बरसात में तैरते अवसर (व्यंग्य)

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Prabhasaskhi
संतोष उत्सुक । Sep 26 2026 5:16PM

बैठक में सकारात्मक निर्णय लिया गया कि बरसात को आफत न कहा जाए और इस सन्दर्भ में प्राकृतिक आपदा जैसे घिसे पिटे शब्दों का प्रयोग न किया जाए। इसे एक वार्षिक अवसर की तरह लिया जाए। बारिश के नाराज़ पानी ने जहां आना जाना है उसे कोई रोक नहीं सकता लेकिन हम कैसे इसका उपयोग कर सकते हैं।

हर बरस बरसात के मौसम से पहले, वार्षिक आयोजन की तरह ज़रूरी बैठक होती है। कई बार शरारती बारिश, बैठक से पहले ही आ जाती है और एजेंडा बहा ले जाती है। बैठक में उच्च स्तरीय विचार विमर्श किया जाता है कि आने वाली बरसात से जैसे कैसे, कैसे निपटा जाए। बहुत ज्यादा गहन विचार विमर्श के बाद कठोर निर्णय लिए जाते है और उन्हें कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन जब बारिश जोश में होती है तो सभी योजनाओं के होश बह जाते हैं।  

इस बार बरसात के मौसम के सम्बन्ध में जो बैठक हुई थी उसकी अध्यक्षता ज्यादा उच्च अधिकारी ने की। उनकी सोच बिलकुल नई रही। बैठक में आए अन्य लोग भी चाहते थे कि इस बार बरसात से कुछ इस तरह से निपटा जाए कि चारों तरफ तारीफ के पुल बंधे दिखें । सभी ने एक मत से माना कि जहां पानी आफत ही बन जाए वहां तो ऊपर वाला ही कुछ कर सकता है लेकिन जहां कुछ फुट पानी आया हो, वहां बैठक में अनुमोदित योजना कार्यान्वित की जानी चाहिए।

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बैठक में सकारात्मक निर्णय लिया गया कि बरसात को आफत न कहा जाए और इस सन्दर्भ में प्राकृतिक आपदा जैसे घिसे पिटे शब्दों का प्रयोग न किया जाए। इसे एक वार्षिक अवसर की तरह लिया जाए। बारिश के नाराज़ पानी ने जहां आना जाना है उसे कोई रोक नहीं सकता लेकिन हम कैसे इसका उपयोग कर सकते हैं इसकी योजना नवोन्मेषी ढंग से बनाई जा सकती है। आम लोगों को बताने के लिए सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया का प्रयोग करते हुए बताया जाए कि प्रशासन, इस बार ठहरे हुए पानी वाले क्षेत्रों में नाव योजना चलाएगा। अलग अलग आकार में मोटर बोट, नाव वगैरा उपलब्ध करवाई जाएंगी। आम लोग अपने ख़्वाब, इरादे, यातायात, सामान और अन्य ज़रूरतों के मुताबिक प्रयोग कर सकेंगे। बारिश कुदरती है उस पर विश्वास नहीं कर सकते, नाव इंसान का आविष्कार है। हर बरस उसकी ज़रूरत पड़ती है इसलिए उस पर भरोसा करना पडेगा। अपनी नाव या मोटरबोट खरीदने के लिए सब्सिडी मिलेगी।

बढ़िया योजना है। इस बहाने नाव बेचने, खरीदने, किराए पर देने और मरम्मत का मौसमी व्यवसाय भी चल निकलेगा। यह तो मेहनती और अवसर का लाभ उठाने वाले पर निर्भर है कि कितना कमाया। चुनाव के मौसम में भी तो घोड़ों का मौसमी व्यापार कर, लोग कुछ न कुछ कमाते ही हैं। बाज़ार में तरह तरह की डिजाईन वाली, रंग बिरंगी और स्वचालित  बोट्स पहले से उपलब्ध हैं। उनमें से मनपसंद चुनकर खरीद सकते हैं। किश्तों पर होम डिलीवरी भी हो सकती है। आजकल तो छोटे से छोटा व्यवसायी भी स्टार्टअप शुरू करना चाहता है, करता भी है, सफल होता है तो असफल भी हो सकता है। कोशिश बड़ी चीज़ है। एक बार नाव योजना शुरू होकर सफलता से तैर निकली तो इरादों के जहाज भी चल सकते हैं।

इस योजना में आर्थिक मछलियां पकाने और खाने की संभावना बहाई जा सकती है। राजनीति के सुगंधित नाले तो खुद ही इस योजना से मिलने आ जाएंगे। खेल कूद विभाग सालाना प्रतियोगिता आयोजित कर सकता है। तैरना सीखने वाले इच्छुक जब चाहें सीख सकते हैं। जिनके यहां बरसात के मौसम में भी पानी नहीं आता, घर आए इस जल का भंडारण कर सकते हैं। देखोजी, कमियां तो हर काम में रह जाती हैं। कोई योजना पसंद न आए तो संशोधन का दूध डाला जा सकता है। शुद्ध सीमेंट के हलवे से मरम्मत की जा सकती है।

यह योजना संजीदगी से समझाती है कि समय सबको अवसर देता है और अवसर को हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। उम्मीद की जा सकती है अगले बरस, ‘सफल नाव योजना’ पर बैठक, नाव में बैठकर हो।

- संतोष उत्सुक

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