Atalji वाली गलती नहीं दोहराना चाहते PM Modi, NDA Meeting में जो कुछ हुआ उससे 2024 के लिए बड़ा संदेश गया है

जिस तरह कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने 26 दलों का मोर्चा खड़ा कर दिया है उससे भाजपा पर दबाव बढ़ गया है कि वह अपने सहयोगियों को एकजुट रखे और अपने गठबंधन का भी विस्तार करे। दरअसल मोदी 2004 में अटलजी वाली गलती नहीं करना चाहते।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को अटलजी की विरासत करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह राजग की बैठक में इस गठबंधन को बनाने और इसके विस्तार में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडीस, रामविलास पासवान, प्रकाश सिंह बादल, बाला साहेब ठाकरे और चौधरी अजित सिंह आदि के योगदान को याद किया और जिस तरह उन्होंने अपने सभी गठबंधन सहयोगियों को महत्व दिया वह दर्शा रहा है कि भाजपा बड़े भाई की भूमिका को साइड में रख कर चुनावी बेला में सहयोगियों को भी पूरी तरह साथ लेकर आगे बढ़ेगी। चौधरी अजित सिंह, प्रकाश सिंह बादल और बाला साहेब ठाकरे को याद कर प्रधानमंत्री ने उनकी पार्टियों को चला रहे उनके बेटों को भी एक तरह से साथ आने का राजनीति संदेश दे दिया है।
इसके अलावा, जिस तरह कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने 26 दलों का मोर्चा खड़ा कर दिया है उससे भाजपा पर दबाव बढ़ गया है कि वह अपने सहयोगियों को एकजुट रखे और अपने गठबंधन का भी विस्तार करे। दरअसल मोदी 2004 में अटलजी वाली गलती नहीं करना चाहते। उस समय तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष एम. वेंकैया नायडू, वरिष्ठ नेता प्रमोद महाजन तथा अन्य जो भी लोग भाजपा का चुनाव अभियान देख रहे थे उन्होंने एनडीए छोड़कर जाने वाले दलों को मनाने में रुचि नहीं दिखाई थी जबकि 2004 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का गठन कर तमाम क्षेत्रीय दलों को अपने साथ लिया। इसमें कई ऐसे दल भी शामिल थे जोकि पहले राजग के साथ थे। यूपीए ने क्षेत्रीय दलों के सहारे जो चुनावी अभियान चलाया उसके चलते उसने एनडीए को सत्ता से बाहर कर दिया था। अब 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले भी कांग्रेस 2004 वाला प्रयोग दोहराने की कोशिश कर रही है इसलिए मोदी और भाजपा सतर्क हैं। वैसे भी मोदी गलतियों से सबक लेने वाले नेता हैं। वह कहते भी हैं कि मुझसे गलती हो सकती है लेकिन मेरी नीयत गलत नहीं है। राजग की बैठक में इस बात की झलक दिखी भी। मोदी ने सभी सहयोगियों के मन की आशंकाओं को दूर कर उनमें नया विश्वास भर दिया है साथ ही अपनी भूलों के लिए सहयोगियों से अप्रत्यक्ष रूप से क्षमा भी मांग ली है।
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राजग का प्रस्ताव
इस बैठक में पारित प्रस्ताव की बात करें तो आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने जोर देकर कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ेगा और लगातार तीसरी बार ‘प्रचंड बहुमत’ के साथ सत्ता में वापसी करेगा। राजग के घटकों ने देश के विकास की सराहना की और बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर मोदी के नेतृत्व में अपना विश्वास व्यक्त किया। सत्तारुढ़ गठबंधन द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया, ''राजग की बैठक में 39 दलों ने हिस्सा लिया और दावा किया कि विपक्ष के सामने पहचान और प्रासंगिकता का संकट है।’’ प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘आज, विपक्ष भ्रमित और भटका हुआ है।’’ इसमें कहा गया है कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में मोदी पर करोड़ों भारतीयों का अटूट भरोसा है। राजग ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में 2014 के लोकसभा चुनावों में उसे (गठबंधन को) लोगों से जो आशीर्वाद मिला, वह 2019 के चुनावों में ‘कई गुना’ बढ़ गया।
