भारतीय बैंक ग्राहकों के फोन हैक करने के लिए तकनीकी टूल किराए पर दे रहा 'Mr Robot' सिंडिकेट

भारतीय बैंक ग्राहकों के फोन हैक करने के लिए तकनीकी टूल किराए पर दे रहा 'Mr Robot' सिंडिकेट
प्रतिरूप फोटो
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साइबर सुरक्षा फर्म क्लाउडसेक ने भारतीय बैंक ग्राहकों को निशाना बनाने वाले एक नए साइबर गिरोह का खुलासा किया है। यह गिरोह एंड्रॉइड मैलवेयर-एज-ए-सर्विस मॉडल पर काम करता है और अपराधियों को कॉल फॉरवर्डिंग व ओटीपी चुराने वाले टूल्स मुहैया कराता है। जांच में सामने आया कि यह सिंडिकेट बैंकिंग और चालान जैसे करीब छत्तीस फर्जी ऐप के जरिए लोगों को ठग रहा है।

साइबर सुरक्षा कंपनी ‘क्लाउडसेक’ ने ‘मिस्टर रोबोट’ नामक एक नए साइबर आपराधिक गिरोह का पता लगाया है जो भारतीय बैंक ग्राहकों के मोबाइल फोन को हैक करने और उनके पैसे चुराने के लिए तकनीकी उपकरण किराये पर दे रहा है। ‘क्लाउडसेक’ ने अपने एक ब्लॉग में बताया है कि उसके शोधकर्ताओं को पता चला है कि ‘मिस्टर रोबोट’ का अपना एक एडमिन ऐप है। यह गिरोह कई जालसाजों को ऐसे ‘क्राइमवेयर’ (अपराध में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर) किराए पर देता है जिनकी मदद से वे बैंकिंग ग्राहकों के फोन में खतरनाक ऐप इंस्टॉल कर देते हैं।

कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘‘क्लाउडसेक के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे ऐप की जांच शुरू की जो किसी सरकारी बैंक के ऐप जैसा दिख रहा था। जांच के दौरान उन्हें ‘मिस्टर रोबोट’ के बारे में पता चला। यह एक ऐसा ‘एंड्रॉइड मैलवेयर-एज-ए-सर्विस’ ऑपरेशन है जिसके बारे में पहले जानकारी नहीं थी और यह भारतीय बैंकों के ग्राहकों को निशाना बनाता है।’’ साइबर अपराधी इस ‘क्राइमवेयर’ का इस्तेमाल करके फोन में ऐप इंस्टॉल करते हैं जिसके बाद उस ऐप का आइकन (स्क्रीन से) गायब हो जाता है।

‘क्लाउडसेक’ ने बताया, ‘‘इसके बाद ग्राहक को मिलने वाला हर ओटीपी सीधे जालसाजों के डैशबोर्ड पर पहुंच जाता है। बैंक से आने वाली कॉल भी चुपचाप किसी दूसरे नंबर पर फॉरवर्ड हो जाती हैं।’’ ब्लॉग के अनुसार, इस मैलवेयर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह आसानी से पकड़ में न आए। यह कम से कम 48 घंटों तक निष्क्रिय रहता है ताकि स्वचालित सुरक्षा जांच से बच सके।

इसके अलावा, इसकी हर कॉपी में एक नया डिजिटल हस्ताक्षर होता है जिससे सुरक्षा उपकरण पुराने संस्करणों (वर्जन) से मिलान करके नए संस्करणों को रोक नहीं पाते। इस बॉट की सूची में लोगों को झांसा देने के लिए बनाए गए करीब 36 ऐप शामिल हैं। इनमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के नौ बैंकों के फर्जी ऐप, गैस, पानी और बिजली के बिलों के भुगतान से जुड़े ऐप तथा यातायात जुर्माना वसूलने वाले फर्जी ‘आरटीओ चालान’ पेज शामिल हैं।

ये पेज लोगों से पैन कार्ड और अन्य निजी जानकारियां जुटाने के एवज में नौ से 10 रुपये का शुल्क मांगते हैं। इंस्टॉल हो जाने पर यह मैलवेयर आने वाले एसएमएस को पढ़ लेता है और ओटीपी चुरा लेता है। ‘क्लाउडसेक’ के शोधकर्ताओं ने पाया कि इनमें से 58 प्रतिशत पीड़ितों के फोन पर कॉल फॉरवर्डिंग की सुविधा सक्रिय थी और मई में एक ही बार में 149 फोन इस मैलवेयर से प्रभावित पाए गए थे।

ब्लॉग के अनुसार, ज्यादातर पीड़ितों के पास किफायती एंड्रॉयड फोन थे जिनमें भारत की चारों प्रमुख दूरसंचार कंपनियों के सिम कार्ड लगे हुए थे।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


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