Donald Trump को US Court का सख्त निर्देश, BBC मानहानि केस में 11 दिसंबर तक दें बयान

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अमेरिकी संघीय अदालत ने बीबीसी के खिलाफ 10 अरब डॉलर के मानहानि मामले में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी गवाही दर्ज कराने के लिए 11 दिसंबर की अंतिम समयसीमा दी है। यूएस मजिस्ट्रेट जज एंजोलिक लेट ने स्पष्ट किया कि तय तारीख तक बयान दर्ज न कराने पर यह मुकदमा खारिज भी किया जा सकता है। बीबीसी के वकीलों का आरोप है कि ट्रंप राजनीतिक व्यस्तताओं का हवाला देकर अपने ही मुकदमे में देरी कर रहे हैं।

अमेरिका की एक संघीय अदालत ने देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) के खिलाफ दायर 10 अरब अमेरिकी डॉलर के मानहानि मामले में 11 दिसंबर तक बयान दर्ज कराने का बृहस्पतिवार को आदेश दिया। ‘यूएस मजिस्ट्रेट जज’ एंजोलिक लेट ने यह आदेश दिया। दरअसल, बीबीसी के वकीलों ने शिकायत की है कि ट्रंप अपने ही द्वारा दायर मुकदमे में बयान दर्ज कराने में देरी कर रहे हैं।

बीबीसी के वकील चार्ल्स टोबिन ने कहा कि सबूत जुटाने और उनकी जांच की प्रक्रिया पूरी होने में अब केवल दो महीने बचे हैं, लेकिन ‘‘हम अब तक वादी (ट्रंप) का बयान दर्ज नहीं कर पाए हैं।’’ इस बीच, यह स्पष्ट नहीं है कि पूर्व विशेष अधिवक्ता जैक स्मिथ को बयान दर्ज कराने की अनुमति मिलेगी या नहीं। संघीय नियमों के अनुसार, सरकारी विभागों के मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों को अदालती मामलों में गवाही देने से पहले संबंधित विभाग के प्रमुख से अनुमति लेनी होती है। स्मिथ ने अनुमति मांगी है, लेकिन उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

न्यायाधीश ने न्याय विभाग को दो नवंबर तक उनके अनुरोध पर जवाब देने का आदेश दिया। ट्रंप का बयान दर्ज कराने के मामले पर सुनवाई के दौरान टोबिन ने बताया कि इसके लिए पहले 16 अक्टूबर की तारीख पर सहमति बनी थी, लेकिन ट्रंप ने ‘‘राष्ट्रीय महत्व के एक मामले’’ का हवाला देकर इसे स्थगित कर दिया था। टोबिन ने कहा कि वास्तव में रिपब्लिकन पार्टी के नेता एवं राष्ट्रपति ट्रंप उस दिन जॉर्जिया में चुनाव प्रचार कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘वह पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों में भाग ले रहे थे और उन्होंने बयान दर्ज कराने के बजाय उसे प्राथमिकता दी।’’ न्यायाधीश लेट ने कहा कि ट्रंप को 11 दिसंबर तक अपना बयान दर्ज कराना होगा और ऐसा नहीं करने पर मुकदमा खारिज किया जा सकता है। हालांकि, यदि मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश सबूत जुटाने की अवधि बढ़ा देते हैं, तो यह समयसीमा बदल सकती है। दोनों पक्षों के वकीलों के बीच दस्तावेजों और अन्य सबूतों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया 18 दिसंबर को समाप्त होनी है।

बीबीसी के वकील चाहते हैं कि इससे पहले ट्रंप का बयान दर्ज हो जाए। ट्रंप पहले भी कई बार बयान दर्ज कराने से बचते रहे हैं। उन्होंने पिछले साल दिसंबर में बीबीसी के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।

ट्रंप ने सार्वजनिक धन से संचालित इस प्रसारण संस्था पर ‘ट्रंप: ए सेकंड चांस’ नामक वृत्तचित्र को लेकर मानहानि करने के साथ ही भ्रामक और अनुचित व्यापारिक तौर-तरीके अपनाने का आरोप लगाया था।

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