11 वर्षीय Bodhana Sivanandan ने बनाया सबसे युवा WGM बनने का Guinness World Record

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ब्रिटिश भारतीय शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवानंदन ने 46वें शतरंज ओलंपियाड में सबसे कम उम्र की महिला ग्रैंडमास्टर बनने का कीर्तिमान स्थापित किया है। इसके साथ ही 11 वर्षीय स्कूली छात्रा के नाम अब तीन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं। समरकंद में मिली इस सफलता से पहले वह 10 वर्ष की उम्र में ही दो वैश्विक उपलब्धियां हासिल कर चुकी थीं।

(अदिति खन्ना) लंदन, दो अक्टूबर ब्रिटिश भारतीय शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवानंदन का नाम सबसे कम उम्र में महिला ग्रैंडमास्टर (डब्ल्यूजीएम) का खिताब हासिल करने के लिए शुक्रवार को एक बार फिर ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज किया गया। लंदन की 11 वर्षीय स्कूली छात्रा ने पिछले सप्ताह 46वें शतरंज ओलंपियाड में इतिहास रचते हुए महिला ग्रैंडमास्टर का प्रतिष्ठित खिताब हासिल करने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की शतरंज खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया था। उज्बेकिस्तान के समरकंद में मिली उनकी इस असाधारण उपलब्धि ने उनके नाम एक और रिकॉर्ड जोड़ दिया है।

इससे पहले वह महज 10 वर्ष की उम्र में दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी थीं। इस नए खिताब के साथ बोधना के नाम अब कुल तीन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड हो गए हैं। इससे पहले उन्होंने ‘‘महिला अंतरराष्ट्रीय मास्टर बनने वाली सबसे कम उम्र की शतरंज खिलाड़ी’’ और ‘‘शतरंज टूर्नामेंट में किसी ग्रैंडमास्टर को हराने वाली सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी’’ होने का रिकॉर्ड बनाया था।

वैश्विक रिकॉर्ड संस्था ने कहा, ‘‘बोधना ने यह हालिया उपलब्धि उस समय हासिल की, जब ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स 2027’ छप चुका था। इस कारण उनका नया रिकॉर्ड इस वर्ष की पुस्तक में शामिल नहीं है। हालांकि, उनकी पिछली दोनों रिकॉर्ड उपलब्धियों को नए संस्करण में जगह दी गई है।’’ बोधना को उनकी पिछली दोनों उपलब्धियों के लिए आधिकारिक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रमाणपत्र मिल चुके हैं और तीसरे रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र भी उन्हें जल्द मिलेगा।

बोधना ने एक बयान में कहा, ‘‘ ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स 2027’ में जगह मिलना मेरे लिए बेहद सम्मान की बात है। इससे मुझे बहुत प्रोत्साहन और आत्मविश्वास मिला है। यह मुझे लगातार बेहतर प्रदर्शन करने तथा और उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रेरित करता है।’’ शतरंज से उनका सफर एक अप्रत्याशित उपहार और शतरंज की बिसात के एक खास मोहरे ‘घोड़े’ को लेकर पैदा हुई दिलचस्पी से शुरू हुआ था।

बचपन में वह ‘घोड़े’ वाले मोहरे से इतनी प्रभावित थीं कि उसे अन्य खिलौनों की तरह अपने पास रखना चाहती थीं। उनके पिता ने उन्हें समझाया कि अगर वह शतरंज के सेट से केवल घोड़े का मोहरा निकाल लेंगी तो बाकी लोग खेल नहीं पाएंगे। इसके बाद बोधना ने पांच साल आठ महीने की उम्र में शतरंज सीखना शुरू किया और छह वर्ष की उम्र में प्रतियोगिताएं जीतने लगीं।

‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ के प्रधान संपादक क्रेग ग्लेनडे ने कहा कि इस स्कूली छात्रा की कहानी इस बात का शानदार उदाहरण है कि किसी बच्चे की जिज्ञासा किस तरह उसे असाधारण उपलब्धि तक पहुंचा सकती है।

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