डब्ल्यूपीआई और सीपीआई मुद्रास्फीति क्या होता है और उन्हें कैसे मापा जाता है?

डब्ल्यूपीआई और सीपीआई मुद्रास्फीति क्या होता है और उन्हें कैसे मापा जाता है?

हाल ही में श्रम और रोजगार मंत्रालय ने आधार वर्ष 2016 में औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-आईडब्ल्यू) की नई श्रृंखला जारी की है। मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee- MPC) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए सीपीआई डेटा का उपयोग करती है।

मुद्रास्फीति को एक ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जहां सामान्य मूल्य स्तर में निरंतर, अनियंत्रित वृद्धि और पैसे की क्रय शक्ति में गिरावट होती है। इस प्रकार मुद्रास्फीति मूल्य वृद्धि की  एक कंडीशन होती है। मूल्य वृद्धि के कारणों को दो मुख्य मदों में वर्गीकृत किया जा सकता है- मांग में वृद्धि और आपूर्ति में कमी।

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मान लीजिए पिछले हफ्ते आपने 100 रुपये में 5 किलो चावल खरीदा। इसका मतलब है कि 1 किलो चावल की कीमत रु 20  हुई। लेकिन इस हफ्ते जब आप उसी दुकानदार के पास गए और चावल लेने के लिए 100 रुपये का भुगतान किया तो उसने केवल 4 किलो ही चावल आपको दिया। उन्होंने यह भी बताया कि चावल की कीमत बढ़ गई है और अब यह 25 रुपये प्रति किलो हो गयी है। इस प्रकार यह उदाहरण स्पष्ट रूप से पैसे की क्रय शक्ति में गिरावट की व्याख्या करता है, यानी  पैसे की क्रय शक्ति कम हो गई। यह महंगाई है। इसी प्रकार हम मुद्रास्फीति दर की गणना कर सकते हैं। यदि चावल की कीमत, जो कि पहले 20 रुपये प्रति किलोग्राम थी, को बढ़ाकर 25 रुपये कर दिया गया, तो यह 20 रुपये पर 5 रुपये की वृद्धि के बराबर हुई, यानी  25% की वृद्धि। इस प्रकार मुद्रास्फीति दर 25% हुई, जो स्पष्ट रूप से बहुत अधिक दर है। मुद्रास्फीति की उच्च दर खराब होती है, क्योंकि यह आम लोगों की मेहनत की कमाई को खा सकती है। आम आदमी का जीवन कठिन हो जाएगा। 

भारत में विभिन्न सूचकांक होते हैं जैसे थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index- WPI), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index - CPI) आदि जो भारत में मुद्रास्फीति की दर को मापते हैं। 

थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index - WPI) क्या होता है?

- WPI सूचकांक थोक बाजार में खरीदे और बेचे जाने वाले सामानों के औसत मूल्य परिवर्तन को दर्शाता है।  

- यह थोक व्यवसायों द्वारा अन्य व्यवसायों को बेचे जाने वाले सामानों की कीमतों में बदलाव को मापता है।

- यह आर्थिक सलाहकार कार्यालय, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रकाशित होता।

- यह भारत में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला मुद्रास्फीति संकेतक है।

- इस सूचकांक की प्रमुख आलोचना यह है कि आम जनता थोक मूल्य पर उत्पाद नहीं खरीदती है।

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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index - CPI) क्या होता है?

-  यह खुदरा खरीदार के नजरिए से मूल्य परिवर्तन को मापता है। यह राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office -NSO) द्वारा जारी किया जाता है।

- सीपीआई वस्तुओं और सेवाओं जैसे भोजन, चिकित्सा देखभाल, शिक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि की कीमत में अंतर की गणना करता है, जिसे भारतीय उपभोक्ता उपयोग के लिए खरीदते हैं।

- इसके कई उप-समूह हैं जिनमें खाद्य और पेय पदार्थ, ईंधन और प्रकाश, आवास और कपड़े, बिस्तर और जूते शामिल हैं।

- CPI के चार प्रकार इस प्रकार हैं:

-  औद्योगिक श्रमिकों के लिए सीपीआई (आईडब्ल्यू)।

- कृषि मजदूर के लिए सीपीआई (एएल)।

- ग्रामीण मजदूर के लिए सीपीआई (आरएल)।

-  सीपीआई (ग्रामीण/शहरी/संयुक्त)।

- इनमें से पहले तीन को श्रम और रोजगार मंत्रालय में श्रम ब्यूरो द्वारा संकलित किया गया है। चौथा एनएसओ द्वारा सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय में संकलित किया गया है।

- सीपीआई का आधार वर्ष 2012 है।

हाल ही में श्रम और रोजगार मंत्रालय ने आधार वर्ष 2016 में औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-आईडब्ल्यू) की नई श्रृंखला जारी की है। मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee - MPC) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए सीपीआई डेटा का उपयोग करती है। 

सीपीआई और डब्ल्यूपीआई में क्या अंतर होता है?

 ईंधन में बिजली, प्रकाश और स्नेहक, बिजली, कोयला खनन और खनिज तेल शामिल हैं। विनिर्मित वस्तुओं की श्रेणी में खाद्य उत्पाद शामिल हैं; पेय पदार्थ, तंबाकू और तंबाकू उत्पाद; लकड़ी और लकड़ी के उत्पाद, वस्त्र; कागज और कागज उत्पाद; बुनियादी धातु और मिश्र धातु; रबर और रबर उत्पाद। मुख्य अंतर इस प्रकार है:

- WPI उत्पादक स्तर पर मुद्रास्फीति को ट्रैक करता है और CPI उपभोक्ता स्तर पर कीमतों के स्तर में बदलाव को ट्रैक करता है।

- WPI सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन को कैप्चर नहीं करता है, जो CPI करता है।

- WPI में विनिर्मित वस्तुओं को अधिक वेटेज दिया जाता है, जबकि CPI में खाद्य पदार्थों को अधिक वेटेज दिया जाता है।

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मुद्रास्फीति क्या होती है?

- मुद्रास्फीति दैनिक या सामान्य उपयोग की अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि को संदर्भित करती है, जैसे कि भोजन, कपड़े, आवास, मनोरंजन, परिवहन, उपभोक्ता स्टेपल, आदि।

- मुद्रास्फीति समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की एक बास्केट में औसत मूल्य परिवर्तन को मापती है।

- मुद्रास्फीति किसी देश की मुद्रा की एक इकाई की क्रय शक्ति में कमी का संकेत होती है।

- यह अंततः आर्थिक विकास में मंदी का कारण बन सकता है।

- हालांकि उत्पादन को बढ़ावा देना सुनिश्चित करने के लिए अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के एक मध्यम स्तर की आवश्यकता होती है।

- भारत में मुद्रास्फीति को मुख्य रूप से दो मुख्य सूचकांकों - WPI और CPI द्वारा मापा जाता है, जो क्रमशः थोक और खुदरा-स्तर के मूल्य परिवर्तनों को मापते हैं।

- जे. पी. शुक्ला