चीन के नहले पर भारत का दहला, बैन लगाया तो बना ली खुद की टनल कटर मशीन!

चीन द्वारा टनल बोरिंग मशीनों के निर्यात पर नियंत्रण लगाने से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए जोखिम बढ़ गया है। हालांकि, भारत ने इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत अब तमिलनाडु संयंत्र में बड़ी टनल बोरिंग मशीनें बनाकर इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है।
अभी देश में जितना इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है रेलवे का हो, हाईवे का हो, पावर का हो, कई तरह के जो इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहे हैं, उसमें टनल बोरिंग मशीनंस का यूज़ बहुत होता है। एक टाइम था जब टनल बोरिंग मशीन सारी की सारी इंपोर्ट करनी पड़ती थी। लेकिन अब 8 मीटर डाया की सारी टनल बोरिंग मशीनंस इंडिया में बनने लग गई है। अब तो 15 मीटर की टनल बोरिंग मशीनंस भी भारत में बनने लग गई है। तमिलनाडु में टीबीएम का प्लांट है और अब बहुत जल्दी 16 मीटर से ज्यादा डाय वाली टीबीएम्स भी भारत में बनेगी। यानी भारत टीबीएम बनाने में डिजाइन से ले मैन्युफैक्चरिंग से ले मेंटेनेंस तक आत्मनिर्भर हो रहा है। चीन ने टनल बोरिंग मशीनों और उससे जुड़े कुछ खास उपकरणों पर अपनी मोनोपोली दिखानी शुरू कर दी है और उसके निर्यात पर नियंत्रण लगाने का फैसला कर लिया। यह नियम 18 नवंबर 2026 से लागू हो जाएगा। भारत जैसे देश के लिए यह फैसला बहुत अहम है क्योंकि रेलवे, मेट्रो, हाईवे, पहाड़ों के भीतर सुरंग बनाने के लिए इन मशीनों की बड़ी भूमिका रही है। हालांकि चीन ने भारत का नाम लेकर सभी निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाए हैं। लेकिन नए नियमों में मशीनों और उसके पुरजों की आपूर्ति में देरी और अनिश्चितता बढ़ जाती है और यही वजह है कि भारत के लिए एक चुनौती खड़ी हो जाती है। लेकिन इसका काउंटर भारत ने तैयार कर लिया है और इसकी जानकारी खुद देश के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है।
दरअसल रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऋषिकेश करणप्रयाग रेल परियोजना का एक वीडियो शेयर किया और उसे बताया कि भारत में जो टनल बोरिंग मशीनों के निर्माण की प्रगति है वो बहुत बढ़िया चल रही है। उनका कहना है कि पहले इन मशीनों के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। यकीनन उन्होंने चीन का नाम नहीं लिया। लेकिन उनका यह कहना है कि अब देश में 8 मीटर व्यास वाली मशीनें बनाई जा रही हैं। 15 मीटर व्यास वाली मशीनों का निर्माण शुरू हो चुका है और बहुत जल्द 16 मीटर से बड़ी मशीनों की दिशा में भी काम किया जाएगा। तमिलनाडु में टनल बोरिंग मशीनों का संयंत्र भी है। चीन ने जिन मशीनों पर नियंत्रण लगाया है उसको भी जरा हम समझते हैं पहले। तो चीन के वाणिज्य मंत्रालय और सामान्य सीमा शुल्क प्रशासन ने 19 अक्टूबर को नए निर्यात नियंत्रण की घोषणा की। इसमें सुरंग खोदने वाली कई तरह की टीबीएम, उनके खास पुरजे, कुछ मरम्मत और दोबारा निर्माण से जुड़े तकनीक को शामिल किया गया। इसके अलावा कठिन पहाड़ी इलाकों में इस्तेमाल होने वाले वॉकिंग एक्सवेटर और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कंक्रीट छिड़कने वाली विशेष मशीनों पर भी नियंत्रण कर दिया गया है। नए नियम के तहत जो है चीन के साथ जो है विवाद वाले संवेदनशील देशों और क्षेत्रों में इन उपकरणों को भेजने के लिए संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। दूसरे देशों के लिए भी पंजीकरण, निर्यात प्रमाण पत्र और अंतिम इस्तेमाल से जुड़ी घोषणाओं की व्यवस्था करनी होगी। यानी कि चाइना पूरी तरीके से इस प्रोजेक्ट में आपके देशों के प्रोजेक्ट में नाक डालेगा। सका अर्थ यह नहीं है कि चीन ने दुनिया के सभी देशों को टीवीएम बेचने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। लेकिन निर्यात की प्रक्रिया पर सरकारी नियंत्रण बढ़ने से उन देशों के लिए जोखिम पैदा होता है जो इन मशीनों और उनके जरूरी पुरजों के लिए चीन की आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर हैं। भारत की भी एंट्री होती है। भारत के लिए असली चुनौती यही है कि जरूरी मशीनें समय पर मिले और बड़ी परियोजनाओं का काम इससे प्रभावित ना होने पाए।
इसे भी पढ़ें: China Border पर स्थिति को लेकर Owaisi ने उठाई संसद सत्र बुलाने की मांग
भारत के लिए यह मशीनें क्यों जरूरी है?
टनल बोरिंग मशीन जमीन के भीतर सुरंग खोदने वाली विशाल मशीन होती है। इसके इसका जो अगला हिस्सा है वह घूमकर चट्टान मिट्टी को काटता है। मशीन आगे बढ़ती जाती है। सुरंग की दीवारों को मजबूत करने के लिए कंक्रीट के हिस्से लगाए जाते हैं। इससे पहाड़ या शहरों के नीचे सुरंग बनाने में मदद मिलती है। भारत में इन मशीनों की जरूरत जो है वो कई बड़ी अहम परियोजनाओं में है। से मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में समुद्र के नीचे सुरंग बनाने से लेकर मेट्रो नेटवर्क और हिमालय क्षेत्रों में रेल संपर्क विकसित करने पर तक जो है इनका इस्तेमाल किया जाता है। यदि किसी मशीन या उसकी जरूरी पुरजों की आपूर्ति में देरी हो तो परियोजना की जो समय सीमा है, लागत है उस पर असर पड़ेगा और वो देश या वो फिर भारत ही क्यों ना हो वो उसके असर में आ जाएगा। उस पर इसका प्रभाव दिखेगा। चीन की ये घोषणा ऐसे वक्त में हालांकि आई है कि जब भारत पहले भी ईवीएम की आपूर्ति में रुकावटों का सामना कर चुका है।
अन्य न्यूज़













