मुनीर की फौज का बुरा हाल, बलूचिस्तान में मचा कोहराम, 129 सैनिकों की मौत, पाक में हड़कंप

जिस बलूचिस्तान के दम पर पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के ख्वाब देखते हैं। उसी जमीन पर विद्रोही संगठन ने पाकिस्तानी फौज की नाक में दम कर रखी है और फौजियों को चुन चुन कर जहन्नुम पहुंचाया जा रहा है। पाकिस्तान की ताकत का ढिंढोरा पीटने वाली सेना बलूचिस्तान की गलियों में चूहे की तरह बिल में छिपने को मजबूर हो गई है। हाल ही में नुस्की और खारान जिलों में जो कुछ हुआ उसने पाकिस्तानी हुक्मरानों की नींद उड़ा कर रख दी।
एक तरफ पाकिस्तान के हुक्मरान दुनिया भर में कटोरा लेकर घूम रहे हैं और बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों व खनिज संपादक को बेचकर अपनी कंगाल तिजोरी भरने के सपने देख रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ हकीकत यह है कि बलूचिस्तान अब पाकिस्तानी सेना के लिए एक ऐसा नर्क बन चुका है जहां हर कोने से लाशें ही लाशें निकल रही हैं। जिस बलूचिस्तान के दम पर पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के ख्वाब देखते हैं। उसी जमीन पर विद्रोही संगठन ने पाकिस्तानी फौज की नाक में दम कर रखी है और फौजियों को चुन चुन कर जहन्नुम पहुंचाया जा रहा है। पाकिस्तान की ताकत का ढिंढोरा पीटने वाली सेना बलूचिस्तान की गलियों में चूहे की तरह बिल में छिपने को मजबूर हो गई है। हाल ही में नुस्की और खारान जिलों में जो कुछ हुआ उसने पाकिस्तानी हुक्मरानों की नींद उड़ा कर रख दी। नुस्की जिले के अहमदवाल इलाके में हथियारबंद लड़ाकों ने पैदल और गाड़ियों में चल रहे पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को इस तरह निशाना बनाया कि वह संभलने का मौका तक नहीं पा सके। खरान जिले में सैन गाड़ियों के परकच्छे उड़ गए और बारूदी सुरंगों के खौफ से पाकिस्तानी फौज की आवाजाही ठप पड़ गई।
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1 नवंबर को लियाज़ इलाके में हुई खू झड़प और विस्फोट में सैनिकों के मारे जाने और उनके कॉटकॉप्टर ड्रोन आसमान से नीचे जमीन पर गिराए जाने की खबरों ने फौज की इज्जत का कचुमर निकाल दिया। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट यानी बीएलएफ के दावों ने पाकिस्तान [संगीत] की खुफिया और सैन्य एजेंसियों की पोल खोल कर रख दी। बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वारम बलूच की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर के महीने में सिर्फ 25 अभियानों में 129 से ज्यादा पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया कर्मियों को मौत की नींद सुला दिया गया है। बीएएलएफ ने ऑपरेशन अलमास के तहत ग्वादर में ऐसा कहर बरपाया कि अकेले इस अभियान में 80 से ज्यादा सैन्यकर्मियों को ढेर करने का दावा किया गया है। पाकिस्तानी सेना के मजबूत ठिकाने बड़े-बड़े काफिले और गाड़ियां बलूच विद्रोहियों के हमलों के आगे ताश के पत्तों की तरह बिखर गए हैं। हालांकि पाकिस्तान सरकार अपनी बेइज्जती छिपाने के लिए इन आंकड़ों पर पर्दा डालने की लाख कोशिशें कर ले। लेकिन सच यह है कि बलूचिस्तान में फौज का इकबाल पूरी तरह खत्म हो चुका है। सिर्फ बीएलएफ ही नहीं बल्कि दूसरे विद्रोही संगठन भी पाकिस्तान की सेना को उसकी औकात याद दिला रहे हैं।
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बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स यानी बीआरजी ने कच्ची जिले के सन्ने इलाके में पाकिस्तानी सेना के शिविर पर धावा बोलकर उस पर कब्जा कर लिया और 12 सुरक्षाकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया। बलूच विद्रोहियों ने डेरा भुक्ति के सुई इलाके से पंजाब तक गैस ले जाने वाली मुख्य पाइपलाइन को धमाके से उड़ाकर पाकिस्तान इकॉनमी के मुंह पर एक और जोरदार तमाचा जड़ा है। पंजाब तक गैस पहुंचाने वाली इस लाइफलाइन को तबाह करके विद्रोहियों ने साबित कर दिया कि वे जब चाहे पाकिस्तान की कमर तोड़ सकते हैं। पाकिस्तान के हुक्मरान बलूचिस्तान के खजाने को लूट कर अपनी बर्बादी छुपाना चाहते हैं। वे विदेशी निवेशकों को लुभाने के झूठे सपने दिखाते हैं। लेकिन जो देश अपनी सैनिकों की ही जान नहीं बचा पा रही वहां कौन सा विदेशी अपनी तिजोरी खाली करने आएगा। एक तरफ बलूचिस्तान में विद्रोहियों की गोलियों और बारूदी सुरंगे पाकिस्तानी फौज का शिकार कर रही हैं। तो वहीं तो दूसरी तरफ खैबर प्तुनफ्वा में भी सुरक्षा का जनाजा निकल चुका है। पाकिस्तान के सामने आज सबसे बड़ा संकट यह है कि वो खनिज बेचे या अपनी पिट रही फौज की लाशें गिने। बलूचिस्तान की सुलगती जमीन यह चीख-चीख कर कह रही है कि पाकिस्तान के जुल्मों का अंत अब नजदीक है और उसकी बर्बादी का काउंटडाउन शुरू हो चुका है।
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