Israel Exit Poll Results | इजरायल के एग्जिट पोल में त्रिशंकु जनादेश! बेंजामिन नेतन्याहू का भविष्य अधर में अटका, विपक्ष ने पकड़ी रफ्तार

Benjamin Netanyahu
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रेनू तिवारी । Oct 28 2026 9:39AM

मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की 'लिकुड' (Likud) पार्टी सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरती दिख रही है, लेकिन पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने मजबूत बढ़त हासिल कर नेतन्याहू के सत्ता में बने रहने के सपनों पर पानी फेर दिया है।

इजरायल में हुए हालिया संसदीय चुनावों के बाद देश में एक बार फिर गंभीर राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बन गया है। चुनाव के बाद जारी एग्जिट पोल के अनुमानों के मुताबिक, 120 सदस्यों वाली इजरायली संसद (नेसेट - Knesset) में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। हालांकि, मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की 'लिकुड' (Likud) पार्टी सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरती दिख रही है, लेकिन पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने मजबूत बढ़त हासिल कर नेतन्याहू के सत्ता में बने रहने के सपनों पर पानी फेर दिया है।

मंगलवार को तीन प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स - चैनल 13, चैनल 12 और सार्वजनिक प्रसारक 'कान' (Kan) - द्वारा जारी अनुमानों के मुताबिक, 120 सदस्यों वाली संसद (नेसेट) में नेतन्याहू के गठबंधन को लगभग 50 सीटें मिल सकती हैं। यह आंकड़ा संसदीय बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से काफी कम है। विपक्षी गुट को 52-53 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों को 17-18 सीटें मिल सकती हैं। केंद्रीय चुनाव समिति के अनुसार, मतदान प्रतिशत 77.7% रहा। यह 2022 के चुनावों की तुलना में 7.1 प्रतिशत अंक अधिक है और 1999 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

हालांकि, 'i24NEWS' के एक अलग एग्जिट पोल में नेतन्याहू के लिए थोड़ी बेहतर स्थिति दिखाई गई है। इसके अनुसार, नेतन्याहू के गुट को 55 सीटें मिल सकती हैं, जबकि आइसेनकोट के खेमे को 49 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों को 16 सीटें मिलने की संभावना है। अलग-अलग अनुमानों से पता चलता है कि किसी भी पक्ष के पास सरकार बनाने का स्पष्ट रास्ता नहीं है, जिससे गठबंधन बनाने के लिए लंबी बातचीत का दौर शुरू हो सकता है। एग्जिट पोल केवल शुरुआती अनुमान होते हैं और मतगणना पूरी होने के बाद आने वाले अंतिम नतीजों से अलग हो सकते हैं।

अलग-अलग पार्टियों में नेतन्याहू की 'लिकुड' सबसे आगे
तीनों प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स के अनुमानों के अनुसार, 'लिकुड' इजरायल की सबसे बड़ी एकल पार्टी बनी रहेगी, हालांकि आइसेनकोट की मध्यमार्गी 'यशार' पार्टी से उसे कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद है।

चैनल 13 ने 'लिकुड' के लिए 25 और 'यशार' के लिए 23 सीटों का अनुमान लगाया है, जबकि चैनल 12 के अनुसार 'लिकुड' को 24 और 'यशार' को 22 सीटें मिल सकती हैं। 'कान' (Kan) के एग्जिट पोल में लिकुड को 25 सीटें और यशार को 21 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, i24NEWS के अनुमान के अनुसार लिकुड को 27 और यशार को 20 सीटें मिल सकती हैं।

हालांकि अलग-अलग पार्टियों में लिकुड सबसे आगे रह सकती है, लेकिन सीटों का कुल समीकरण विपक्ष के पक्ष में जा सकता है। यह अंतिम नतीजों और राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन को लेकर होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा।

अरब-नेतृत्व वाली पार्टियां निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं
अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों का प्रदर्शन काफी मजबूत रहने का अनुमान है, जिससे चुनाव के बाद होने वाली बातचीत में उनका प्रभाव बढ़ सकता है। हालांकि ये पार्टियां नेतन्याहू का विरोध करती हैं, लेकिन वे मुख्य यहूदी-नेतृत्व वाले विपक्षी गुट का औपचारिक हिस्सा नहीं हैं।

चैनल 13 और 'कान' के अनुसार, अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों को कुल 17 सीटें मिल सकती हैं, जबकि चैनल 12 के अनुमान में उन्हें 18 सीटें मिलने की बात कही गई है। 'जॉइंट लिस्ट' (Joint List) को चैनल 13 और 'कान' के पोल में 10 सीटें, जबकि चैनल 12 के अनुमान में 11 सीटें मिलने की संभावना है। तीनों ही अनुमानों में इस्लामी 'राअम' (Ra’am) पार्टी को 7 सीटें मिलने की उम्मीद है।

