AI Shopping Agents से सस्ते सामान की होड़, आपूर्ति श्रृंखला में कामगारों पर बढ़ सकता है दबाव

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मेटा और गूगल जैसी तकनीकी कंपनियों द्वारा विकसित किए जा रहे नए खरीदारी सहायक ग्राहकों को सबसे सस्ते सौदे दिलाने में मदद कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि एल्गोरिदम द्वारा सबसे कम कीमतों को तरजीह देने से उत्पादन लागत घटेगी और निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों के वेतन और कार्यस्थल सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

(लिनायर शेरिडन, ओटागो विश्वविद्यालय) डुनेडिन (न्यूजीलैंड), 21 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) मेटा का हाल ही में पेश किया गया एआई एजेंट ‘म्यूज’ कई तरह के काम करने में सक्षम होने का भरोसा देता है। यह ईमेल भेजने, छुट्टियां मनाने के लिए जरूरी बुकिंग कर सकता है, मुश्किल ऑनलाइन फॉर्म भर सकता है। लेकिन एक निजी खरीदारी सहायक के रूप में इसकी संभावनाओं को लेकर खासा ध्यान आकर्षित हो रहा है। यह सस्ते सौदों की तलाश करने और उपयोगकर्ता की मंजूरी के बिना खरीदारी करने में सक्षम है। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति दौड़ने के लिए नए जूते खरीदना चाहता है। कुछ ही मिनट में एआई सहायक दर्जनों दुकानों की वेबसाइटों पर खोज कर सकता है और अलग-अलग ब्रांड की तुलना करके सबसे सस्ते और जरूरत के मुताबिक जूते ढूंढ सकता है। म्यूज अकेला ऐसा एआई एजेंट नहीं है। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के बीच इन एजेंट को रोजमर्रा की खरीदारी का हिस्सा बनाने की होड़ लगी है। गूगल और ओपनएआई भी एआई आधारित शॉपिंग टूल विकसित कर रहे हैं। उपभोक्ताओं के लिए इन नए एआई एजेंट का फायदा साफ है। खरीदारी में कम समय लगेगा और बेहतर सौदे मिलने की संभावना होगी। वहीं, खुदरा कारोबारियों के लिए ये ऑनलाइन उत्पादों के प्रचार करने के तरीके को बदल सकते हैं। लेकिन इसका एक और महत्वपूर्ण पहलू है, जिस पर कम ध्यान दिया जा रहा है। इन उत्पादों को बनाने वाले कामगारों का क्या होगा? क्या उनकी स्थिति और भी खराब हो जाएगी?

वे कामगार, जो हमें दिखाई नहीं देते --------------------------------------------- दुनिया के बड़े ब्रांड अपने आपूर्तिकर्ताओं के साथ कीमतों पर बातचीत करते हैं। इन आपूर्तिकर्ताओं को भी अपनी उत्पादन लागत का ध्यान रखना पड़ता है। कच्चा माल एक देश से खरीदा जा सकता है, उसकी चीजें दूसरे देश में बनाई जा सकती हैं और उत्पादों को किसी अन्य जगह पर पूरी तरह तैयार किया जा सकता है। खरीदारों की मांगों का कामगारों पर क्या असर पड़ता है, इस बारे में काफी शोध उपलब्ध हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने पांच देशों के 31 आपूर्तिकर्ताओं पर शोध किया। इसमें पता चला कि खरीदारों की मांगों से वेतन पर दबाव बढ़ा, काम के अतिरिक्त घंटों में वृद्धि हुई और कुछ मामलों में कारखानों ने कार्यस्थल की सुरक्षा के नियमों में कटौती की। ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने भी बताया है कि उपभोक्ताओं और कंपनियों के बीच संबंध तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं श्रम मानकों को लागू करने के तरीके को प्रभावित करती हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के श्रम नीति विशेषज्ञ डेविड पीट्ज ने इस बात का अध्ययन किया है कि आपस में जुड़ी तकनीकें आर्थिक ताकत को कुछ लोगों या कंपनियों के हाथों में कैसे केंद्रित कर सकती हैं। अगर लाखों एआई शॉपिंग एजेंट इंटरनेट पर सबसे कम कीमत वाले उत्पाद खोजने लगें, तो इन दबावों में और वृद्धि हो सकती है। खासकर तब, जब एल्गोरिदम सस्ते उत्पादों को अधिक प्राथमिकता देने लगें। कुछ कंपनियां नई तकनीक और तरीकों से इसका सामना कर सकती हैं, लेकिन दूसरी कंपनियां श्रम लागत घटाकर पैसे बचाने की कोशिश कर सकती हैं। शोषण का सामना करने वाले कामगारों के लिए इसके परिणाम और गंभीर हो सकते हैं। दुनिया भर में पहले से ही करोड़ों लोग गुलामी जैसी स्थिति में रह रहे हैं। जबरन मजदूरी वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में एक बड़ी समस्या बनी हुई है, खासकर विनिर्माण और कृषि जैसे क्षेत्रों में। ऐसा शोषण केवल अनैतिक नियोक्ताओं के कारण नहीं होता। लागत घटाने का दबाव, कमजोर नियम-कानून और अपनी मांगों को मनवाने की कामगारों की सीमित ताकत भी खराब कार्य परिस्थितियों का कारण बन सकती है। तो क्या उपभोक्ता अपने एआई शॉपिंग एजेंट को केवल नैतिक तरीके से बने उत्पाद खरीदने का निर्देश दे सकते हैं? मुश्किल यह है कि ऐसे उत्पादों की पहचान कैसे की जाए, जो इन मानकों पर खरे उतरते हों। दौड़ने के लिए महंगे जूते जरूरी नहीं कि इसलिए महंगे हों कि उनके निर्माण में कामगारों को बेहतर वेतन दिया गया है या उन्हें अच्छी कार्य परिस्थितियां मिली हैं। उनकी अधिक कीमत ब्रांड की पहचान या कंपनी के मुनाफे के कारण भी हो सकती है। कंपनियां नैतिक तरीके से सामान खरीदने के अपने दावों के बारे में जानकारी दे सकती हैं, लेकिन इससे यह जरूरी नहीं कि पता चल जाए कि उनके लिए ठेके पर काम करने वाले कारखानों में वास्तव में क्या हो रहा है। एआई असिस्टेंट कीमतों, डिलीवरी के समय और ग्राहकों की समीक्षाओं की आसानी से तुलना कर सकता है। लेकिन यह पता लगाना उसके लिए कहीं अधिक मुश्किल है कि कामगारों को उचित वेतन मिलता है या नहीं, उन्हें ट्रेड यूनियन बनाने की आजादी है या नहीं और उनके कार्यस्थल सुरक्षित हैं या नहीं। ये ऐसी जानकारियां हैं, जिन्हें हासिल करने में आम उपभोक्ताओं को भी मुश्किल होती है।

