H-1B Visa पर बयान को लेकर JD Vance ने दी सफाई, कहा कंपनियों पर था निशाना

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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्वीकार किया है कि एच-1बी वीजाधारकों को बंधुआ मजदूर कहने में उनके शब्दों का चयन गलत था। उन्होंने सीबीएस न्यूज के कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि उनका मकसद कर्मचारियों को नहीं बल्कि उस वीजा प्रणाली और कंपनियों को घेरना था जो कामगारों पर अत्यधिक नियंत्रण रखती हैं। भारत ने उनके पिछले बयान को बेहद अपमानजनक बताया था।

(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 18 अक्टूबर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्वीकार किया है कि एच-1बी वीजाधारक विदेशी पेशेवरों को ‘बंधुआ मजदूर’ कहने के दौरान उनके शब्दों का चयन सही नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके निशाने पर एच-1बी वीजा धारक नहीं, बल्कि अमेरिकी कंपनियां और वीजा प्रणाली थी। भारत ने विदेशी पेशेवरों के लिए इस्तेमाल की गई इस भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई थी और इस शब्दावली को ‘‘बेहद अपमानजनक’’ बताया था।

भारत ने कहा था कि इससे इतिहास तथा औपनिवेशिक दौर की दर्दनाक यादें जुड़ी हैं। शनिवार को सीबीएस न्यूज के टाउन हॉल कार्यक्रम में वेंस ने कहा कि वह उस वीजा प्रणाली की आलोचना कर रहे थे जिसमें विदेशी कर्मचारियों के मामले में कंपनियों को बहुत ज्यादा अधिकार मिले हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था में कर्मचारियों को उनके मूल देश वापस भेजा जा सकता है और उनके साथ प्रभावी रूप से ‘बंधुआ मजदूरों’ जैसा व्यवहार किया जा सकता है।

पांच साल पहले अमेरिकी नागरिक बने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वोट देने वाले एक भारतीय प्रवासी के सवाल के जवाब में वेंस ने कहा, “मैं यह कहूंगा कि अगर इस मामले में मेरे शब्दों का चयन सही नहीं रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी मेरी है।” उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने एच-1बी वीजा धारकों की आलोचना करते हुए वह टिप्पणी नहीं की थी। वेंस ने कहा, “जब लोग एच-1बी वीजा पर अमेरिका आते हैं, तो अक्सर कंपनी यह प्रमाणित करती है कि वह काम करने के लिए किसी अमेरिकी कर्मचारी को नहीं ढूंढ़ पा रही। महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका वीजा ही अमेरिका में रहने का एकमात्र सहारा होता है।

इसलिए जब मैं उन्हें बंधुआ मजदूर कहता हूं, तो यह एच-1बी वीजा धारक की आलोचना नहीं है। यह उस कंपनी की आलोचना है, जो किसी व्यक्ति को यहां लाती है।” उन्होंने कहा, “यह उस वीजा प्रणाली की आलोचना है, जो लोगों के साथ प्रभावी रूप से बंधुआ मजदूरों जैसा व्यवहार करने की अनुमति देती है और उन्हें उनके मूल देश वापस भेजा जा सकता है।” विदेशी पेशेवरों का स्वागत करने और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने के बीच संतुलन बनाने की बात करते हुए उन्होंने अपने दक्षिण भारतीय ससुराल वालों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “आप जानते हैं कि मेरा परिवार कहां से संबंध रखता है।

मैं अपनी सास और ससुर से बहुत प्यार करता हूं, जो दक्षिण भारत से आकर अमेरिका में बसे थे। उनकी बेटी का जन्म अमेरिका में हुआ और अब वह अमेरिका की द्वितीय महिला हैं। मुझे उन पर बहुत गर्व है और मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं।” वेंस की पत्नी उषा वेंस भारतीय प्रवासियों की बेटी हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूं कि कोई भी पूर्ण नहीं है और निश्चित रूप से मैं भी नहीं। लेकिन मेरा उद्देश्य किसी भी प्रवासी को अमानवीय रूप में पेश करना नहीं है। वास्तव में, मैं कई प्रवासियों से प्यार करता हूं।” इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका ने भारतीय आईटी कंपनियों समेत कई कंपनियों को उस कार्यक्रम से निलंबित कर दिया था, जिसके तहत विदेशी कर्मचारी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

अमेरिका ने तर्क दिया था कि इस प्रक्रिया के कारण अमेरिकी नागरिकों को नौकरी के अवसरों से वंचित होना पड़ा है। इस फैसले की घोषणा उपराष्ट्रपति वेंस ने की थी। हर साल मंजूर होने वाले कुल एच-1बी आवेदनों में 70 प्रतिशत से अधिक भारतीय पेशेवरों के होते हैं।

वेंस ने एच-1बी वीजा पर नौकरी करने वाले विदेशी कर्मचारियों को ‘विदेशी बंधुआ मजदूर’ और इस कार्यक्रम का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को ‘वीजा मिल’ कहा था।

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