भाजपा-नीत गठबंधन ने कहा, ‘‘देश विपक्षी दलों के झूठ, अफवाहों और बेबुनियाद आरोपों को खारिज करते हुए, राजग गठबंधन के नेतृत्व में विश्वास जता रहा है।’’ घटक दलों ने कहा, ‘‘राजग में शामिल सभी दलों को 2019 में मिले जनादेश से भी बड़ा जनादेश 2024 में हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरा भरोसा है।’’ हम आपको बता दें कि बैठक में शिवसेना अध्यक्ष और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने प्रस्ताव पेश किया, जबकि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के के. पलानीस्वामी और असमगण परिषद (एजीपी) के अतुल बोरा ने इसका समर्थन किया। प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘राजग के सभी घटक दलों ने संकल्प लिया कि वह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एकजुट होकर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे और वह लगातार तीसरी बार भारी बहुमत के साथ देश के प्रधानमंत्री बनेंगे।’’ प्रस्ताव के मुताबिक पिछले नौ वर्षों में, राजग सरकार ने सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण (सेवा, सुशासन और गरीबों का कल्याण) के दृष्टिकोण को सही मायने में साकार किया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि सुशासन और विकास की इस यात्रा में सभी वर्गों, क्षेत्रों और समुदायों की भागीदारी रही।
इसमें कहा गया, ‘‘चाहे वह अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार हो या मोदी के नेतृत्व वाली सरकार, इसने हमेशा क्षेत्रीय आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए काम किया है। प्रस्ताव में मोदी सरकार के गरीब-समर्थक उपायों की सराहना की गई, जिससे गरीबी में भारी कमी आई है। घटक दलों ने कहा कि राजग सरकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। गरीबों को सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रस्ताव में कहा गया कि राजग के कार्यकाल में दलित रामनाथ कोविंद और आदिवासी द्रौपदी मुर्मू को देश का राष्ट्रपति बनाया गया।
प्रधानमंत्री के संबोधन की बड़ी बातें
दूसरी ओर, बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से दिये गये संबोधन की बात करें तो आपको बता दें कि उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को क्षेत्रीय आकांक्षाओं का ऐसा खूबसूरत ‘इंद्रधनुष’ करार दिया जो देशवासियों के लिए समर्पित है और कहा कि वहीं इसके मुकाबले के लिए बना विपक्षी दलों का गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव एलायंस (इंडिया)’ मजबूरी का गठबंधन है, जो भ्रष्टाचार और परिवारवाद की नीति पर आधारित है।
राजधानी दिल्ली के एक पंचसितारा होटल में मंगलवार को राजग के 39 घटक दलों की एक बैठक के बाद उसके नेताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि जब गठबंधन जातिवाद और क्षेत्रवाद को ध्यान में रखकर किया गया हो तो वह (गठबंधन) देश का बहुत नुकसान करता है। विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए मोदी ने दावा किया कि भारत के लोगों का भरोसा राजग पर है और यह बात दुनिया के अन्य प्रमुख देशों को भी पता है कि भारत में जनमत राजग के साथ है, इसलिए वे सरकार के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर रहे हैं, भारत को सम्मान दे रहे हैं और उसके साथ तमाम दूरगामी समझौते कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद राजग की सरकार बनने का दावा किया और कहा कि इसके बाद भारत की अर्थव्यस्था का दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंचना तय है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, ‘‘राजग एक प्रकार से क्षेत्रीय आकांक्षाओं का बहुत ही खूबसूरत इंद्रधनुष है। राजग देश के लिए, देश के लोगों के लिए समर्पित है। राजद की विचारधारा राष्ट्र सर्वप्रथम, देश की सुरक्षा और उसकी प्रगति सर्वप्रथम है और लोगों का सशक्तीकरण सर्वप्रथम है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारी नीयत साफ है, नीति स्पष्ट है और निर्णय ठोस है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि जो भी गठबंधन ‘नकारात्मकता’ के साथ बनता है, वह कभी सफल नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का गठन देश में राजनीतिक स्थिरता लाने के लिए हुआ था। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जब गठबंधन सत्ता की मजबूरी का हो, जब गठबंधन भ्रष्टाचार की नीयत से हो, जब गठबंधन परिवारवाद की नीति पर आधारित हो, जब गठबंधन जातिवाद और क्षेत्रवाद को ध्यान में रखकर किया गया हो तो ऐसा गठबंधन देश का बहुत नुकसान करता है।’’ मोदी ने कहा कि देश में राजनीतिक गठबंधनों की एक लंबी परंपरा रही है, लेकिन जो भी गठबंधन नकारात्मकता के साथ बने वह कभी भी सफल नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 90 के दशक में देश में अस्थिरता लाने के लिए गठबंधनों का इस्तेमाल किया तथा कांग्रेस ने ‘सरकारें बनाईं और सरकारें बिगाड़ीं’।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में जब स्थिर सरकार होती है तो देश ऐसे फैसले करता है जो कालजई होते हैं और देश की दिशा बदलने वाले होते हैं। उन्होंने कहा कि यह देश ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान देखा और पिछले नौ वर्षों में भी बार-बार देखा है। उन्होंने कहा, ‘‘राजग जब विपक्ष में था तब भी उसने हमेशा सकारात्मक राजनीति की। हमने कभी नकारात्मक राजनीति का रास्ता नहीं चुना। हमने लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अपना हर दायित्व निभाया। हमने विपक्ष में रहकर सरकारों का विरोध किया, उनके घोटालों को सामने लाने का काम किया, लेकिन कभी जनादेश का अपमान नहीं किया। हमने सरकारों का विरोध करने के लिए कभी भी विदेशी मदद नहीं मांगी। हम विपक्ष में रहे, लेकिन हमने देश के विकास में रोड़े नहीं अटकाए और न ही रुकावट बने।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश की जनता देख रही है राजग में और विपक्षी गठबंधन में कौन-कौन से दल हैं।
प्रधानमंत्री ने 2014 से पहले की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की याद दिलाते हुए कहा कि उस दौर में तमाम उठापटक हुए थे, प्रधानमंत्री के ऊपर एक आलाकमान था, नीतिगत पंगुता थी, निर्णय लेने में अक्षमता थी और भांति-भांति के सत्ता के केंद्र थे, जिनमें अव्यवस्था और अविश्वास का माहौल था। उन्होंने कहा, ‘‘हम सब भाग्यशाली हैं कि राजग की स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। हमारे लिए गठबंधन मजबूरी का नहीं, बल्कि मजबूती का माध्यम है। राजग मजबूरी का नहीं योगदानों का प्रतीक है। राजग में कोई भी राजनीतिक दल बड़ा और कोई भी राजनीतिक दल छोटा नहीं है।’’ विपक्षी दलों पर देश के लोगों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए मोदी ने दावा किया कि विपक्ष में शामिल नेता देश के सामान्य जन की समझदारी को कम आंकने की गलती बार-बार दोहरा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘देश की जनता सब कुछ खुली आंखों से देख भी रही है और समझ भी रही है। जनता देख रही है कि ये दल क्यों इकट्ठा हो रहे हैं। जनता यह भी जान रही है कि वह कौन सा गोंद है जो इन लोगों को जोड़ रहा है। किस तरह छोटे-छोटे स्वार्थ के लिए मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता किया जा रहा है।’’ उन्होंने केरल में वामदलों और कांग्रेस की प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों की लड़ाई का उल्लेख किया और कहा कि यही हाल अन्य राज्यों में विपक्षी दलों का है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए देश के लोग कह रहे हैं कि यह गठबंधन मिशन नहीं, मजबूरी है...और देश की जनता देख रही है... इनकी नूरा कुश्ती हो या मजबूरी, यह हकीकत 140 करोड़ देशवासियों के सामने आ चुकी है।’’ प्रधानमंत्री ने दावा किया कि अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए ये लोग पास-पास तो आ सकते हैं, लेकिन साथ नहीं आ सकते, क्योंकि इन्हें अपने कार्यकर्ताओं की भी परवाह नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘ये अपने कार्यकर्ताओं से उम्मीद करते हैं कि जीवन भर जिसका विरोध किया, (वे लोग) उसका अचानक सत्कार करने लगें। अब ऐसे में इन दलों के कार्यकर्ता खुद भ्रमित हैं कि करें तो क्या करें। मैं तो आज यह भी कहूंगा कि जो लोग मोदी को कोसने के लिए इतना समय लगा रहे हैं, अच्छा होता वह देश के लिए सोचने में, गरीब के लिए सोचने में अपना समय लगाते। हम उनके लिए सिर्फ प्रार्थना ही कर सकते हैं।’’ प्रधानमंत्री ने दावा किया कि देश के लोग मन बना चुके हैं कि तीसरी बार फिर राजग को ही अवसर देना है।
