Donald Trump Russia oil Sanctions | भारत और चीन को बड़ी राहत! अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से तेल-गैस पर लगे बैन और टैरिफ हटाए

Donald Trump
ANI
रेनू तिवारी । Oct 17 2026 8:40AM

राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए, रिपब्लिकन नेता ने शुक्रवार शाम (स्थानीय समय) को 'सेंक्शिनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' (रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून) के तहत यह छूट दी। यह छूट ठीक उस समय दी गई, जब ये प्रतिबंध लागू होने ही वाले थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस छूट के संबंध में कांग्रेस को एक प्रमाण-पत्र भी सौंप दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कूटनीतिक और आर्थिक फैसलों में एक और बड़ा यू-टर्न लेते हुए रूस से तेल और गैस खरीदने पर लगे सभी प्रतिबंधों और अतिरिक्त टैरिफ को हटाने का फैसला किया है। अमेरिका के इस फैसले से भारत, चीन सहित दुनिया के कई अन्य देशों को भारी राहत मिली है, जो लगातार रूस से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रियायती दरों पर कच्चे तेल का आयात कर रहे हैं। राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए, रिपब्लिकन नेता ने शुक्रवार शाम (स्थानीय समय) को 'सेंक्शिनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' (रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून) के तहत यह छूट दी। यह छूट ठीक उस समय दी गई, जब ये प्रतिबंध लागू होने ही वाले थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस छूट के संबंध में कांग्रेस को एक प्रमाण-पत्र भी सौंप दिया है।

अपने कार्यकारी आदेश में उन्होंने कहा, "मैं 'ग्राहम एक्ट' के तहत लगाए गए इन प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों को हटा रहा हूँ। मैंने कांग्रेस को एक प्रमाण-पत्र दिया है कि इस समय ऐसी छूट देना संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।"

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लिंडसे ओ. ग्राहम 'सेंक्शिनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट'

दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर बने इस कानून ने ट्रम्प को रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और रूसी तेल व गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार दिया था। इस साल जुलाई में निधन होने वाले ग्राहम, यूक्रेन के कट्टर समर्थक थे। यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के बीच, उन्होंने रूस को आर्थिक मदद देने वाले देशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की वकालत की थी।

ट्रम्प ने पहले भारत द्वारा रूसी तेल खरीदे जाने की आलोचना भी की थी और भारत से ऐसा न करने को कहा था। हालांकि, नई दिल्ली अपने रुख पर अडिग रही और स्पष्ट किया कि वह अपने आर्थिक हितों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी।

लेकिन ट्रम्प का इन प्रतिबंधों को हटाना उनके हालिया फैसलों में एक और बड़ा बदलाव (यू-टर्न) है। कुछ दिन पहले ही उन्होंने रूस के साथ एक तेल समझौता किया था, जिसके तहत मॉस्को "अमेरिकी और वैश्विक बाजार" को 300,000 टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। ट्रम्प ने बताया था कि इसके अलावा, रूस नवंबर में 500,000 टन डीजल की आपूर्ति करेगा, और उसके तुरंत बाद 1 मिलियन टन डीजल और देगा। 

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अमेरिका-रूस तेल सौदे को लेकर ट्रंप और ज़ेलेंस्की आमने-सामने

ट्रंप के इस कदम को मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका में तेल संकट को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा गया। हालाँकि, कई लोगों ने इसकी आलोचना भी की, जिनमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की भी शामिल थे। उन्होंने इस कदम को "युद्ध में निवेश" बताया और रूस के साथ "वास्तविक तनाव-कमी" (de-escalation) की अपील की।

हालाँकि, ट्रंप अपने फैसले पर अडिग रहे। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि यूक्रेन को एक नए राष्ट्रपति की ज़रूरत है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मॉस्को के साथ चल रहे संघर्ष को लेकर वाशिंगटन और कीव के बीच मतभेद काफी बढ़ गए हैं। ट्रंप ने ज़ेलेंस्की से रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना बंद करने को कहा है, लेकिन इसके बावजूद हमले जारी हैं, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति नाराज़ हैं।

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अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप के इस ताज़ा कदम पर यूक्रेन क्या प्रतिक्रिया देता है, क्योंकि यूक्रेन हमेशा से उन देशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की वकालत करता रहा है जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।

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