NDA से अलग होकर अब योगी से भिड़ेंगे 'मोदी के हनुमान'?चिराग पासवान का UP प्लान क्या है,चौंका देगी सच्चाई!

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अभिनय आकाश । Sep 30 2026 4:46PM

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार में कानून-व्यवस्था पर अपनी ही गठबंधन सरकार और प्रशासन पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने राज्य में असुरक्षा को लेकर सरकार में शामिल होने पर शर्मिंदगी जताई। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव और एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर दबाव बनाने की रणनीति मान रहे हैं।

"मुझे शर्म आती है कि मैं इस सरकार के साथ हूं... प्रशासन पूरी तरह निकम्मा हो चुका है।" यह किसी विपक्षी नेता का हमला नहीं, बल्कि केंद्र सरकार में मंत्री और खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान कहने वाले चिराग पासवान का खुला ऐलान-ए-जंग है। बिहार में बेलगाम अपराध और हालिया वारदातों पर चिराग के इन तल्ख तेवरों ने सूबे से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। हैरानी इसलिए भी है क्योंकि जिस सरकार पर वह सवाल उठा रहे हैं, उसमें चिराग खुद हिस्सेदार हैं। जिस प्रशासन को वो निकम्मा बता रहे हैं, उसकी कमान सीधे डिप्टी सीएम और गृह मंत्री सम्राट चौधरी के हाथों में है। वही सम्राट चौधरी, जिन्हें सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने में चिराग का कंधा भी लगा था। ऐसे में बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर चिराग पासवान के मन में पक क्या रहा है? क्या यह सम्राट चौधरी के खिलाफ सत्ता के भीतर से शुरू हुई कोई सुनियोजित घेराबंदी है? या फिर इसकी पटकथा 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए लिखी जा रही है? क्या बिहार में दबाव बनाकर चिराग यूपी में बीजेपी से अपनी शर्तों पर गठबंधन की जमीन तलाश रहे हैं? अपनों पर ही चिराग का यह तीखा वार महज़ कानून-व्यवस्था पर गुस्सा है, या फिर एनडीए के भीतर किसी बड़े सियासी खेल की शुरुआत? आइए आज इस बगावती तेवर के पीछे की रणनीति का एमआरआई स्कैन करते हैं।

महज़ कानून-व्यवस्था पर गुस्सा है,या किसी सियासी खेल की शुरुआत


26 सितंबर को सिटी पोस्ट के कॉनक्लेव में चिराग पासवान पहुंचे थे। उनसे सवाल पूछा गया क्या आप मानते हैं कि बिहार में अपराधी बेखौफ हैं। दलित सुरक्षित नहीं है। बेटियां सुरक्षित नहीं है। इस पर चिराग पासवान का जवाब था कोई भी सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहा है। आज की तारीख में। यह चिंता हमारी सरकार की है। एक सहयोगी और सरकार का हिस्सा होने के नाते मैं खुद इस सवाल से नहीं भाग सकता हूं। मुझे खुद शर्मिंदगीगी होती है जब मैं सोचता हूं कि मैं एक ऐसी सरकार के साथ हूं जहां ऐसी घटनाएं हो रही हैं। यह चिंता का विषय है और इसको कतई हम लोग हल्के में जाने नहीं दे सकते। चिराग ने आगे कहा राष्ट्रीय स्तर पर मेरे बिहार की छवि कैसी जा रही है? हमारे बिहार की बेटियों में सोचिए कैसे डर और सुरक्षा का माहौल उत्पन्न हो गया है। आज की तारीख में कोई बच्ची मुझे बता दीजिए जो शाम को निकलने से पहले 100 बार ना सोचती होगी। तो ऐसे में जिस सरकार का मैं हिस्सा हूं मेरी वह सरकार एक्सेंस ऑफ सिक्योरिटी ना दे पाए यह तो मैं स्वीकार नहीं करूंगा। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री चिराग पासवान के बयान का टोन नया नहीं है। बिहार में यह टोन बहुत पुराना है। उन्हीं के गठबंधन के सबसे बड़े नेता नरेंद्र मोदी खुद इसी टोन में बयान देते रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह इस टोन का इस्तेमाल करते रहे हैं। ऐसे शब्दावली का इस्तेमाल करते रहे हैं। पूरी बीजेपी इसी भाषा में राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी, लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को निशाना बनाती रहती है। हमले किए जाते हैं कि लालू राज में बिहार में सूर्यास्त के बाद कोई घर से निकल नहीं पाता था।


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क्या  सम्राट चौधरी के खिलाफ सत्ता के भीतर शुरू हुई सुनियोजित घेराबंदी? 