उन्होंने कहा, ‘‘देश का मन आप जानते हैं, लेकिन विदेश का मन भी बहुत कुछ संकेत दे रहा है। सबको पता है देश में चुनाव होने वाले हैं फिर भी अनेक महत्वपूर्ण देश चाहे अमेरिका हो या फ्रांस अथवा ऑस्ट्रेलिया, जापान हो या यूएई, सभी सरकार के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर रहे हैं। तमाम देश भारत को सम्मान दे रहे हैं।’’ उहोंने कहा, ‘‘कितने ही देश भारत के साथ बड़े-बड़े और दूरगामी समझौते कर रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि वह भी जानते हैं कि भारत के लोगों का भरोसा राजग पर है। यानी भारत में जनमत किसके साथ है यह दुनिया के देशों को भी पता है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि राजग का विस्तार सिर्फ संख्या या भौगोलिक विस्तार नहीं है, बल्कि जनता इसका इतिहास और इसके दलों के बीच का सामंजस्य भी देख रही है। उन्होंने कहा, ‘‘तभी तो हमारा गणित भी बड़ी आसानी से जुड़ता है। आप देखिए 2014 में राजग को देश ने लगभग 38 प्रतिशत वोट दिए थे, लेकिन 2019 में हमारे सेवा भाव को देखते हुए देश ने हमें 45 प्रतिशत वोट दिए। सहयोगी दल जो मेहनत कर रहे हैं, उससे तय है कि 2024 में राजग का वोट शेयर 50 प्रतिशत से भी ऊपर जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि 1988 में राजग का गठन हुआ था, लेकिन सिर्फ सरकारें बनाना और सत्ता हासिल करना इसका लक्ष्य नहीं था।
उन्होंने कहा, ‘‘राजग किसी के विरोध में नहीं बना था, राजग किसी को सत्ता से हटाने के लिए नहीं बना था। राजग का गठन देश में स्थिरता लाने के लिए हुआ था। जब किसी देश में एक स्थिर सरकार होती है, तो देश एक साहसिक निर्णय लेता है, जो देश के फलसफा को बदल देता है।’’ मोदी ने कहा कि हाल ही में राजग के गठन के 25 साल पूरे हुए हैं और ये 25 वर्ष विकास तथा क्षेत्रीय आकांक्षाओं की पूर्ति के रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजग का मतलब राज्यों के विकास के माध्यम से देश का विकास है। उन्होंने कहा, ‘‘नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (राजग) में एन का अर्थ ‘न्यू इंडिया’, डी का अर्थ ‘डेवलप्ड नेशन’ और ए का अर्थ है ‘लोगों की आकांक्षा’। आज युवा, महिलाएं, मध्यम वर्ग, दलित और वंचित लोग राजग पर भरोसा करते हैं।’’ प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर यह भी कहा कि राजनीति में प्रतिस्पर्धा हो सकती है, लेकिन शत्रुता नहीं होती है, क्योंकि आखिरकार सभी एक ही देश के लोग हैं और एक ही समाज का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन दुर्भाग्य से आज विपक्ष ने अपनी एक ही पहचान बना ली है। हमें गाली देना, हमें नीचा दिखाना। बावजूद इसके राजग ने हमेशा देश को दलों के हित से ऊपर रखा। हमने राजनीतिक सौहार्द और शालीनता को बनाए रखने का प्रयास किया।’’
राजग सहयोगियों का जोरदार स्वागत
हम आपको यह भी बता दें कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों के नेताओं का बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। राजग के नेता जैसे ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, ढोल और नगाड़ों की थाप के बीच फूलों के गुलदस्ते और शॉल के साथ उनका स्वागत किया गया। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और अन्य ने राजग नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, शिवसेना नेता एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एवं अन्नाद्रमुक नेता ईके पलानीस्वामी, नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। कार्यक्रम स्थल पर प्रधानमंत्री ने राजग नेताओं का अभिवादन किया और उनसे मुलाकात की। मोदी ने लोजपा (राम विलास) नेता चिराग पासवान को गले लगाया। इससे पहले चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री का अभिवादन किया और उनके पैर छुए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के बागी नेता अजित पवार, शिंदे और पलानी स्वामी एक समूह-फोटो सत्र के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ पहली पंक्ति में खड़े थे। वे बैठक में एक ही पंक्ति में बैठे थे। हम आपको बता दें कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान यह राजग की इस स्तर की पहली बैठक है।
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