Iran ने कहा America के साथ कूटनीति के रास्ते खुले, मध्यस्थों से भेजे जा रहे संदेश

ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि युद्ध की आशंकाओं के बीच उसने वाशिंगटन से कूटनीतिक संवाद खत्म नहीं किया है। जर्मन प्रसारक को दिए साक्षात्कार में प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक संदेश पहुंचाए जा रहे हैं। वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल ईरान पर हमले की कोई योजना नहीं है।
अमेरिका और इजराइल में अहम चुनावों से पहले ईरान के साथ व्यापक युद्ध दोबारा शुरू होने की आशंकाओं के बीच तेहरान ने कहा है कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक संदेश पहुंचाए जा रहे हैं और वह कूटनीति के लिए अब भी तैयार है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि आज इस्लामिक गणराज्य ईरान पर हमला नहीं किया जाएगा। इस बीच, इजराइल के उच्चतम न्यायालय के सरकार को सूचियां साझा करने की प्रक्रिया बहाल करने के आदेश के बाद रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति (आईसीआरसी) को कब्जे वाले वेस्ट बैंक और गाजा में हिरासत में लिए गए फलस्तीनियों की सूचियां फिर से मिलने लगी हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान ने कूटनीति के रास्ते बंद नहीं किए हैं और मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक संदेश पहुंचाए जा रहे हैं। युद्ध को लेकर बातचीत कई सप्ताह से ठहरी हुई प्रतीत हो रही है। सरकारी मीडिया के अनुसार, बघाई ने एक जर्मन प्रसारक के साथ एक साक्षात्कार में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि अमेरिका एकतरफा मांगों पर अड़ा हुआ दिखाई देता है और ट्रंप एवं अमेरिकी अधिकारी बार-बार ‘पूर्ण आत्मसमर्पण’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं, जिसे कोई भी ईरानी स्वीकार नहीं करता। अमेरिका और इजराइल में आने वाले दिनों में चुनाव होने हैं। इस बीच ईरान के लोगों के बीच व्यापक युद्ध दोबारा शुरू होने की आशंकाएं बढ़ रही हैं।
इस बीच, ईरान पर हमला करने की योजना के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने पहले संकेत दिया कि इस बारे में पहले से जानकारी देना मूर्खता होगी। हालांकि, इसके बाद उन्होंने कहा, ‘‘नहीं। आज कोई हमला नहीं होगा।’’ इसी दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि पिछले छह महीनों में अमेरिकी सैन्य समर्थन के साथ 3,000 से अधिक वाणिज्यिक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं।
इस बीच, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को होने वाले करीबी मुकाबले वाले चुनाव से पहले ईरान या उसके सहयोगी संगठनों की ओर से हमले की आशंका को लेकर फिर चेतावनी दी। उन्होंने इसके लिए खुफिया जानकारी का हवाला दिया। नेतन्याहू ने वीडियो संदेश में कहा, ‘‘सेना रक्षा करने और हमला करने, दोनों के लिए तैयार है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आपको ऐसे हमलों का सामना करना पड़ेगा, जो आपकी कल्पना से कहीं अधिक बड़े और असंगत रूप से भीषण होंगे।’’ इजराइल के एक स्थानीय प्रसारक ने रविवार रात खबर दी कि देश में करीबी मुकाबले वाले चुनाव से कुछ समय पहले ईरान से संबंधित एक राजनीतिक निर्देश को लेकर नेतन्याहू और सेना के प्रमुख के बीच टकराव हुआ।
चैनल 12 की इस खबर से कुछ इजराइलियों में चिंता पैदा हो गई। मंगलवार को होने वाले चुनाव में नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सेना प्रमुख एयाल जमीर का समर्थन किया। इस प्रतिक्रिया से इजराइल में उन आशंकाओं का पता चला, जिनमें कहा जा रहा है कि देश के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू सत्ता गंवाने की संभावना के बीच पद पर बने रहने के लिए मतदान से पहले ईरान पर हमला करने के इच्छुक हो सकते हैं।
नेतन्याहू ने चैनल 14 पर बातचीत के दौरान चैनल 12 की खबर को बकवास बताया। सेना की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई। चैनल 12 की खबर में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ईरान से संबंधित निर्देश वास्तव में क्या था।
पिछले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री ईरान के नेतृत्व को ‘‘उखाड़ फेंकने’’ की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। इधर रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की कि संगठन को वेस्ट बैंक और गाजा से हिरासत में लिए गए फलस्तीनियों की सूचियां फिर से मिलने लगी हैं। इजराइल के उच्चतम न्यायालय ने इस साल की शुरुआत में सरकार को ऐसी सूचियां साझा करने और आईसीआरसी को इजराइली जेलों में बंद लोगों से मिलकर उनकी परिस्थितियों का आकलन करने की अनुमति देने का आदेश दिया था।
सरकार ने सात अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमलों और गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद इन दोनों प्रक्रियाओं को रोक दिया था। आईसीआरसी के प्रवक्ता गिलाद ग्रॉसमैन ने कहा कि इजराइल ने अभी तक जेलों में निरीक्षण के लिए फिर से जाने की अनुमति नहीं दी है, लेकिन ‘‘हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में हम यह प्रक्रिया दोबारा शुरू कर सकेंगे।’’ सात अक्टूबर के हमलों के बाद इजराइल ने पश्चिमी तट और गाजा में हजारों फलस्तीनियों को हिरासत में लिया था। पिछले साल संघर्षविराम के दौरान इनमें से कुछ को रिहा किया गया, लेकिन करीब 9,000 लोग अब भी जेलों में बंद हैं या कठोर परिस्थितियों में हिरासत में हैं।
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