Israel Legislative Election 2026 | 7 अक्टूबर हमले और युद्ध के बाद देश की दिशा तय करने के लिए मतदान, बेंजामिन नेतन्याहू के सामने अस्तित्व की सबसे कठिन लड़ाई

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रेनू तिवारी । Oct 27 2026 11:30AM

सर्वेक्षणों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मतदान का प्रमुख रुझान 'सेंटर-राइट' (मध्य-दक्षिणपंथी) और 'राइट-विंग' (दक्षिणपंथी) विचारधारा की ओर झुका हुआ है, लेकिन देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण इतना गहरा है कि चुनाव के नतीजे एक बार फिर त्रिशंकु स्थिति (Deadlock) पैदा कर सकते हैं।

7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए आतंकी हमले और उसके बाद गाजा व ईरान के साथ पैदा हुए रणनीतिक तनाव के बाद, इज़राइल की जनता 27 अक्टूबर, 2026 को अपने देश का भविष्य चुनने के लिए मतदान कर रही है। यह चुनाव मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक करियर की सबसे कठिन 'अग्निपरीक्षा' माना जा रहा है। देश की 26वीं संसद (नेसेट - Knesset) के सभी 120 सदस्यों को चुनने के लिए लगभग 73 लाख (7.3 मिलियन) मतदाता पंजीकृत हैं। सर्वेक्षणों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मतदान का प्रमुख रुझान 'सेंटर-राइट' (मध्य-दक्षिणपंथी) और 'राइट-विंग' (दक्षिणपंथी) विचारधारा की ओर झुका हुआ है, लेकिन देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण इतना गहरा है कि चुनाव के नतीजे एक बार फिर त्रिशंकु स्थिति (Deadlock) पैदा कर सकते हैं। 

सर्वे बताते हैं कि इनमें से ज़्यादातर लोग खुद को 'सेंटर-राइट' (मध्य-दक्षिणपंथी) या 'राइट-विंग' (दक्षिणपंथी) विचारधारा का मानते हैं। देश का भविष्य तय करने वाले इस चुनाव में अपना वोट डालने के लिए हज़ारों लोग वापस इज़राइल लौट आए हैं। मतदान से पहले, यरुशलम में रियल एस्टेट एजेंट का काम करने वाले 58 वर्षीय यूरिएल ब्रैंडलर ने AFP से कहा, "मुझे लगता है कि यह इज़राइल के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण चुनाव दिनों में से एक है। देश को हर लिहाज़ से एक बेहतर बदलाव की ज़रूरत है।"

नेतन्याहू के लिए सबसे बड़ी चुनौती?
77 वर्षीय नेतन्याहू इज़राइल में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे हैं और देश में अभी भी काफी लोकप्रिय हैं। इसके बावजूद, उनके लिए यह चुनाव बेहद कठिन होने की उम्मीद है। सर्वे बताते हैं कि उन्हें अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी और मध्यमार्गी नेता गादी आइसेनकोट से कड़ी टक्कर मिल रही है।

नेतन्याहू की सरकार पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। कई लोग ईरान के साथ तनाव और हमास के हमले को संभालने के उनके तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। हमास के उस हमले में इज़राइल में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे। इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ और मध्यमार्गी 'यशार' पार्टी के नेता आइसेनकोट ने खुद को एक विकल्प के रूप में पेश किया है।

कई ओपिनियन पोल बताते हैं कि वह नेतन्याहू से आगे चल रहे हैं। आइसेनकोट के अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट भी एक ऐसे उम्मीदवार हैं जो नेतन्याहू के गठबंधन को चुनौती दे रहे हैं। बेनेट भी एक दक्षिणपंथी नेता हैं, जो 2021 में प्रधानमंत्री रह चुके हैं। वह 'बी-याचाद' (B'Yachad) चुनावी गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री यायर लापिड की 'यश अतीद' पार्टी भी शामिल है। 

नेतन्याहू के लिए ट्रंप का समर्थन
चुनावों में नेतन्याहू को अपने प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी टक्कर मिलने के संकेत हैं। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री का समर्थन किया है। उन्होंने नेतन्याहू को एक बेहतरीन नेता बताया और कहा कि उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है। सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "उन्होंने बहुत मुश्किल हालात में प्रधानमंत्री के तौर पर बहुत अच्छा काम किया है।"

नेतन्याहू ने ट्रंप का आभार जताया और कहा कि इजरायल और अमेरिका के नेताओं के बीच ऐसी दोस्ती पहले कभी नहीं रही। रविवार को उन्होंने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसी दोस्ती लेकर आए हैं, जो पहले कभी किसी इजरायली प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच नहीं रही। और यह कहना मुश्किल है कि क्या भविष्य में हमें फिर कभी ऐसा मित्रवत राष्ट्रपति मिल पाएगा।"

इजरायल में मतदान कैसे होता है?
इजरायल में 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली' (proportional representation system) के जरिए मतदान होता है। इसके तहत, इजरायल की संसद, जिसे 'नेसेट' (Knesset) कहा जाता है, के 120 सदस्यों को चुनने के लिए पूरा देश एक ही चुनावी क्षेत्र माना जाता है।

मतदाता संसद के अलग-अलग सदस्यों को नहीं चुनते, बल्कि वे पार्टियों की एक तय सूची (closed party lists) के लिए वोट करते हैं। इस प्रणाली में कई राजनीतिक दल संसद में सीटों के लिए चुनाव लड़ सकते हैं। नेसेट में जगह पाने के लिए, किसी भी पार्टी को कम से कम 3.25 प्रतिशत वोट (चुनावी थ्रेशोल्ड) हासिल करना जरूरी होता है। इसी शर्त की वजह से अक्सर चुनाव से पहले ही पार्टियां आपस में गठबंधन कर लेती हैं या विलय कर लेती हैं।

नेसेट का कार्यकाल चार साल का होता है, लेकिन अगर संसद खुद को भंग करने का फैसला ले ले, तय समय के भीतर सरकारी बजट पास न हो पाए, या कोई नई सरकार न बन सके, तो समय से पहले भी चुनाव कराए जा सकते हैं।

सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी अपने आप सरकार नहीं बना लेती। चुनाव के बाद, राष्ट्रपति विभिन्न राजनीतिक गुटों से सलाह-मशविरा करते हैं और सरकार बनाने के लिए किसी सांसद को नियुक्त करते हैं। सरकार बनाने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना जरूरी होता है।

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