इधर ट्रंप दे रहे फुल N फाइनल मोड वाली धमकी, उधर ईरान ने एक्टिवेट किया घातक ‘कोड 100’, IRGC और पूरी सेना वॉर-मोड में तैनात

Iran
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अभिनय आकाश । Sep 21 2026 6:08PM

ईरान ने अपने सर्वोच्च सैन्य अलर्ट प्रोटोकॉल कोड 100 को सक्रिय कर अपनी पूरी सेना को हाई अलर्ट पर तैनात कर दिया है। यह कदम हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए हमलों और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच उठाया गया है। इस आपातकालीन फैसले से मध्य पूर्व में बड़े सैन्य टकराव की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।

ईरान ने अपने सबसे बड़े और घातक मिलिट्री अलर्ट प्रोटोकॉल कोड 100 को एक्टिवेट कर दिया है। इस आदेश के साथ ही ईरान की पूरी सेना हाई अलर्ट पर आ चुकी है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), नियमित सेना 'अर्टेश', देश का संपूर्ण एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरनल सिक्योरिटी यूनिट्स को वॉर-मोड यानी मैक्सिमम ऑपरेशनल रेडीनेस पर तैनात कर दिया गया है। किसी भी क्षण बड़े सैन्य टकराव की आशंका जताई जा रही है, और इस एक फैसले ने पूरे इलाके में बारूदी तनाव को चरम सीमा पर पहुंचा दिया है। यह अचानक अलर्ट सप्ताहांत में हुई कई घटनाओं के बाद जारी किया गया है, जिनमें सबसे अहम घटना यमन में ईरान-समर्थित हूथी बलों द्वारा सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर किया गया बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमला था। अमेरिकी विदेश विभाग ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी ज़रूरी चेतावनी जारी की और अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी कि वे अचानक तनाव बढ़ने, कमर्शियल उड़ानों के रद्द होने और संभावित रूप से क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र के बंद होने जैसी स्थितियों के लिए तैयार रहें। हालात की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक कैंप डेविड में अपना प्रवास छोटा कर दिया और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी बिना पहले से तय ब्रीफिंग के लिए व्हाइट हाउस लौट आए। हालांकि ईरान के सरकारी मीडिया ने कोड 100 शब्द के सटीक अर्थ के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन जानकारों और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) नेटवर्क का कहना है कि ईरान के अंदर सेना की हलचल ऐसी है, जैसी आमतौर पर किसी आसन्न सीधे टकराव की स्थिति में देखी जाती है। 

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आखिर क्या है ईरान का यह खूंखार 'कोड 100'?


ईरानी सैन्य रणनीति में कोड 100 का मतलब है आपातकालीन रक्षा तैयारियों का सर्वोच्च स्तर—यानी आर-पार की जंग का ऐलान! अगर पश्चिमी देशों की भाषा में समझें, तो यह अमेरिका के DEFCON 1 या 'फुल-स्पेक्ट्रम मोबिलाइजेशन' के बराबर है। सीधे शब्दों में कहें, तो कोड 100 एक्टिवेट होने का मतलब है कि देश अब सिर्फ दुश्मनों को डराने की मुद्रा में नहीं है, बल्कि उसका पूरा रक्षा तंत्र चौबीसों घंटे युद्ध लड़ने और सीधे हमले के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका है। जब मिलिट्री कमांड सेक्टरों में 'कोड 100' घोषित या लागू किया जाता है, तो ईरान की दो-स्तरीय मिलिट्री व्यवस्था में कई बहुत ज़रूरी निर्देश अपने-आप शुरू हो जाते हैं।
ईरान के मिसाइल शहरों के तौर पर जाने जाने वाले ज़मीन के नीचे बने मिसाइल साइलो और IRGC एयरोस्पेस फ़ोर्स द्वारा संचालित मोबाइल लॉन्चर यूनिट्स को दुश्मन के हवाई हमलों से पहले ही नष्ट होने से बचाने के लिए दूसरी लॉन्च जगहों पर ले जाया जाता है।
इंटीग्रेटेड एयर डिफ़ेंस नेटवर्क जिसमें रूस से मिले S-300 सिस्टम के साथ-साथ देश में बनी खोरदाद-15 और बावर-373 एंटी-एयरक्राफ्ट बैटरी शामिल हैं। सभी सीमावर्ती इलाकों और रणनीतिक बुनियादी ढांचों वाली जगहों पर एक्टिव, हाई-फ़्रीक्वेंसी ट्रैकिंग मोड में आ जाते हैं।
ईरान की सैन्य नीति के तहत, ज़्यादा से ज़्यादा अलर्ट होने पर "मोज़ेक डिफ़ेंस" प्रोटोकॉल लागू हो जाते हैं। अगर तेहरान में सेंट्रल कमांड का कम्युनिकेशन दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफ़ेयर या सटीक हमलों से बाधित या नष्ट हो जाता है, तो क्षेत्रीय IRGC कमांडरों को असममित ऑपरेशन और जवाबी हमले करने का स्वतंत्र अधिकार दिया जाता है।
नतांज़, फ़ोरदो और इस्फ़हान जैसी अहम परमाणु जगहों की सुरक्षा को ज़्यादा से ज़्यादा अलर्ट पर रखा जाता है, साथ ही भारी GPS जैमिंग और हवाई निगरानी से निपटने के उपाय भी किए जाते हैं।

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ईरान में 'कोड 100' की स्थिति क्यों बनी होगी?


इसकी तत्काल वजह यमन से हूती बलों द्वारा किया गया बड़ा हमला हो सकता है, जिसमें उन्होंने सऊदी अरब की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और लंबी दूरी के अटैक ड्रोन दागे थे। सऊदी एयर डिफेंस फोर्स ने पुष्टि की कि राजधानी रियाद को निशाना बनाने वाले कई हमलों को पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मदद से सफलतापूर्वक रोक दिया गया।

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