घर में Clutter हमेशा खराब नहीं होता, रोजमर्रा की जिंदगी को बनाता है आसान: Research

ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता जमाल अबराशी के नए अध्ययन में पाया गया है कि घर में थोड़ा बिखरा सामान हमेशा अव्यवस्था का संकेत नहीं होता। न्यूजीलैंड के 22 परिवारों पर किए गए इस शोध के अनुसार, कई बार सामान का बिखराव रोजमर्रा के कामकाज को सुगम बनाता है। अध्ययन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पूरी तरह व्यवस्थित दिखने वाला घर हर परिवार के लिए सबसे बेहतर हो, यह आवश्यक नहीं है।
(जमाल अबराशी, ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी) ऑकलैंड, 27 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) अगर हम घर को व्यवस्थित रखने के विशेषज्ञ मैरी कोंडो के विचारों पर चलें, तो साफ-सुथरा और व्यवस्थित घर ही बेहतर घर है। हालांकि, अल्बर्ट आइंस्टीन शायद इस बात से सहमत नहीं होते। मशहूर भौतिक विज्ञानी को लेकर व्यापक रूप से प्रचलित एक कथन है, “अगर बिखरी हुई मेज अव्यवस्थित दिमाग की निशानी है, तो खाली मेज किस बात की निशानी है?” न्यूजीलैंड के 22 परिवारों के घरों का अध्ययन करने के बाद प्रकाशित मेरा नया शोध भी इस प्रचलित धारणा को चुनौती देता है कि बिखरा सामान एक ऐसी समस्या है, जिसे हर हाल में ठीक किया जाना चाहिए। सामान का बिखराव हमेशा खराब व्यवस्था का संकेत नहीं होता। यह परिवारों के रोजमर्रा के कामकाज में मदद कर सकता है और जिंदगी को थोड़ा आसान बना सकता है।
----- जब बिखरा सामान जिंदगी को आसान बनाता है ----- जरा अपने घर के उन हिस्सों के बारे में सोचिए, जिनका इस्तेमाल एक से अधिक कामों के लिए होता है और जहां अक्सर सामान इकट्ठा हो जाता है। मसलन, बैठक का इस्तेमाल बच्चों के खेलने के लिए भी होता है या शयनकक्ष पढ़ाई की जगह भी बन जाता है। एक दंपति ने मुझे बताया कि उनके घर की खाने की मेज पर दिनभर थैले, पानी की बोतलें और दूसरी चीजें रखी रहती हैं। वे हर शाम मेज को खाली कर देते हैं। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि रसोई के काउंटर टॉप पर कोई चीज रख देने से घर से निकलते समय उसे भूल जाने की आशंका कम हो जाती है। ये जगहें देखने में भले ही अव्यवस्थित लगती हों, लेकिन वे परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करती हैं। केवल घर को साफ-सुथरा दिखाने के लिए इन व्यवस्थाओं को बदलने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। हम अक्सर बिखरे सामान को ऐसी चीजों के रूप में देखते हैं, जो हमारे रास्ते में बाधा बनती हैं। लेकिन कई बार कोई जगह इसलिए बिखरी हुई होती है, क्योंकि उसका इस्तेमाल किसी उपयोगी काम के लिए हो रहा होता है। एक महिला के लिए रसोई का काउंटर टॉप खाने की मेज और उसके तथा उसकी बेटी के काम करने की जगह, दोनों का काम करता था। वहां कलम, खिलौने और दूसरी चीजें जमा हो जाती थीं। लेकिन उसका कहना था, “जब तक खाने के लिए जगह बची रहती है, तब तक मैं चीजों को वैसे ही रहने देती हूं।” बिखरा सामान हमें पारिवारिक रिश्तों के बारे में भी बहुत कुछ बता सकता है। एक पिता अपनी बेटी का स्वेटर समेटकर रखने के बजाय कुर्सी पर टांग देते थे। पहले बेटी उसे फर्श पर छोड़ देती थी। पिता चाहते थे कि उसकी इस आदत में आए सुधार को पहचाना जाए। उन्होंने कहा, “इसलिए मैं इसे एक उपलब्धि मानता हूं।” ये उदाहरण भले ही छोटे लगें, लेकिन इनसे पता चलता है कि घर समेटने जैसा साधारण काम भी बच्चों का हौसला बढ़ाने या अपने साथी के प्रति सम्मान जताने की कोशिशों से जुड़ सकता है। जब हम घर में दूसरों की जीवनशैली के लिए जगह बना रहे होते हैं, तो हर चीज को उसकी तय जगह पर रख देना हमेशा संवेदनशीलता भरा कदम नहीं होता।
----- कब समेटना जरूरी है? ----- तो क्या हमें घर समेटना छोड़ देना चाहिए और बिखरे सामान को सहजता से स्वीकार कर लेना चाहिए? ऐसा भी नहीं है। पहले हुए शोधों में घर में बिखरे सामान को तनाव, शर्मिंदगी और परिवार के सदस्यों के बीच विवाद से जोड़ा गया है। इससे जरूरी चीजें ढूंढ़ना मुश्किल हो सकता है, किसी जगह का ठीक से इस्तेमाल नहीं हो पाता या किसी दूसरे व्यक्ति का काम बढ़ सकता है। हमारा अध्ययन इन समस्याओं से इनकार नहीं करता। इसके बजाय, यह बताता है कि किसी जगह को देखकर केवल यह तय कर लेना पर्याप्त नहीं है कि वह कितनी बिखरी हुई है। यह समझना भी जरूरी है कि उस बिखराव से वास्तव में कोई परेशानी हो रही है या नहीं। हमने पाया कि घरों में बिखरे सामान को संभालने के तीन प्रमुख तरीके अपनाए जाते हैं-चीजों को समेटकर रखना, उन्हें वैसे ही रहने देना या नजरों से छिपा देना। एक महिला ने बताया कि वह अपने साथी की गोल्फ बॉल और दूसरी चीजों को अलमारी के नीचे सरका देती थीं, ताकि वे कम दिखाई दें। एक अन्य महिला रोजाना लिए जाने वाले पोषक पूरक पदार्थ रसोई के काउंटर टॉप ही रखती थीं, न कि भंडार कक्ष में। इसकी वजह यह थी कि अगर वह उन्हें समेटकर रख देतीं, तो शायद उन्हें लेना भूल जातीं। इन फैसलों से एक ऐसी बात सामने आती है, जिस पर पहले के शोधों में अक्सर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। घर को व्यवस्थित रखने के लिए अलग-अलग लोगों की जरूरतों, दिनचर्या और अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। एक व्यक्ति को जो सामान बिखरा हुआ लगता है, वह किसी दूसरे के रोजमर्रा के जीवन के लिए जरूरी हो सकता है। हमारे अध्ययन से यह भी पता चलता है कि घर में साफ-सफाई और व्यवस्था शायद ही कभी स्थायी बनी रहती है। लोग जब किसी जगह का इस्तेमाल करते हैं, तो वहां सामान बिखरने लगता है। जरूरत पड़ने पर उसे समेट दिया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद वह जगह फिर बिखर जाती है। हर समय सब कुछ व्यवस्थित रखने की कोशिश में उन व्यवस्थाओं को बार-बार बदलना पड़ सकता है, जो अपने आप में उपयोगी हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह के बिखराव को बर्दाश्त किया जाना चाहिए। लेकिन जो घर देखने में पूरी तरह व्यवस्थित हो, यह जरूरी नहीं कि वही वहां रहने वाले लोगों के लिए सबसे बेहतर भी हो।
अन्य न्यूज़














