चाबहार बंदरगाह की अहमियत, भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण और तालिबान की वजह से क्यों सुर्खियों में है, जानें हर सवाल का जवाब

चाबहार बंदरगाह की अहमियत, भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण और तालिबान की वजह से क्यों सुर्खियों में है, जानें हर सवाल का जवाब

अफगानिस्तान के इलाके तक जमीन के रास्ते पहुंचना संभव नहीं है। यहां पहुंचने के लिए पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का सहारान लेना पड़ता है या फिर ईरान के माध्यम से ही पहुंचा जा सकता है।

ऐ जवानो, गरीब तोड़ देती है जो रिश्ते खास होते हैं,

पराए अपने होते हैं जब पैसे पास होते हैं।

साल 2012 में आई अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में कही गई इन लाइनों का आशय यही है कि जब आपके पास कुछ भी नहीं है तो किसी के द्वारा आपको भाव नहीं दिया जाएगा। लेकिन जब शक्ति है तो बड़ी से बड़ी महाशक्ति और अपने आप में विचित्र संगठन भी आपको समर्थन देने लग जाता है। ईरान का चाबहार बंदरगाह इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है। काबुल पर तालिबानी कब्जे का असर चाबहार  बंदरगाह की सक्रियता पर भी पड़ा था। लेकिन पाकिस्तान द्वारा पोषण देने और चीन की तरफ से लगातार मान्यता देने की बात से अलग होते हुए तालिबान ने दोनों ही मित्र देशों को बड़ा झटका दिया है। भारत के साथ बेहतर राजनयिक और व्यापारिक संबंधों की चाह लिए बैठा तालिबान क्षेत्रीय और वैश्विक व्यापाक को को सुगम बनाने के लिए चाबहार पोर्ट का समर्थन तिया है। तालिबान के आश्वासन के बाद यहां के ट्रैफिक में फिर से बढोतरी देखने को मिली है। 

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क्या है चाबहार बंदरगाह परियोजना 

चाबहार बंदरगाह ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है। ओमान की खाड़ी में स्थित ये बंदरगाह ईरान के दक्षिणी समुद्र तट को भारत के पश्चिमी समुद्री तट से जोड़ता है। चाबहार बंदरहाग ईरान के दक्षिणी पूर्वी समुद्री किनारे पर बना है। इस बंदरगाह को ईरान द्वारा व्यापार मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया। पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के पश्चिम की तरफ मात्र 72 किलोमीटर की दूर पर है। अभी तक मात्र 2.5 मिलियन टन तक  के समान ढोने की क्षमता वाले इस बंदरगाह को भारत,ईरान और अफगानिस्तान मिलकर इसे 80 मिलियन टन तक समान ढोने की क्षमता वाला बन्दरगाह विकसित करने की परियोजना बना रहे हैं। 

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण

अफगानिस्तान के इलाके तक जमीन के रास्ते पहुंचना संभव नहीं है। यहां पहुंचने के लिए पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का सहारान लेना पड़ता है या फिर ईरान के माध्यम से ही पहुंचा जा सकता है। कराची के रास्ते होने वाले निर्यात या फिर ईरान के बरास्ते होने वाले निर्यात की तुलना में चाबहार से अफगानिस्तान पहुंचना बेहद सस्ता होगा। जिसके पीछे की वजह इसका देश के एकदम करीब होना है। अमेरिका की तरफ से भारत को प्रतिबंधों के बावजूद चाबहार डील पर मंजूरी मिली थी क्‍योंकि ये अफगानिस्‍तान के पुर्ननिर्माण में बहुत मददगार था। यह बंदरगाह ईरान से ज्‍यादा अफगानिस्‍तान के लिए फायदेमंद था। चाबहार बंदरगाह के निर्माण में भारत की हिस्‍सेदारी से उसे अफगानिस्‍तान में वैकल्पिक और भरोसेमंद रास्‍ता मिल सकेगा। ईरान के दक्षिणी-पूर्वी तट पर सिस्‍तान-बलूचिस्‍तान प्रांत स्थित चाबहार बंदरगाह भारत को अफगानिस्‍तान और सेंट्रल एशिया में समंदर पर आधारित रास्‍ता मुहैया कराता है। 






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