Amartya Sen Birthday: भूख और गरीबी पर जिसने नई कहानी गढ़ी, अमर्त्य सेन का 92वां जन्मदिन आज

Amartya Sen Birthday
Creative Commons licenses/Wikimedia Commons

नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन आज यानी 03 नवंबर को अपना 92वां जन्मदिन मना रहे हैं। बता दें कि अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले वह पहले एशियाई हैं। साल 1998 में नोबेल पुरस्कार पाने के बाद अमर्त्य सेन को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था।

नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन आज यानी 03 नवंबर को अपना 92वां जन्मदिन मना रहे हैं। बता दें कि अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले वह पहले एशियाई हैं। साल 1998 में नोबेल पुरस्कार पाने के बाद अमर्त्य सेन को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था। अमर्त्य सेन ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा भारत के बाहर बिताया था। हालांकि उनका काम हमेशा से भारत और अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की गरीबी और इसको दूर करने के तरीके पर केंद्रित रहा। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन में 03 नवंबर 1933 को अमर्त्य सेन का जन्म हुआ था। उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से पूरी की। इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज बीए, एमए और पीएचडी की डिग्री हासिल की।

अर्थशास्त्र और फिलॉसफी के प्रोफेसर

अमर्त्य सेन ने भारत और इंग्लैंड के कई विश्वविद्यालयों में अर्थशास्त्र पढ़ाया। इनमें जादवपुर विश्वविद्यालय, दिल्ली यूनिवर्सिटी, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और लंदन यूनिवर्सिटी शामिल हैं। इसके बाद अमर्त्य सेन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी चले गए और फिर साल 1998 में उनको ट्रिनिट्री कॉलेज, कैंब्रिज का मास्टर नियुक्त किया गया। अमर्त्य सेन साल 2004 तक इस पद पर रहे। इसके बाद अमर्त्य सेन लामोंट विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के रूप में फिर से हार्वर्ड लौट आए।

भूख पर लिखी नई कहानी

इसके साथ ही अमर्त्य सेन को अकाल के कारण पर भी काम करने के लिए जाना जाता है। जिसकी वजह भोजन की वास्तविकता या अनुमानित कमी के असर को सीमित करने या रोकने के लिए प्रैक्टिकल सॉल्यूशन विकसित करने में सफलता मिली। अकाल से अमर्त्य सेन का अपना पर्सनल जुड़ाव भी था। क्योंकि उन्होंने साल 1943 में बंगाल के अकाल को काफी करीब से देखा था। इस दौरान लाखों लोग मारे गए थे। इस अकाल पर अमर्त्य सेन का मानना था कि उस समय भारत में खाने-पीने की चीजों की पर्याप्त सप्लाई थी। लेकिन खाने-पीने की चीजों के डिस्ट्रीब्यूशन में समस्या थी।

नोबेल पुरस्कार

अमर्त्य सेन को साल 2012 में फ्रांस के लीजन डी'होनर और साल 1999 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा पांच महाद्वीपों के संस्थानों से 100 से ज्यादा मानद उपाधियों सहित शीर्ष नागरिक सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं। साल 1998 में अमर्त्य सेन को अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में उनके कल्याणकारी अर्थशास्त्र में नैतिकता के लिए काम करने, थिओरिटिकल फील्ड और सोशल चॉइस थ्योरी, गरीबी और कल्याण के माप की समझ को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक विज्ञान में पुरस्कार दिया गया।

All the updates here:

अन्य न्यूज़