चिराग उस गठबंधन का हिस्सा हैं जो बिहार में सरकार चला रही है। लोजपा रामविलास के 19 विधायक हैं। सम्राट चौधरी की सरकार में पार्टी के दो मंत्री भी हैं। लोकसभा में पार्टी के पांच सांसद हैं। केंद्र सरकार में एक मंत्री भी हैं जो कि खुद चिराग पासवान हैं। लेकिन बिहार में बढ़ते क्राइम पर उनकी चिंता अब तक सिर्फ बयानों में ही दिखी है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लिखा है इस्तीफा देने के लिए किस शुभ मुहूर्त का इंतजार कर रहे हैं चिराग पासवान शर्म का बोझ उठाकर भी सत्ता का हिस्सा बने रहना कोई चिराग पासवान जी से सीखे। बहन बेटियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से असुरक्षित हो चुके बिहार की वजह से जब सरकार का हिस्सा होने में उन्हें शर्मिंदगीगी महसूस हो ही रही है तो इस्तीफा देने की हिम्मत कौन से मुहूर्त के इंतजार में रुकी हुई है। चिराग पासवान के बयान की वजह से सम्राट चौधरी या उनकी सरकार की कार्यशैली खास बदलती दिख तो नहीं रही है या उनके बयान का लोड लेते हुए भी सम्राट चौधरी नहीं दिख रहे हैं। चिराग बीजेपी पर अटैक करके उसे बेवजह तो नाराज नहीं ही करना चाहेंगे। दिल्ली का समन उन्हें क्यों चाहिए? तो क्या यह कहीं पर निगाहें और कहीं पर निशाना वाला मामला है। इसे समझने के लिए 2025 बिहार चुनाव से ऐन पहले के वक्त को देखना होगा। जून जुलाई के महीने में एक के बाद एक चिराग के बयान आ रहे थे। लगातार नीतीश कुमार के नेतृत्व में चल रही सरकार को टारगेट कर रहे थे। यहां तक कह गए कि बिहार में ऐसा लगता है कि पुलिस प्रशासन ने अपराधियों के सामने सरेंडर कर दिया है। तब भी चिराग पासवान यही कह रहे थे कि उन्हें एक ऐसी सरकार का समर्थन करने पर दुख है। तब इन बयानों का विश्लेषण हुआ कि यह सब सीट शेयरिंग के टेबल पर जाने की तैयारी है। प्रेशर क्रिएट किया जा रहा है ताकि लोजपा रामविलास को ज्यादा से ज्यादा सीटें एनडीए में मिल सके।

यूपी का चुनाव भी एक फैक्टर


हुआ यह कि जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने दलित और महादलित दो कैटेगरी बांट दिया और जिसकी वजह से किसी जमाने में दलितों की राजनीति करने वाले रामविलास पासवान सिर्फ पासवान के नेता बनकर रह गए क्योंकि बाकी महादलितों के नेता या तो नीतीश कुमार हो गए या जीतन राम मांझी  हो गए। वो दर्द आज भी पासवान की पार्टी को है कि पूरी राजनीतिक जमा पूंजी खत्म कर दी। अब वो मजबूरी है।  रहना तो एनडीए में ही है। जा भी नहीं सकेंगे क्योंकि सत्ता सबको अच्छी लगती है। मलाई खाना सबको अच्छा लगता है। लेकिन स्टेटमेंट देकर दबाव बनाने की कोशिश है।  चिराग पासवान फिर 2025 वाली भाषा का इस्तेमाल करने लगे हैं। कह रहे हैं कि उन्हें दुख और शर्मिंदगीगी महसूस हो रही है कि वह एक ऐसी सरकार का समर्थन कर रहे हैं जो बिहार में सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रही। लेकिन अब किस चुनाव में सीट शेयरिंग के टेबल पर बारगेनिंग करना चाहते हैं चिराग पासवान। यूपी में चुनाव होने वाले हैं। जहां चिराग पासवान चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। वह पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं। तो चुनाव में अपनी पार्टी के लिए ज्यादा से ज्यादा सीटें मांगेंगे। पिछले बिहार चुनाव में भी सीट लेने के लिए नीतीश कुमार पर अटैक कर रहे थे। चिराग पासवान एक अच्छे बारगेनर हैं। इसलिए यूपी का चुनाव भी एक फैक्टर है।

