भारत संग जल विवाद कूटनीति से सुलझाएगा Bangladesh, हुमायूं कबीर ने सहयोग पर दिया जोर

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने ढाका में कहा कि भारत के साथ पानी के बंटवारे से जुड़े मसलों का समाधान आपसी बातचीत और कूटनीति से ही निकलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सकारात्मक नतीजे के लिए दोनों मुल्कों के नेतृत्व में राजनीतिक इच्छाशक्ति और ईमानदारी जरूरी है। सीमा-पार बहने वाली 54 नदियों और गंगा जल समझौते पर चर्चा के लिए ढाका में समिति गठित की गई है।
ढाका, आठ अक्टूबर बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने बृहस्पतिवार को कहा कि ढाका और नयी दिल्ली के बीच पानी के बंटवारे से जुड़े मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के जरिये सुलझाया जाना चाहिए। सरकारी समाचार एजेंसी ‘बीएसएस’ की खबर के मुताबिक, कबीर ने कहा कि बातचीत में प्रगति तभी संभव होगी, जब दोनों देशों के नेता सहयोग के साथ आगे बढ़ने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएंगे। उन्होंने कहा, “इन मामलों को बातचीत, संवाद और कूटनीति के जरिये ही सुलझाना होगा।
अंतरराष्ट्रीय कानून के पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अभी हमारी स्थिति यही है।” कबीर ‘पानी के भविष्य पर पुनर्विचार : युवा नेतृत्व, न्याय और सहयोग’ विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में शामिल होने के बाद संवाददाताओं से मुखातिब थे। सीमा-पार बहने वाली नदियों और गंगा जल बंटवारा संधि के भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कबीर ने कहा कि बांग्लादेश और भारत के बीच बातचीत जारी है।
उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की अहमियत पर जोर दिया। कबीर ने कहा, “बातचीत और संवाद जारी है। एक सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक निष्कर्ष दोनों पक्षों की ईमानदारी और सभी स्तरों पर सहयोग करने की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा।” उन्होंने कहा, “अगर दोनों देशों के बीच वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर, नेतृत्व के स्तर पर और पानी से जुड़े मामलों पर बातचीत करने वालों के स्तर पर ईमानदारी हो... तो हम निश्चित रूप से इस मुद्दे पर एक सार्थक और सकारात्मक समाधान निकाल लेंगे।” कबीर ने कहा कि बांग्लादेश ने इन मुद्दों पर विचार करने के लिए एक समिति बनाई है, जबकि भारत भी अपने तरीकों से इन मामलों की समीक्षा कर रहा है।
उन्होंने कहा, “अगर नेतृत्व आगे बढ़कर सहयोग करने की सोच रखता है, तो हम निश्चित रूप से एक सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक समाधान तक पहुंच जाएंगे।” भारत और बांग्लादेश के बीच 54 सीमा-पार नदियां बहती हैं और वे संयुक्त नदी आयोग के जरिये पानी से जुड़े मुद्दों को सुलझाते हैं। तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे का मुद्दा भारत-बांग्लादेश के बीच जल सहयोग में दशकों से एक बड़ी अड़चन है। तीस्ता मुद्दा गंगा जल बंटवारा संधि से अलग है।
भारत और बांग्लादेश ने 1996 में 30 साल के लिए इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे और यह दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है।
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