Bombay High Court: पटाखों की बिक्री पर रोक नहीं, लेकिन सार्वजनिक स्थानों और DJ पर पाबंदी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने त्योहारों पर प्रदूषण रोकने के लिए सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने, डीजे और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। हालांकि, आजीविका के मद्देनजर पटाखों के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। अदालत ने प्रशासन को एक हफ्ते में नियम बनाने और ग्रीन पटाखों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया।
दीवाली और अन्य त्योहारों के दौरान होने वाले शोर और वायु प्रदूषण को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए, बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को राज्य भर में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने पर रोक लगाने का निर्देश दिया। हालांकि, पटाखों के निर्माण या बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान, जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने डीजे, लाउडस्पीकर, डॉल्बी साउंड सिस्टम और लेजर लाइट के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने प्रशासन को एक हफ्ते के भीतर नियम बनाने और उन्हें सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।
इसे भी पढ़ें: 'न्यायपालिका को कोई दबाव में नहीं डाल सकता’, CJI Surya Kant की सख्त टिप्पणी से राहुल गांधी की राजनीतिक शैली पर उठे गंभीर सवाल
बॉम्बे हाई कोर्ट ने त्योहारों के दौरान होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर चिंता जताई
जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला के. गोखले ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए त्योहारों के दौरान होने वाले ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने को लेकर चिंता जताई।
पिछले महीने गणेशोत्सव के दौरान, हाई कोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर रोक लगा दी थी और "बहुत अधिक ध्वनि प्रदूषण" को नियंत्रित करने के लिए कई निर्देश जारी किए थे।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान, जजों ने कहा कि "हानिकारक प्रदूषण" का असर वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों समेत अन्य लोगों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि दिवाली के बाद स्थिति "असहनीय" हो जाती है, जिसे बदलने की जरूरत है क्योंकि "अब समय बदल गया है।"
इसे भी पढ़ें: यह सरकार बदलने की लड़ाई है, और हम इसे करके दिखाएंगे: Prashant Bhushan ने कर दिया बड़ा ऐलान
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कई लोगों की आजीविका पटाखों के निर्माण और बिक्री पर निर्भर है
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कई गरीब परिवारों की आजीविका पटाखों के निर्माण और बिक्री पर निर्भर है; इसलिए, इस व्यापार पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा रहा है। हालांकि, यह प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि वह सुनिश्चित करे कि पटाखे केवल तय की गई और उपयुक्त जगहों पर ही फोड़े जाएं।
कोर्ट ने प्रशासन को एक व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया, जिसमें 'ग्रीन' (पर्यावरण के अनुकूल) पटाखों के इस्तेमाल और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए दिवाली मनाने को बढ़ावा दिया जाए। कोर्ट ने इसके लिए मशहूर हस्तियों की मदद लेने का सुझाव भी दिया। हाई कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि ये निर्देश केवल इस साल की दिवाली तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि भविष्य में भी इनका प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्य सरकार, बीएमसी (BMC) और एमपीसीबी (MPCB) एक हफ्ते के भीतर जागरूकता अभियान शुरू करें। इसमें स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित करना, सार्वजनिक घोषणाएं करना और ट्रेनों व बसों में जागरूकता बोर्ड लगाना शामिल है। कोर्ट ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे नागरिकों को 'ग्रीन' (कम प्रदूषण फैलाने वाले) पटाखों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करें और पटाखे फोड़ने के लिए एक सीमित समय तय करने पर जोर दें।
अन्य न्यूज़













