Mumbai Tilak Bhavan में पुलिस के घुसने का Congress ने लगाया आरोप, प्रशासन का इनकार

महाराष्ट्र में दादर स्थित तिलक भवन से प्रदर्शनकारी आदिवासी छात्रों और एनएसयूआई सदस्यों को हिरासत में लिए जाने के दावे पर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने पुलिस पर जबरन मुख्यालय में घुसने का आरोप लगाते हुए रिहाई की मांग की, जबकि पुलिस ने कार्यालय से किसी भी गिरफ्तारी से साफ इनकार किया है।
मुंबई, पांच अक्टूबर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रविवार को मध्यरात्रि के बाद मुंबई स्थित पार्टी के महाराष्ट्र मुख्यालय तिलक भवन में जबरन प्रवेश किया और प्रदर्शन करने नासिक से आए कुछ आदिवासी छात्रों तथा एनएसयूआई के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। पार्टी ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने एक वीडियो बयान में चेतावनी दी कि अगर छात्रों और एनएसयूआई पदाधिकारियों को रिहा नहीं किया गया तो पार्टी नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास का घेराव करेंगे।
हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि तिलक भवन से किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मनीष कलवानिया ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने लोक भवन (राज्यपाल आवास) तक मार्च आयोजित करने का आह्वान किया था। अधिकारी ने कहा कि लोक भवन जाने की योजना बना रहे प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग जगहों से हिरासत में लिया जा रहा है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
डीसीपी ने कहा, ‘‘दावे के विपरीत तिलक भवन से किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया।’’ सपकाल के अनुसार, अपनी विभिन्न मांगों को लेकर यहां आजाद मैदान में प्रदर्शन करने नासिक से मुंबई आए आदिवासी छात्र दादर इलाके में स्थित कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय तिलक भवन में रात में ठहरे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी रात में कांग्रेस मुख्यालय में घुसे, छात्रों को धमकाया और उनमें से कुछ को हिरासत में ले लिया। सपकाल ने दावा किया कि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सागर सालुंखे और पार्टी की युवा शाखा के मुंबई प्रमुख को गिरफ्तार कर लिया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस का इस तरह अवैध तरीके से कांग्रेस मुख्यालय में घुसना और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करना मनमानी का संकेत है। गिरफ्तार किए गए आदिवासी छात्रों और एनएसयूआई पदाधिकारियों को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने चेतावनी दी, ‘‘अगर छात्रों को रिहा नहीं किया गया तो महाराष्ट्र के सभी कांग्रेस नेता मुंबई आएंगे और ‘वर्षा’ बंगले (मुख्यमंत्री के आवास) का घेराव करेंगे।’’ कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘महाराष्ट्र की तथाकथित डबल इंजन सरकार पर शर्म आती है, जो स्पष्ट रूप से आदिवासी विरोधी है।’’ कांग्रेस की मुंबई इकाई की प्रमुख और लोकसभा सदस्य वर्षा गायकवाड़ ने देवेंद्र फडणवीस सरकार की आलोचना करते हुए पूछा कि क्या महाराष्ट्र में ‘‘संवैधानिक शासन है या जंगल राज’’। तिलक भवन पहुंचीं गायकवाड़ ने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं।
उन्होंने पूछा, ‘‘भविष्य के साथ खिलवाड़ न करें। कांग्रेस दफ्तर में घुसने की हिम्मत कैसे हुई? आपने कांग्रेस दफ्तर में पुलिस भेजी।
क्या हमें वर्षा बंगले (मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास) में घुसना चाहिए?’’ उन्होंने कहा कि फडणवीस को पुलिस कार्रवाई का आदेश देने के बजाय छात्रों से मिलना चाहिए था और उनकी मांगें सुननी चाहिए थीं। गायकवाड़ ने कहा कि हर किसी को विरोध करने का अधिकार है लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस ने तिलक भवन की घेराबंदी कर दी है और कांग्रेस कार्यालय को पुलिस छावनी में बदल दिया है।
छात्र डरने वाले नहीं हैं। वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएंगे और उन्हें इसका अधिकार है।’’ गायकवाड़ ने यह भी कहा कि छात्रों का भाजपा सरकार से विश्वास उठ गया है। उन्होंने आदिवासी छात्रों के जारी आंदोलन और पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अभ्यर्थियों के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया।
सांसद ने आरोप लगाया, ‘‘महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है। इसके अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है क्योंकि वह मुख्यमंत्री के दोस्त हैं।’’ इससे पहले, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आदिवासी छात्र आदिवासी विकास विभाग से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर मुंबई आए थे। कांग्रेस के अनुसार, आदिवासी छात्र छात्रवृत्ति, आश्रम (आवासीय) स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, छात्रावासों समेत अपनी विभिन्न मांगों के समाधान के लिए 10 दिन से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं।
इनमें से कई छात्र बसों से और पैदल मुंबई पहुंचे थे। वे अपनी समस्याओं का समाधान नहीं करने पर आदिवासी विकास मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। कांग्रेस ने दावा किया कि आदिवासी विकास मंत्री और विभाग के आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस में मामले दर्ज करने की धमकी दी गई और उन्हें लेकर आ रही एक बस को जब्त कर लिया गया।
आरोप है कि मुंबई पुलिस ने तड़के करीब तीन बजे छात्रों को रोका, उनकी तस्वीरें लीं और उन्हें हिरासत में ले लिया। सपकाल ने आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों को धमकाया और उनमें से कुछ को हिरासत में ले लिया। उन्होंने कहा, ‘‘यह गंभीर मामला है कि पुलिस पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है लेकिन वह खुद कानून का उल्लंघन कर रही है।’’ सपकाल ने कहा कि कांग्रेस आदिवासी छात्रों की आवाज दबाने की किसी भी कोशिश की अनुमति नहीं देगी और उनके जायज अधिकारों की मांग के समर्थन में पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
विपक्षी दल ने एक बयान में कहा कि धमकियों से छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और पार्टी आदिवासी छात्रों के ‘‘जायज अधिकारों के लिए संघर्ष’’ में उनके साथ खड़ी रहेगी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘‘छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने के बजाय उन्हें धमकाना और पुलिस बल का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मूल्यों को दबाने के समान है।’’ कांग्रेस ने छात्रों के खिलाफ की गई इस कथित कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने आए थे।
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