कर योग्य है। यद्यपि आपका निवेश छोटा है, मगर फॉर्म में यह भी घोषित किया जाना चाहिए। आपके फॉर्म 16 ने इसे कवर नहीं किया होगा। 

कभी-कभी करदाता, विशेष रूप से वेतनभोगी, मुख्य रूप से अपने नियोक्ताओं द्वारा जारी किए गए फॉर्म 16 या टीडीएस प्रमाणपत्र के आधार पर ही अपना आईटीआर दाखिल कर देते हैं। वे अनजाने में आय के अन्य स्रोतों, जैसे कि ब्याज आय को मिस कर जाते हैं। आईटीआर फॉर्म भरते समय ऐसे विवरणों को इकठ्ठा करना चाहिए और उन्हें संभाल कर रखना चाहिए। कर रिटर्न का आकलन करते समय कर विभाग मिसिंग आय को नोटिस कर सकता है और आपको एक डिमांड नोटिस भेज सकता है।

3. टैक्स क्रेडिट में बेमेल (Mismatch)

इसका मतलब यह है कि आपने अपने कर रिटर्न में जो कर क्रेडिट का दावा किया है और आयकर अधिकारियों के रिकॉर्ड में जो उपलब्ध है, उसके बीच कुछ अंतर है। बेमेल के विभिन्न कारण हो सकते हैं। जैसे कि आपने गलत जानकारी दर्ज की हो या टीडीएस कटौतीकर्ता द्वारा विभाग के पास जमा नहीं किया गया हो या आपके फॉर्म 26AS में परिलक्षित नहीं होता हो। इसलिए, कर नोटिस से बचने के लिए फॉर्म 26AS में दर्शाए गए टीडीएस के साथ अपनी आय में से काटे गए कर की जांच करें। यदि कोई बेमेल है तो अपना टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले इसे ठीक अवश्य करवा लें।

4. गलत कटौती का दावा करना

80 सी, 80 डी और 24 (बी) जैसे विभिन्न वर्गों के तहत आयकर निर्धारणकर्ताओं की विभिन्न कर कटौती उपलब्ध हैं। ये कटौती निवेश या खर्च के लिए उपलब्ध हैं। इनके अलावा, कटौती और छूट की गणना करते समय विचार करने के लिए विभिन्न नियम और सीमाएं हैं। हालांकि, कई बार करदाता तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण एक गलत खंड के तहत एक गलत राशि या कटौती का दावा पेश कर देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी कर देयता में बदलाव आ जाता है।

इसके परिणामस्वरूप, कर नोटिस अपरिहार्य हो जाते हैं। इसलिए, कटौती का दावा करते समय कर नियमों का उचित ज्ञान होना जरूरी है। यदि आपको इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो  ऐसे  हालात में आपको कर विशेषज्ञ या चार्टर्ड एकाउंटेंट से परामर्श लेना उचित होता है।

5. टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करना

कर रिटर्न दाखिल ही नहीं करना, जबकि आप उस श्रेणी में आते हैं, निश्चित रूप से कर नोटिस प्राप्त करने की संभावना को बढ़ाता है। याद रखें, यदि आपकी सकल आय, मूल छूट सीमा से ऊपर है, जैसे - 60 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों के लिए 2.5 लाख रुपये तक, 60 से 80 वर्ष की आयु वालों के लिए 3 लाख रुपये और 80 से अधिक आयु वालों के लिए 5 लाख रुपये,  तो आप अपना टैक्स रिटर्न फाइल अवश्य करें। अन्य मापदंड भी हैं जो कर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य बनाते हैं।

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इसके अलावा, आपको निश्चित तारीख से पहले अपना रिटर्न दाखिल करना चाहिए। इस साल नियत तारीख को 30  नवंबर 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। आप उसके बाद भी 31 मार्च, 2021 तक रिटर्न दाखिल कर सकते हैं, लेकिन एक पेनल्टी के साथ। मूल्यांकन वर्ष (Assessment Year) समाप्त होने के बाद, यानी 31 मार्च के बाद रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता है।

जब हम गलतियाँ करते हैं तो आखिरी क्षण तक चीजों को स्थगित करने से गलतियाँ होने की संभावना को हम और भी बढ़ा देते हैं। इसलिए, हमें अपना टैक्स रिटर्न बहुत ही सावधानी, सही समय और उचित परामर्श के साथ ही फाइल करना चाहिए, जिससे किसी प्रकार के नोटिस की सम्भावना ही न रहे।

जे. पी. शुक्ला