Donald Trump ने शेयर किया Shehbaz Sharif का UN भाषण वीडियो, ऑपरेशन सिंदूर पर जताया था आभार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन का 87 सेकंड का वीडियो क्लिप पोस्ट किया है। संयुक्त राष्ट्र में दिए इस भाषण में शरीफ ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर को रुकवाने के लिए ट्रंप के समय पर हस्तक्षेप और नेतृत्व की तारीफ की थी। वहीं भारत ने ट्रंप के संघर्ष रुकवाने के दावों को खारिज करते हुए इसे दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों की बातचीत का नतीजा बताया है।
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 26 सितंबर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा संयुक्त राष्ट्र में दिए उस भाषण का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर साझा किया है जिसमें शरीफ ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रुकवाने के लिए ‘‘समय पर हस्तक्षेप करने’’ को लेकर ट्रंप का आभार जताया था। ट्रंप ने शुक्रवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर शरीफ के भाषण का 87 सेकंड का वीडियो क्लिप साझा किया। शरीफ ने पिछले साल मई में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का बदला लेने के लिए भारत द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को ‘‘बाहरी आक्रमण’’ करार दिया।
शरीफ ने दक्षिण एशिया में लाखों लोगों की जान बचाने के लिए ट्रंप के ‘‘दृढ़तापूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व’’ तथा ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ को लेकर उनका आभार जताया। ट्रंप ने शरीफ के भाषण का वीडियो क्लिप बिना किसी टिप्पणी के साझा किया। अमेरिका के राष्ट्रपति ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन में दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष समेत आठ युद्ध समाप्त कराने में मदद की।
ट्रंप के अनुसार, शरीफ ने कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने दक्षिण एशिया में तीन करोड़ लोगों की जान बचाई। ट्रंप ने यह भी कहा था कि जिन देशों का उन्होंने उल्लेख किया, उनमें से लगभग सभी ने उनकी भूमिका के लिए उनका आभार जताते हुए पत्र भेजे हैं। भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में सात मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था और पाकिस्तान एवं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया था।
पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे। भारत ने ट्रंप के सैन्य संघर्ष रुकवाने संबंधी दावों को खारिज करते हुए कहा है कि पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक ने भारतीय सेना में अपने समकक्ष से संपर्क कर संघर्ष रोकने का अनुरोध किया था, जिसके बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रोका गया।
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