• भारतीय सीमा के पास पहुंची चीन की 'बुलेट', रणनीतिक रूप से अहम है ये प्रोजक्ट

अभिनय आकाश Jun 26, 2021 16:25

तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में पहले विद्युत चालित रेलवे की शुक्रवार सुबह से शुरुआत हुई जो लहासा से नियंगची तक गई जहां “फूक्सिंग” बुलेट ट्रेनों का पठारी क्षेत्र में आधिकारिक परिचालन शुरू हुआ। सिचुआन-तिब्बत रेलवे किंगहाई-तिब्बत रेलवे के बाद तिब्बत में दूसरी रेलवे होगी।

चीन ने 1950 के दशक में तिब्बत पर कब्जा किया और तब से अबतक तिब्बत कि स्वतंत्रतता चीन की तानाशाही के आगे नतमस्तक है। वही तिब्बत भारत के खिलाफ चीन का रणनीतिक सामरिक गोल पोस्ट हो गया है। चीन ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिमालय के तिब्बती क्षेत्र में अपनी पहली इलेक्ट्रानिक बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया। ये ट्रेन तिब्बत की राजधानी ल्हासा  से नींगची को जोड़ेगी। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का शताब्दी समारोह 1 जुलाई को है और उससे ठीक पहले 435 किलोमीटर से लंबे रेल रूट पर बुलेट ट्रेन को शुरू कर दिया गया है। ये तिब्बत में चीन का पहला बिजली से चलने वाला प्रोजेक्ट है। 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन के रास्ते में 9 स्टेशन बनाए गए हैं। यात्री सवारियां ढोने के साथ-साथ ये बुलेट ट्रेन फ्रेड ट्रांसपोर्टेशन के भी काम करेगी। 

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बुलेट ट्रेन की खास बातें

  • तिब्बत पहुंची बुलेट ट्रेन करीब 47 सुरंगों से होकर गुजरेगी।
  • ब्रह्मपुत्र नदी जिसे yarlung zangbo कहा जाता है उस पर ये 121 पुलों को 16 बार पार करेगी। 
  • बुलेट ट्रेन के रेलवे ट्रैक की कुल लंबाई का 75 फीसदी केवल सुंरगे और पुल ही हैं।  
  • साल भर में 10 मिलियन टल माल ढोने की क्षमता है। 

तिब्बत में दूसरा रेलवे प्रोजक्ट

सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’कि खबर के अनुसार तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में पहले विद्युत चालित रेलवे की शुक्रवार सुबह से शुरुआत हुई जो लहासा से नियंगची तक गई जहां “फूक्सिंग” बुलेट ट्रेनों का पठारी क्षेत्र में आधिकारिक परिचालन शुरू हुआ। सिचुआन-तिब्बत रेलवे किंगहाई-तिब्बत रेलवे के बाद तिब्बत में दूसरी रेलवे होगी। यह किंगहाई-तिब्बत पठार के दक्षिण-पूर्व क्षेत्र से होकर गुजरेगी जो विश्व के भूगर्भीय रूप से सबसे सक्रिय क्षेत्रों में से एक है। 

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चीन के लिए रणनीतिक रूप से अहम ये प्रोजक्ट

नींगची भारत के अरुणाचल बॉर्डर से बिल्कुल करीब है। समुद्र तल से 2950 मीटर ऊंचे निचेई रेलवे स्टेशन तक पहुंची बुलेट ट्रेन को चीन ने सामरिक अहमियत के चलते ही चलाया है। ये बात खुद वहां के एक्सपर्ट मानते हैं। चीन अरूणाचल को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है। 3400 किलोमीटर से अधिक के एलएसी पर पड़ने वाले इस क्षेत्र में भारत के बड़ी सामरिक चुनौती खड़ी करता है। नवंबर 2020 में जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ल्हासा नींगची रेल प्रोजेक्ट को जल्द शुरू पूरा करने का आदेश जारी किया था। तब उन्होंने साफ कहा था कि ये रेल लाइन बॉर्डर पर स्थिरता के लिए है।