यूपी में जदयू कौन बनेगा और कौन होगा नीतीश कुमार?


उत्तर प्रदेश में विधनसभा चुनाव वैसे तो अगले बरस है, लेकिन राजनीतिक दलों की ओर से तैयारियां तेज हो चली हैं। इस बार  चुनावी मैदान में बिहार की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) भी उतरने की तैयारी में है। पार्टी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने प्रयागराज में यूथ बोले तो कार्यक्रम के जरिए विधानसभा चुनाव के लिए अभियान का आगाज किया है। पार्टी ने साफ किया है कि उनकी तैयारी सभी 403 सीटों पर चल रही है। प्रयागराज से चिराग पासवान के ऐलान ने प्रदेश में राजनीतिक हलचल को तेज किया है। दरअसल, लोजपा (रामविलास) केंद्र और बिहार में एनडीए के साथ है। वहीं, यूपी चुनाव में पार्टी की तैयारी भाजपा को टक्कर देने की है। चिराग ने तो यह तक कह दिया है कि गठबंधन हो या ना हो उनकी पार्टी यूपी चुनाव लड़ेगी जरूर। यह बयान सुनते ही पॉलिटिक्स पर नजर रखने वालों को 2020 का बिहार चुनाव याद आ सकता है। जब खुद चिराग ने कहा था कि एनडीए गठबंधन में उन्हें 15 सीटें दी जा रही थी। उन्होंने नीतीश कुमार से भी नाराजगी जाहिर की थी तब जिसकी वजह से चिराग पासवान ने अकेले ही बिहार चुनाव में उतरने का निर्णय किया था। वह उतरे भी चुनाव लड़े उन्हें जीत तो हासिल नहीं हुई लेकिन उनकी वजह से जदयू को ठीक-ठाक नुकसान हो गया। नतीजों के बाद कहा गया कि चिराग जिस मिशन पर निकले थे यानी निकाले गए थे वह आखिरकार पूरा हुआ। यानी कम सीटें चिराग पासवान के लिए किसी गठबंधन में साथ रहने के नजरिए से रेड फ्लैग है। तो ऐसी स्थिति में 

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प्रयागराज में दिखा चिराग पासवान का नया तेवर


28 सितंबर को प्रयागराज में आयोजित 'यूथ बोले तो' संवाद कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान बिल्कुल जुदा अंदाज में नजर आए। पारंपरिक राजनीतिक पहनावे को छोड़ वे कैजुअल जींस और टी-शर्ट में युवाओं के बीच पहुंचे। मंच से नौजवानों के साथ शिक्षा, रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और राजनीति में युवाओं की सक्रियता पर खुलकर चर्चा करते हुए उन्होंने बड़ा सियासी ऐलान किया। चिराग ने साफ लफ्जों में कहा कि इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिएलोजपा (रामविलास) पूरी मजबूती के साथ उत्तर प्रदेश का 2027 विधानसभा चुनाव लड़ेगी। हालांकि जिस यूपी में बीजेपी, निषाद पार्टी, सुभाजपा और आरएलडी को उनकी मांग के मुताबिक सीटें देने के मूड में नहीं है, वहां एक नया बटाईदार पार्टी को क्यों ही पसंद आएगा? यह अब तक तो तय नहीं है। पता चला है कि मामला सीटों को लेकर ही फंस सकता है। लेकिन चिराग अपनी ओर से पूरा जोर लगा रहे हैं। माहौल बनाने के लिए कॉन्सर्ट नुमा कार्यक्रमों के आयोजन किए जा रहे हैं। स्टूडेंट्स को संवाद के जरिए जोड़ने की कोशिश हो रही है।

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