Ladakh के 28 रणनीतिक इलाकों की मैपिंग से बौखलाया China, भारत ने खारिज किया दावा

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अभिनय आकाश । Oct 13 2026 4:11PM

केंद्र सरकार ने लद्दाख की 28 रणनीतिक भौगोलिक जगहों के नामों को आधिकारिक नक्शों के लिए मानकीकृत किया है। चीन ने इस कदम को अवैध बताते हुए आपत्ति जताई और लद्दाख को मान्यता न देने की बात कही। वहीं, भारत ने चीन के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि लद्दाख उसका अभिन्न और अविभाज्य अंग है।

चीन ने भारत की निर्विवाद संप्रभुता को चुनौती देने की बेताब कोशिशें कीं। उसने तब बेकार की आपत्तियां उठाईं जब केंद्र सरकार ने आधिकारिक मैपिंग के लिए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 28 रणनीतिक जगहों और भौगोलिक विशेषताओं के नामों की पहचान की और उन्हें स्टैंडर्ड रूप दिया। गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्र सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के साथ मिलकर आधिकारिक तौर पर 28 जगहों जिनमें चोटियां, दर्रे, ज़मीन के हिस्से और जल निकाय शामिल हैं—की पहचान उनके स्टैंडर्ड नामों से की, ताकि उन्हें 'सर्वे ऑफ इंडिया' (SoI) के आधिकारिक नक्शे में शामिल किया जा सके। गृह मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में एक बयान में कहा, "केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के 'सर्वे ऑफ इंडिया' के नक्शे पर आधिकारिक तौर पर इनकी पहचान करने का मकसद इनकी सही पहचान और आम जनता के बीच इनके बारे में बेहतर जानकारी को बढ़ावा देना है।

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अपनी भौगोलिक स्थिति को पक्का करने के लिए नई दिल्ली के निर्णायक कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए, बीजिंग ने अपनी जानी-पहचानी बयानबाजी का सहारा लिया। 'ग्लोबल टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को भारतीय क्षेत्र पर दावा करते हुए आरोप लगाया कि भारत का यह कदम गैर-कानूनी है। माओ ने 'ग्लोबल टाइम्स' के हवाले से कहा चीन ने भारत द्वारा एकतरफा और गैर-कानूनी ढंग से बनाए गए तथाकथित 'केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख' को कभी मान्यता नहीं दी है और वह भारत द्वारा तथाकथित मानक नामों की घोषणा का कड़ा विरोध करता है। यह कदम गैर-कानूनी और अमान्य है और इस सच्चाई को नहीं बदल सकता कि चीन-भारत सीमा के पश्चिमी सेक्टर में संबंधित इलाके हमेशा से चीन का हिस्सा रहे हैं।" हालांकि, अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर भारत के दृढ़ और अडिग रुख के सामने बीजिंग के बेताब तर्क पूरी तरह से बेकार साबित होते हैं। भारत ने ऐसे सभी राजनीतिक रूप से प्रेरित दावों को खारिज कर दिया है और बार-बार इस क्षेत्र पर अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की घोषणा की है। भारत का कहना है जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं, और राजनीतिक रूप से प्रेरित दुष्प्रचार को बार-बार दोहराने से यह सच्चाई नहीं बदल सकती।

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चुनी गई 28 जगहों में इस इलाके की अहम भौगोलिक विशेषताएं शामिल हैं: चोटियां और पहाड़: अतिशा गिरी (चोटी), कनिष्क पीक (चोटी), करुण पीर (पहाड़), मार्तंड गिरी (चोटी), ड्रैक कार्पो (पहाड़), जोल्मोरी (पहाड़), रिंचेन ज़ंगपो (चोटी), शाक्यश्री गिरी (चोटी), मारपा लोत्सावा री (चोटी), मिलारेपा कांगरी (चोटी), शिव री (चोटी), ज़ोरावर पीक (चोटी) और महेश्वर री (चोटी)। दर्रे और ग्लेशियर: चापचिंगल दर्रा (दर्रा), शचमिर्क दर्रा (दर्रा), पारपिक (ग्लेशियर) और स्कमरी ग्लेशियर (ग्लेशियर)। ज़मीन के इलाके: ब्रांगसा लैंड (इलाका), कुकसेल (ज़मीन का इलाका), डेहरा कंपास (ज़मीन का इलाका), गोगरा (ज़मीन का इलाका), कुमारयण पॉइंट (ज़मीन का इलाका), पांगलुंग (ज़मीन का इलाका) और शामल लुंगपा (ज़मीन का इलाका)। घाटियां और जल स्रोत: श्कोर्गा घाटी (घाटी), गुरु रिंपोचे (झील), यांगपा नदी (नदी) और हॉट स्प्रिंग (जल स्रोत)।

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