Arunachal Pradesh में 'सियांग महा-परियोजना' के खिलाफ उग्र विरोध: पुलिस-प्रदर्शनकारी झड़प में 4 महिलाएं घायल, कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग, सीएम खांडू ने की शांति की अपील

Pema Khandu
ANI
रेनू तिवारी । Oct 24 2026 12:03PM

स्थिति को बेकाबू होते देख भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। यह घटना सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों के विभिन्न हिस्सों में बुलाए गए 12 घंटे के बंद के दौरान घटी। प्रभावित इलाकों में व्यावसायिक प्रतिष्ठान और दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' (SUMP) को लेकर तनाव काफी बढ़ गया है। 23 अक्टूबर को परियोजना का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस बलों के बीच हुई हिंसक झड़प में कम से कम चार महिलाएं घायल हो गईं। स्थिति को बेकाबू होते देख भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। यह घटना सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों के विभिन्न हिस्सों में बुलाए गए 12 घंटे के बंद के दौरान घटी। प्रभावित इलाकों में व्यावसायिक प्रतिष्ठान और दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

यह टकराव सियांग जिले के गेकू के पास 'डाइट-डाइम' (Dite-Dime) में हुआ, जहां बंद के समर्थन में लगभग 150-200 प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए थे। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया। सियांग के पुलिस अधीक्षक (SP) कामदाम सिखोम ने बताया कि अपर सियांग जिले के गेकू और कोमकार इलाकों से आए प्रदर्शनकारी सुबह करीब 7 बजे घटनास्थल पर जमा हुए थे।

उन्होंने कहा कि भीड़ ने बैरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश की और निषेधाज्ञा (prohibitory orders) का उल्लंघन किया, जिसके बाद एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट (executive magistrate) की मौजूदगी में पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। एक अन्य पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि चार महिलाएं घायल हुई हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कई लोगों को आंसू गैस के गोले लगे, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई।

इस बंद के कारण प्रभावित इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा; दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे और लोग ज्यादातर अपने घरों के अंदर ही रहे। अधिकारियों ने बताया कि सियांग और अपर सियांग जिलों के बाकी हिस्सों में बंद शांतिपूर्ण रहा।

प्रदर्शनकारियों ने कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की

यह बंद संयुक्त रूप से 'आदि बाने केबांग यूनाइटेड', 'SUMP अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन', 'सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम यूथ विंग' और 'आदि गैलो वेलफेयर सोसाइटी' द्वारा बुलाया गया था। इन संगठनों ने गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई, निलंबित 'गांव बुरा' (गांव के मुखिया) को बहाल करने, परियोजना के लिए चल रही शुरुआती गतिविधियों (pre-feasibility activities) को रोकने और इलाके में तैनात अर्धसैनिक बलों व केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाने की मांग की है।

जिन कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की गई है, उनकी संख्या के बारे में अलग-अलग जानकारी मिल रही है। विरोध प्रदर्शन के आयोजकों ने स्थानीय समुदायों, जमीन, आजीविका और पर्यावरण पर इस परियोजना के पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने लोगों से परियोजना के मूल्यांकन में सहयोग करने की अपील की
विरोध प्रदर्शनों के बीच, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने निवासियों से आग्रह किया कि वे नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) द्वारा परियोजना की 'प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट' (PFR) तैयार करने के काम में सहयोग करें।

खांडू ने सियांग क्षेत्र के लोगों से अपील की कि वे हिंसा का सहारा लेने के बजाय राज्य सरकार और उसके नेतृत्व से जानकारी मांगें। सरकार ने इस परियोजना को एक रणनीतिक पहल बताया है, जिसका उद्देश्य सियांग बेसिन में पानी के बहाव को नियंत्रित करने में मदद करना है।

सरकार ने इस परियोजना के रणनीतिक महत्व को तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर चीन की प्रस्तावित मेगा जलविद्युत परियोजना से भी जोड़ा है। प्रस्तावित परियोजना की क्षमता लगभग 11,200 मेगावाट होने की बात कही गई है, हालांकि कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा 11,500 मेगावाट बताया गया है।

कांग्रेस ने सर्वेक्षण रोकने की मांग की
पूर्व सांसद ताकम संजॉय के नेतृत्व वाली अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) ने इस प्रस्तावित परियोजना का विरोध किया है और 'प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट' के लिए किए जा रहे फील्ड सर्वेक्षणों को अस्थायी रूप से रोकने की मांग की है।

पार्टी ने प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षा बलों को हटाने, हिरासत में लिए गए 'आदि' (Adi) समुदाय के सामाजिक कार्यकर्ताओं को रिहा करने, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने, और परियोजना का विरोध करने वाले ग्राम प्रमुखों तथा सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई को रद्द करने की मांग की है।

कांग्रेस ने 350 करोड़ रुपये के प्रस्तावित 'विशेष विकास पैकेज' पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का तर्क है कि विकास कार्यों का उद्देश्य प्रभावित समुदायों का भरोसा जीतना होना चाहिए, न कि परियोजना के लिए उनकी सहमति हासिल करना।

चीन की जलविद्युत योजनाओं को लेकर जताई गई चिंताओं को स्वीकार करते हुए भी, पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर स्थानीय लोगों से परामर्श करने और उनके अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

इन अलग-अलग दृष्टिकोणों ने प्रस्तावित परियोजना को लेकर बहस तेज कर दी है। जहां सरकार इसके रणनीतिक महत्व पर जोर दे रही है, वहीं विरोध करने वाले पक्ष व्यापक परामर्श, स्थानीय हितों की सुरक्षा और परियोजना की तैयारी से जुड़े कार्यों को रोकने की मांग कर रहे हैं।

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