DPI और AI पर भारत के साथ सहयोग बढ़ाएगा Norway, पीएम मोदी के दौरे का दिखा असर

नॉर्वे के उप राजदूत अरविन गैडगिल ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना करते हुए कहा कि उनका देश इस सफलता से सीखना चाहता है। उन्होंने भारत के डिजिटल दायरे को दुनिया के लिए बेमिसाल बताया। दोनों देश तकनीक, व्यापार और ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर लगातार काम कर रहे हैं।
नॉर्वे भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) में मिली सफलता से सीखना चाहता है। भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी और सेवाओं तक पहुंच का दायरा दुनिया के लिए एक मिसाल है। यह बात भारत में नॉर्वे के डिप्टी एंबेसडर अरविन गैडगिल ने कही। बुधवार को दिल्ली में रॉयल नॉर्वेजियन एंबेसी की ओर से आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इवेंट के दौरान एएनआई से बात करते हुए गैडगिल ने लोगों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने में भारत की उपलब्धियों का ज़िक्र किया और कहा कि नॉर्वे ने डिजिटल क्षेत्र में भारत के साथ सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग किया है। गैडगिल ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जिस तरह से लोगों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है। वह दुनिया में बेमिसाल है। भारत जितना बड़ा दायरा और कहीं नहीं है। और यही वह चीज़ है जिससे हम सीखना चाहते हैं और असल में हमने इस पर भारत के साथ सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग भी किया है। उन्होंने दोनों देशों के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन होने को खुशी का पल बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओस्लो यात्रा के बाद दोनों देशों के आपसी संबंध और मज़बूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए खुशी का पल था और प्रधानमंत्री की ओस्लो यात्रा के परिणामस्वरूप नॉर्वे और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए हैं। हम मूल रूप से भारत की सफलता को समझने के तरीके खोजना चाहते हैं।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते असर के बारे में बात करते हुए गाडगिल ने कहा कि नई टेक्नोलॉजी इंसानियत और सरकारों, दोनों के लिए बड़े मौके और चुनौतियां लेकर आई हैं। उन्होंने कहा कि हम इंसानी इतिहास के एक बहुत अहम मोड़ पर हैं, जहां हमारे अस्तित्व पर ही उन टेक्नोलॉजी की वजह से सवाल उठ रहे हैं जिन्हें हम अपना रहे हैं। ये हमारे लिए शानदार तोहफ़े तो लाएंगी ही, साथ ही ऐसे खतरे और मुश्किलें भी लाएंगी जिनसे निपटना इंसानों और सरकारों, दोनों के लिए मुश्किल होगा। इसलिए, इस बारे में बातचीत करने के लिए सबसे काबिल लोगों को एक साथ लाना ज़रूरी है कि हम इसे और बेहतर तरीके से कैसे कर सकते हैं। ये बातें ऐसे समय में कही गई हैं जब भारत और नॉर्वे टेक्नोलॉजी, व्यापार, निवेश और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और मज़बूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले, 7 अक्टूबर को MEA के सेक्रेटरी (वेस्ट) सिबी जॉर्ज ने नई दिल्ली में नॉर्वे की स्टेट सेक्रेटरी एस्ट्रिड बर्गमाल से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में भारत-नॉर्वे ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को मज़बूत करने, भारत-यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) फ्रेमवर्क के तहत व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाने, और मछली पालन व आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग का दायरा बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।
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मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के स्तर तक बढ़ाया और भविष्य में सहयोग के लिए एक संयुक्त कार्य योजना तैयार करने पर सहमति व्यक्त की।
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