Donald Trump प्रतिबंधों के असर की समीक्षा के लिए चाहते हैं 60 दिन, Marco Rubio ने दी जानकारी

Prabhasakshi Image
Prabhasakshi

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप रूस पर लगे प्रतिबंधों और शुल्कों के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर का 60 दिनों तक अध्ययन करना चाहते हैं। ग्राहम अधिनियम के कड़े प्रावधानों से मिली अस्थायी छूट से भारत जैसे सहयोगी देशों को फिलहाल राहत मिली है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि भारत ऊर्जा स्रोतों में विविधता ला रहा है, लेकिन रूस से आपूर्ति तुरंत बदलना संभव नहीं है।

(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 18 अक्टूबर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस पर प्रतिबंध और अन्य देशों पर शुल्क लगाने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए 60 दिन का समय चाहते हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यह जानकारी दी। रुबियो ने उज्बेकिस्तान और भारत की एक सप्ताह की यात्रा पर रवाना होने से पहले शनिवार शाम पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए यह बात कही।

रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम या ग्राहम अधिनियम के तहत ट्रंप द्वारा दी गई छूट के बारे में पूछे जाने पर रुबियो ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि राष्ट्रपति यह आकलन करने के लिए 60 दिन का समय चाहते हैं कि प्रतिबंध और शुल्क लगाने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।’’ ट्रंप ने शुक्रवार को ग्राहम अधिनियम के कुछ प्रमुख प्रावधानों से छूट दे दी थी। इस कानून के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दंडात्मक शुल्क लगाने का प्रावधान है। ट्रंप के इस कदम से भारत को राहत मिली है।

ट्रंप द्वारा शुक्रवार को हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश के अनुसार, यह छूट तब तक लागू रहेगी, जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री, जरूरत के अनुसार वित्त मंत्री और व्यापार प्रतिनिधि से परामर्श करके यह तय नहीं कर लेते कि आगे कोई कार्रवाई करना उचित होगा। रुबियो ने कहा कि जब ग्राहम अधिनियम पारित किया गया था, तब छूट का प्रावधान इसलिए रखा गया था ताकि दुनिया भर में हो रही विभिन्न घटनाओं के प्रभाव का अध्ययन किया जा सके। इन घटनाओं में ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव, सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के हमले और रूस-यूक्रेन युद्ध शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मुझे लगता है कि इन सभी बातों को ध्यान में रखकर इनके प्रभाव का तुलनात्मक आकलन करना जरूरी है।’’ रुबियो सोमवार को भारत पहुंचेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘भारत जैसे देश ऊर्जा के अपने स्रोतों में विविधता लेकर आए हैं लेकिन वे अब भी रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त कर रहे हैं क्योंकि ऊर्जा के स्रोत एक दिन में बदलना आसान नहीं है।’’ रुबियो ने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी और साझेदार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने और यह तय करने के लिए समय चाहिए कि कौन-सा कदम या किन कदमों का मेल सबसे उचित होगा।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


All the updates here:

अन्य न्यूज़