संयुक्त राष्ट्र में भारत की चेतावनी, आतंकियों तक न पहुंचे संवेदनशील Weapons Technology

संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में भारतीय सांसद आलोक कुमार सुमन ने आतंकवादियों के हाथों घातक हथियार पड़ने पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने वैश्विक समुदाय से दोहरे उपयोग वाली तकनीकों के प्रसार और संदिग्ध नेटवर्कों पर कड़ी सतर्कता बरतने की अपील की। भारत ने रासायनिक और जैविक हथियार संधियों के पूर्ण क्रियान्वयन के प्रति भी अपना संकल्प दोहराया।
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 20 अक्टूबर भारत ने आतंकवादियों के हाथ विनाशकारी हथियार लगने के जोखिम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए वैश्विक समुदाय से आह्वान किया है कि वह संवेदनशील तकनीक के हस्तांतरण को लेकर सतर्क रहे, खासकर उन लोगों के मामले में जिनका शस्त्र प्रसार और आतंकवाद से पुराना नाता रहा है। भारत का यह बयान परोक्ष रूप से पाकिस्तान के संदर्भ में था। संयुक्त राष्ट्र महासभा की निशस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी प्रथम समिति में भारत का बयान रखते हुए लोकसभा सदस्य आलोक कुमार सुमन ने सोमवार को कहा, ‘‘आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भारत इस बात को लेकर बहुत चिंतित है कि विनाशकारी हथियार आतंकवादियों और असामाजिक तत्वों के हाथों में पड़ रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी सदस्य देशों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे दोहरे उपयोग वाली और संवेदनशील तकनीकों के हस्तांतरण को लेकर सतर्क रहें, विशेष रूप से उन लोगों के प्रति जिनका शस्त्र प्रसार का इतिहास रहा है या जो आतंकवाद से जुड़े हैं।’’ इन टिप्पणियों को पाकिस्तान और ए.क्यू. खान के नेतृत्व वाले वैश्विक शस्त्र प्रसार नेटवर्क की तरफ इशारा माना जा रहा है। पाकिस्तान के परमाणु बम के जनक के रूप में विख्यात खान ने परमाणु उपकरणों और तौर-तरीकों के प्रसार के लिए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का नेतृत्व किया था। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस नेटवर्क को परमाणु हथियार विकसित करने के इच्छुक देशों के लिए ‘एक ही जगह पर तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था’ बताया था।
सुमन संयुक्त राष्ट्र के दौरे पर यहां आए भारतीय सांसदों के दूसरे प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। इस यात्रा के दौरान ये सांसद संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों, राजदूतों तथा भारतीय प्रवासियों से भी मुलाकात करेंगे। सुमन ने उल्लेख किया कि 2002 से भारत ‘आतंकवादियों को विनाशकारी हथियार हासिल करने से रोकने के उपाय’ शीर्षक से एक प्रस्ताव पेश करता आ रहा है।
भारत ने रासायनिक और जैविक हथियार संधियों के पूर्ण, प्रभावी और गैर-भेदभावपूर्ण क्रियान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
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