Health Tips: Stress और Anxiety के दौरान क्यों महसूस होती है Frequent Urination की समस्या

तनाव या चिंता के दौरान नर्वस सिस्टम और फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स सक्रिय होने से ब्लैडर की संवेदनशीलता बढ़ जाती है, जिससे बार-बार यूरिनरी अर्जेंसी महसूस होती है। यह स्थिति सामान्य स्ट्रेस रिस्पॉन्स हो सकती है, लेकिन लगातार परेशानी रहने पर ओवरएक्टिव ब्लैडर अथवा यूटीआई की जांच कराना जरूरी है।
क्या आपके साथ भी अक्सर ऐसा होता है कि स्ट्रेस या चिंता होते ही आपको बार-बार पेशाब आने लगता है। इंटरव्यू, जरूरी मीटिंग या पब्लिक स्पीकिंग से पहले आपको बाथरूम जाने की जरूरत महसूस होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है। क्या स्ट्रेस के कारण ब्लैडर तेजी से भरने लगता है या फिर इसके पीछे ब्लैडर और ब्रेन के बीच कम्युनिकेशन होता है। दरअसल, ब्रेन और ब्लैडर के बीच नर्वस लगातार सिग्नल्स का आदान-प्रदान करता है।
जब भी स्ट्रेस होता है, तो शरीर का स्ट्रेस रिस्पॉन्स एक्टिव हो जाता है। जिसका असर ब्लैडर और नर्वस सिस्टम की संवेदनशीलता पर पड़ता है। जिस कारण कुछ लोगों को ब्लैडर में थोड़ी मात्रा में यूरिन होने पर तेज पेशाब महसूस हो सकती है। हालांकि बार-बार या हर बार पेशाब आना तनाव के कारण नहीं होता है। कई बार ऐसी स्थिति ओवर एक्टिव ब्लैडर, यूटीआई, डायबिटीज और अन्य सेहत संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।
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स्ट्रेस हार्मोन ब्लैडर को कर सकता है प्रभावित
तनाव के दौरान शरीर का फ्लाइट और फाइट रिस्पॉन्स एक्टिव होता है। इसमें हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी-एड्रेनल एक्सिस और सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम जैसे सिस्टम शामिल होते हैं। वहीं ब्लैडर फंक्शन भी ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम के कंट्रोल में भी आता है। इसलिए स्ट्रेस रिस्पॉन्स में होने वाले बदलाव का असर यूरिनरी फंक्शन पर पड़ता है। एक स्टडी में ओवरएक्टिव ब्लैडर वाली महिलाओं में लेबोरेटरी-इंड्यूस्ड एक्यूट तनाव के बाद ब्लैडर अर्जेंसी में बढ़त देखने को मिली।
एंग्जायटी होने पर बढ़ सकती है यूरिन की इच्छा
कुछ लोगों में यूरिनरी अर्जेंसी और एंग्जायटी के बीच संबंध देखा गया है। एंग्जायटी के दौरान व्यक्ति शरीर के सामान्य सेंसेशन को अधिक इंटेंसिवली फील कर सकती है। इस स्थिति में अगर ब्लैडर में थोड़ी भी मात्रा में यूरिन होती है, तो सेंसेशन ज्यादा अर्जेंट लग सकती है। इसके साथ एंग्जायटी के साथ-साथ बार-बार बाथरूम जाने की आदत भी विकसित हो सकती है।
एक स्टडी के मुताबिक ओवरएक्टिव ब्लैडर वाली 69 महिलाओं के डेली लक्षणों वाले डेटा को एनालिसिस किया गया। इस दौरान रिसर्चर्स को यूरिनरी अर्जेंसी और उसी दिन की एंग्जायटी व स्ट्रेस रेटिंग्स के बीच पॉजिटिव एसोसिएशन देखने को मिला।
स्ट्रेस की वजह से बार-बार आती है पेशाब
अगर मेडिकल जांच में यूरिनरी समस्या या किसी इंफेक्शन का पता नहीं चलता है और स्ट्रेस से जुड़े लक्षण नजर आते हैं। तो तनाव को कम करना मददगार हो सकता है। इसके लिए व्यक्ति को तनाव कम करने के लिए नीचे बताए गए उपाय करने चाहिए।
स्ट्रेस होने पर धीमी और गहरी सांस लेना शुरू करें।
कैफीन का सेवन सीमित करें।
जितना हो सके, यूरिन को रोकने की कोशिश करें।
स्ट्रेस को ट्रिगर करने वाली स्थिति की पहचान करें और उस दौरान शांत रहने की कोशिश करें।
अगर घबराहट हो, तो अन्य कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें।
स्ट्रेस से पेशाब आना क्या बीमारी का है संकेत
हर बार नहीं। क्योंकि कभी-कभी स्ट्रेस के दौरान अचानक यूरिनरी अर्जेंसी एक सामान्य स्ट्रेस रिस्पॉन्स का हिस्सा हो सकती है। लेकिन अगर बार-बार ऐसा होता है, या इससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे या फिर रात में बार-बार उठना पड़े। तो आपको डॉक्टर से संपर्क जरूर करना चाहिए। ओवरएक्टिव ब्लैडर में अर्जेंसी के अलावा फ्रीक्वेंसी, नोक्टुरिया यानी रात में पेशाब के लिए उठने और कभी-कभी अर्जेंसी यूरिन को रोक न पाने की स्थिति में हो सकती है। हालांकि ओवर एक्टिव ब्लैडर की डायग्नोसिस से पहले व्यक्ति को यूटीआई और अन्य संभावित कंडीशन को भी ध्यान में रखना चाहिए।
ब्लैडर और स्ट्रेस के बीच कनेक्शन होता है। लेकिन यह सिर्फ 'स्ट्रेस हॉर्मोन ब्लैडर को ज्यादा यूरिन बनाने लगते हैं' जैसी सिंपल कहानी नहीं है। नर्वस सिस्टम, इमोशनल स्टेट, ब्रेन और ब्लैडर मिलकर यूरिनरी सेंसेशन और ब्लैडर कंट्रोल पर असर डाल सकती हैं। रिसर्च में स्ट्रेस और एंग्जायटी को ओवरएक्टिव ब्लैडर और यूरिनरी अर्जेंसी के लक्षणों से जोड़ा गया है। लेकिन इसका असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। इसलिए अगर अगली बार स्ट्रेस होने पर अचानक पेशाब लगे, तो घबराएं नहीं। लेकिन अगर बार-बार अर्जेंसी होती है और स्ट्रेस खत्म होने के बाद भी यह बनी रहती है, बुखार, कमर दर्द और पेशाब में खून या जलन होता है, तो इसको एंग्जायटी नहीं समझना चाहिए।
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