क्या एआई की मदद से नैतिक खरीदारी करना आसान हो सकता है? -------------------------------------------------------------------------------- यह भी संभव है कि एआई शॉपिंग एजेंट उपभोक्ताओं को सोच-समझकर खरीदारी के फैसले लेने में मदद करें, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि उन्हें उत्पादों के निर्माण की प्रक्रिया के बारे में विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध हो। इससे जुड़ी कुछ जानकारी पहले से ही जुटाई जा रही है। उदाहरण के लिए, ‘ओपन सप्लाई हब’ दुनियाभर में 25 लाख से अधिक उत्पादन स्थलों का ब्योरा देने वाला एक सार्वजनिक डेटाबेस संचालित करता है। इससे कारखानों और उनसे जुड़ी कंपनियों की पहचान करने में मदद मिलती है। कल्पना कीजिए कि कोई एआई शॉपिंग असिस्टेंट सबसे सस्ते जूते सुझाने के बजाय ऐसी जानकारी और स्वतंत्र रूप से सत्यापित श्रम मानकों के आधार पर ऐसे जूतों की तलाश करे, जिनका निर्माण श्रमिकों के लिए उचित कामकाजी परिस्थितियों में किया गया हो। लेकिन किसी उत्पाद के निर्माण स्थल की जानकारी होना और यह जानना कि वहां कामगारों के साथ कैसा व्यवहार किया गया, दो अलग-अलग बातें हैं। इसके लिए स्वतंत्र जांच, स्वयं कामगारों से मिली जानकारी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी उपाय जरूरी हैं। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने कपड़ों और जूतों के उद्योगों में जिम्मेदारी से सामान की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पहले से दिशानिर्देश बनाए हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के ‘बेटर वर्क’ कार्यक्रम ने दिखाया है कि कारखानों की कार्य परिस्थितियों में सुधार के प्रयास सफल हो सकते हैं। एआई उपभोक्ताओं के लिए इस जानकारी को खोजना और उसकी तुलना करना आसान बना सकता है। लेकिन वह उन नियमों, सामूहिक सौदेबाजी और जवाबदेही की जगह नहीं ले सकता, जो कामगारों की कार्य परिस्थितियों को वास्तव में बेहतर बनाने के लिए जरूरी हैं। किसी उत्पाद की वंशावली यानी उसकी उत्पत्ति और उससे जुड़े संबंधों का पता लगाने का मतलब है रोजमर्रा की खरीदारी के पीछे काम करने वाले लोगों और रोजगार संबंधों को पहचानना। एआई इन संबंधों को कितना स्पष्ट करता है या उन्हें और अधिक छिपा देता है, यह कुछ हद तक उपलब्ध जानकारी और इस बात पर निर्भर करेगा कि शॉपिंग एजेंटों को किन चीजों को प्राथमिकता देने के लिए तैयार किया गया है।

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