गठबंधन सरकार के बाहर से उनका समर्थन, या विश्वास मत के दौरान वोटिंग से दूर रहने का उनका फैसला, यह तय कर सकता है कि विपक्ष अल्पमत सरकार बना पाएगा या नहीं। हालांकि, नेतन्याहू और आइसेनकोट दोनों ने ही अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों के साथ किसी भी तरह की औपचारिक साझेदारी से इनकार किया है।

अन्य विपक्षी समूहों को भी अच्छी-खासी सीटें मिलने की उम्मीद है। नफ्ताली बेनेट के 'ब्याचाद' (B’Yachad) गठबंधन को चैनल 13 और 'कान' के पोल में 14 सीटें, जबकि चैनल 12 के अनुमान में 12 सीटें मिल सकती हैं। यायर गोलन के नेतृत्व वाले वामपंथी 'डेमोक्रेट्स' को चैनल 12 और चैनल 13 के पोल में 9 सीटें, और 'कान' के अनुमान में 10 सीटें मिलने की संभावना है।

इस बीच, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उनके धुर-दक्षिणपंथी तथा कट्टर-रूढ़िवादी सहयोगियों को मिलाकर भी, सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से काफी पीछे रहने का अनुमान है।

क्या अब गठबंधन पर बातचीत होगी?
एग्जिट पोल के आंकड़े बताते हैं कि चुनाव के तुरंत बाद, नेतन्याहू के लिए सरकार बनाने लायक बहुमत जुटाना मुश्किल हो सकता है। सरकार बनाने की असफल कोशिश का जोखिम उठाने के बजाय, वह विपक्ष को गठबंधन बनाने की कोशिश करने दे सकते हैं और इंतजार कर सकते हैं कि उनके आपसी मतभेद ही उनकी कोशिशों को कमजोर कर दें। ऐसी स्थिति में अंततः एक और चुनाव हो सकता है, जिससे नेतन्याहू को अपना समर्थन फिर से जुटाने का मौका मिल सकता है, हालांकि इससे उनके सत्ता में लौटने की कोई गारंटी नहीं होगी।

नेतन्याहू और आइसेनकोट को मिलाकर एक 'राष्ट्रीय एकता सरकार' बनने की संभावना भी कम ही नजर आती है। दोनों नेताओं के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हैं, और आइसेनकोट ने सार्वजनिक रूप से नेतन्याहू के साथ गठबंधन करने का विरोध किया है। हालांकि, अनिश्चित नतीजों के बीच एक 'एकता सरकार' बनाने की संभावना पर चर्चा हुई है, लेकिन नेतृत्व और नीतियों को लेकर मतभेदों के कारण किसी समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

मतदान खत्म होने के बाद, आइसेनकोट ने जीत का दावा किया और कहा कि जनता ने नेतन्याहू सरकार को नकार दिया है। उन्होंने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, "जनता ने अपना फैसला सुना दिया है, उसने नेतन्याहू सरकार को बाहर कर दिया है।" उन्होंने आगे कहा कि उनकी पार्टी अपने राजनीतिक सहयोगियों के साथ मिलकर मतभेदों को दूर करने और सरकार बनाने की कोशिश करेगी।

नेतन्याहू के राजनीतिक सहयोगी गिदोन साअर ने विपक्ष की संभावित बढ़त को एक निर्णायक जीत मानने के खिलाफ आगाह किया। उन्होंने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, "विपक्ष (लेफ्ट) का जश्न मनाना अभी जल्दबाजी होगी," और तर्क दिया कि लिकुड अभी भी इज़राइल की सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है।

आगे क्या होगा?
केंद्रीय चुनाव समिति ने मतों की गिनती शुरू कर दी है। अंतिम गिनती 30 अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद है और आधिकारिक नतीजे 4 नवंबर को जारी किए जाएंगे।

इजरायल की 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व' (proportional representation) प्रणाली के तहत, मतदाता पार्टियों की सूची को चुनते हैं। जिस पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिलती हैं, उसे अपने आप सरकार बनाने का अधिकार नहीं मिल जाता।

आधिकारिक नतीजे आने के बाद, राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग राजनीतिक दलों से बातचीत करेंगे और उस नेता को सरकार बनाने के लिए नामित करेंगे, जिसके पास सरकार बनाने की सबसे ज्यादा संभावना है। नामित नेता को कम से कम 61 सांसदों (विधायकों) के समर्थन वाला गठबंधन बनाने के लिए 42 दिन तक का समय मिलेगा।

अगर पहला नामित नेता सरकार बनाने में असफल रहता है, तो किसी दूसरे नेता को सरकार बनाने का मौका दिया जा सकता है। अगर सभी कोशिशें नाकाम रहती हैं, तो इजरायल में फिर से चुनाव कराने पड़ सकते हैं। इस बीच, मौजूदा सरकार 'कार्यवाहक' (caretaker) के तौर पर काम करती रहेगी।

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