सऊदी में पाकिस्तानी सेना की एंट्री, भड़के हूतियों ने दहला डाला पूरा देश!

Pakistani
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अभिनय आकाश । Oct 7 2026 1:12PM

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। सऊदी अरब की मदद के लिए पाकिस्तान द्वारा सेना भेजने के फैसले के बावजूद हूतियों ने तीन हवाई अड्डों सहित कई ठिकानों को निशाना बनाया। इन भीषण हमलों से सऊदी अरब में भारी नुकसान हुआ है।

सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के हमले लगातार भीषण होते जा रहे हैं। वही सऊदी जिसने हाल ही में ओमान के आतंकी पायलट को बचाने की पूरी कोशिश की थी। हालांकि यूएई ने उसकी सारी कोशिशों को फेल करते हुए उसे सजा दिलाने की पूरी तैयारी कर ली है। यानी कि सऊदी जिस तरह के कट्टरपंथियों का बचाव कर रहा था और वैसे जिहादी उसे बड़े जख्म दे रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि कट्टरपंथी विद्रोही अल्लाह के मस्जिद को भी नहीं छोड़ रहे हैं। अल्लाह का घर कहे जाने वाले मदीना पर हाल ही में हूतियों ने बड़ा हमला किया था। जिसमें भारी नुकसान हुआ था। पूतियों से जान बचाने के लिए सऊदी इधर-उधर घूम रहा है। लेकिन इसी बीच सऊदी की मदद के लिए वो पाकिस्तान खड़ा हो गया है जो मक्का समझौता होने के बावजूद भी सऊदी को अब तक पिटवा रहा था। अब अचानक से पाकिस्तान को मक्का समझौता याद आया है और उसने अपनी सेना सऊदी में भेजने का फैसला लिया है। लेकिन जैसे ही युतियों को पता चला कि सऊदी में पाकिस्तान की सेना की एंट्री हो गई है तो हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर ऐसे भीषण हमले शुरू कर दिए जिसने पूरा देश दहला दिया है।  

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चौधरी बनने वाले पाकिस्तान की अकड़ ढीली 


दरअसल पाकिस्तान को लग रहा था कि जैसे ही वह सऊदी में सेना भेजने का ऐलान करेगा तो हमले रुक जाएंगे। लेकिन इससे हूतियों के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ा बल्कि उसने हमलों को और तेज कर दिया है। खबर है कि हूतियों ने सऊदी अरब के तीन एयरपोर्ट को निशाना बनाया है और वहां ड्रोन और बैलस्टिक मिसाइलें बरसाई हैं। पाकिस्तान की एंट्री के बीच यमन के ईरान समर्थित भूतियों ने सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया है जिसमें भारी नुकसान हुआ है। हमला इतना भीषण था कि कई लोगों के चिथड़े उड़ गए। दरअसल सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग भी हूतियों के लिए चुनौती नहीं बन पाया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यूतियों के पास यमन से ड्रोन और मिसाइल हमले करने की क्षमता और अलग कमांड स्ट्रक्चर है। पाकिस्तान की सऊदी सुरक्षा में भूमिका बढ़ने का मतलब यह नहीं कि उसकी सेना सीधे यमन में हूतियों के खिलाफ मोर्चा संभाल रही है। इसके अलावा हूं संदेश देना चाहते हैं कि वो इस लड़ाई को गंभीरता से ले रहे हैं। दूसरी तरफ हूं इस संघर्ष को सऊदी अरब के खिलाफ अपनी पुरानी लड़ाई के तौर पर देखते हैं। नजरान और जिजान जैसे यमन सीमा से लगे इलाके पहले से ही उनके निशाने पर रहे हैं। इसके अलावा लाल सागर और तेल आपूर्ति मार्गों पर दबाव बनाना हूतियों के लिए बड़ा रणनीतिक हथियार है। यही वजह है कि पाकिस्तान की एंट्री के बावजूद हूतियों ने ड्रोन मिसाइल हमलों का सिलसिला जारी रखा है। 

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यमन में हूतियों का करीब 1/3 इलाके पर नियंत्रण


यहां देश की करीब 80% आबादी रहती है। यही वजह है कि हूतियों का क्षेत्रफल कम होने के बावजूद उनका देश की आबादी और अहम शहरों पर बड़ा प्रभाव है। हूतियों ने पिछले 48 घंटों में यमन के पश्चिमी तट पर कई रणनीतिक पहाड़ियों पर कब्जा किया है। अगर हूं इस इलाके को सरकारी इलाके से काट देते हैं तो सरकार पूरी तरह इस पर नियंत्रण खो देगी। यमन में सरकार और हूतियों के बीच करीब 12 साल से लड़ाई चल रही है। सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है। जबकि हूतियों को ईरान का समर्थन मिलता है। हूती विद्रोही सऊदी अरब पर हमला करने की सबसे बड़ी वजह उसी सैन्य गठबंधन को मानते हैं जिसने यमन में उनके खिलाफ बरसों तक हवाई हमले किए हैं। पश्चिमी देशों और सऊदी अरब का आरोप है कि ईरान भूतियों को हथियार, ट्रेनिंग और फंडिंग मुहैया कराता है। जिससे वे इतने बड़े स्तर पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने में सक्षम हो पाते हैं। तो कुल मिलाकर साफ है कि हुतियों ने सऊदी पर हमले बढ़ाते हुए पाकिस्तान को बता दिया है कि तुम अगर सामने आओगे तो तुम्हें भी नहीं छोड़ा जाएगा। इसलिए अब पाकिस्तान को फैसला करना है कि उसे अपनी वहां से सेना हटानी है या फिर अपनी कब्र खुदवानी है।

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