Why Pakistan Imploded | आज भारत Top 5 इकोनॉमी और पाकिस्तान कंगाल क्यों? | Globmaster

Pakistan
AI Image
अभिनय आकाश । Oct 15 2026 6:53PM

1947 के विभाजन के बाद भारत एक मजबूत राष्ट्र बना, जबकि पाकिस्तान राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता के लालच में उलझ गया। जिन्ना के निधन और लियाकत अली की हत्या के बाद वहां सत्ता संघर्ष इतना गहराया कि 1958 तक आठ प्रधानमंत्री बदल गए। मजहब के नाम पर बने पाकिस्तान को अपना संविधान बनाने में भी 26 साल लग गए।

कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जिन्हें इतिहास कभी भुला नहीं सकता। भारत विभाजन के ठीक पहले एक अस्थाई सरकार बनी थी। जिसके प्रधानमंत्री थे जवाहर लाल नेहरू। इस सरकार के फाइनेंस मिनिस्टर थे लियाक़त अली खान और ये सरकार कांग्रेस-मुस्लिम लीग के लिए आखिरी मौका थी, पार्टीशन रोकने के लिए। पर ऐसा हुआ नहीं। दोनों एक-दूसरे पर इल्जाम लगाते रहे। लियाकत पर इल्जाम लगता था कि फाइनेंस मिनिस्टर की हैसियत से वो किसी भी मंत्रालय को पैसा ही नहीं रिलीज करते थे। 16 अगस्त 1946 की एक तारीख हिन्दुस्तान की आजादी के इतिहास की ऐसी ही तारीख है जिसने बंटवारे की हकीकत पर मुहर लगा दी। मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में अपने स्वार्थ के लिए एक धड़े ने भारत को बांटने का दावा पेश कर दिया था। उनकी मांग थी पश्चिम के पेशावर से लेकर पंजाब के अमृतसर और कोलकाता समेत एक अलग राष्ट्र जो सिर्फ मुसलमानो के लिए बनेगा और जिसका नाम होगा पाकिस्तान। नतीजतन 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान बना और लियाकत अली खान इसके पहले प्रधानमंत्री बने। दोनों देश अलग एक साथ हुए और लगभग एकसाथ ही आगे बढ़े। लेकिन आज भारत कहां खड़ा है और पाकिस्तान की हालात तो किसी से भी छुपी नहीं है। दोनों देशों को आजादी एक साथ मिली। लेकिन एक बन गया दुनिया का महानतम देश और दूसरा बर्बाद, तबाह और दुनिया के लिए आतंक का अड्डा। 79 साल पहले बंटवारे के साथ ही भारत के भू-भाग पर ऐसी लकीर खीची जिसने जमीन, जंगल, लोग यहां तक की विचारों को भी बांट दिया। भारत और पाकिस्तान ने बंटवारे के बाद अपनी-अपनी नीति और नियती चुनी। लीकरों से शुरू हुआ खेल तकदीरों तक कितना पहुंचा।

इसे भी पढ़ें: Israel Airspace: पाकिस्तान समेत 24 से अधिक देशों के पायलटों और क्रू पर लगा प्रतिबंध

पाकिस्तान में लालच तंत्र की शुरुआत


हजारों वर्षों की विरासत, सैकड़ों सालों की गुलामी से मुक्ति, विशाल आबादी, अलग-अलग भाषाओं और परंपराओं में बंटा देश। आजादी के साथ ही भारत की जिम्मेदारी जितनी बड़ी थी। मजहब के नाम पर एक टुकड़ा लेकर अलग होने वाले पाकिस्तान का लालच उतना ही अधिक था। भारत की कुल रकम का 17.5 फीसदी पैसा पाकिस्तान को दिया गया। पाकिस्तान को अपना आधा अधूरा संविधान बनाने में 26 साल लग गए। जिन्ना की मौत पाकिस्तान निर्माण के 13 महीने बाद ही हो गई। कई रिपोर्ट्स में लिखा भी है कि जिन्ना के आखिरी शब्द थे कि पाकिस्तान बनाना मेरी सबसे बड़ी भूल थी। जिन्ना की मौत के साथ ही पाकिस्तान में सत्ता का लालच सिर चढ़कर बोलने लगा। पाकिस्तान का पहला चुनाव इससे पंजाब प्रांत में मार्च 1951 में हुआ। इस दौरान भी जनता ने सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लिया। बल्कि चुनिंदा लोगों ने ही वोट डाले। बाद में पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 1958 तक पाकिस्तान में 8 प्रधानमंत्री अधूरे कार्यकाल के साथ अलविदा हो चुके थे। 

सेक्युलरिज्म को संविधान में जगह


भारत इस नए मुल्क के निर्माण का सबसे बड़ा सूत्रधार था। लड़ाई खत्म होने के बाद शेख मुजीब की आवामी लीग ने सरकार बनाई। शेख मुजीब आजाद बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति और फिर प्रधानमंत्री बने। 1971 में जब देश  बना तो उसने खुद को एक सेक्युलर देश के रूप में उद्घोषित किया। ये साउथ एशिया का पहला मुस्लिम बहुसंख्यक देश था जिसने सेक्यूलरिज्म को अपने संविधान में जगह दी। शेख मुजीब कहा करते थे मुस्लिम अपने धर्म का पालन करे। हिन्दू, बौद्ध, ईसाई अपने धर्म का पलान करे। हम सिर्फ धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल का विरोध करेंगे। शेख मुजीब को प्यार से लोग बंग बंधु भी करते थे। बंग बंधु को बांग्लादेश का राष्ट्रपिता भी कहा जाता है। 


पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट की शुरुआत


साल 1958 में पाकिस्तान में पहली बार तख्तापलट हुआ था। उस वक्त पाकिस्तानी आर्मी ने तत्कालीन सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन को बढ़ावा दिया। पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्कंदर मिर्ज़ा ने पाकिस्तानी संसद और प्रधानमंत्री फिरोज खान नून की सरकार को भंग कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने देश में मार्शल लॉ लागू कर आर्मी कमांडर इन चीफ जनरल अयूब खान को देश की सत्ता सौंप दी। तेरह दिन बाद ही अयूब खान ने तख्तापलट करते हुए देश के राष्ट्रपति को पद से हटा दिया था और खुद नए राष्ट्रपति बन गए थे। 

All the updates here:

अन्य न्यूज़