Delhi Police ने Saurabh Das और Ashutosh Ranka की 3 दिन की हिरासत मांगी, कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा

CJP Leaders
ANI
अंकित सिंह । Oct 21 2026 6:00PM

दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत तीन दिन बढ़ाने की मांग की, जिस पर SEM अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने शांति बॉन्ड उल्लंघन मामले में दखल देने से इनकार करते हुए उन्हें संबंधित अदालत जाने का निर्देश दिया था।

दिल्ली पुलिस ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रंका के लिए तीन दिन की अतिरिक्त न्यायिक हिरासत की मांग की है। इन नेताओं को बुधवार को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद, मजिस्ट्रेट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिससे इन नेताओं को अपनी हिरासत पर फैसले का इंतजार करना पड़ रहा है। यह घटनाक्रम दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उनकी हिरासत के मामले में दखल देने से इनकार करने के कुछ घंटों बाद हुआ है। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे SEM के फैसले का इंतजार करें और अगर उनकी शिकायतें दूर नहीं होती हैं, तो वे अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

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जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने दास और रंका को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। उन्होंने कहा कि 'शांति' बॉन्ड (peace bond) के कथित उल्लंघन से जुड़े "दोबारा सामने आए मामले" (repeat case) में, संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर करना सही कानूनी उपाय नहीं है। अदालत ने CJP के सह-संयोजकों से कहा कि वे पहले SEM (सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट) के समक्ष कार्यवाही आगे बढ़ाएं, जो बुधवार को इस मामले पर विचार करने वाला था। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि मजिस्ट्रेट के फैसले के बाद भी उन्हें कोई शिकायत रहती है, तो वे अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। दशहरा की छुट्टियों के कारण हाई कोर्ट बंद होने के बावजूद, इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की गई।

13 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद, 14 अक्टूबर को दास और रंका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बाद में, 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई, जो बुधवार को खत्म होने वाली थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील अभिक चिमनी ने दलील दी कि दोनों नेताओं को निजी मुचलके (पर्सनल बॉन्ड) पर रिहा कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि SEM के पास उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, और उन्होंने उनसे जमानतदार (श्योरिटी) पेश करने के लिए कहे जाने के कानूनी आधार को चुनौती दी। सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि नए जमानतदार पेश करने से जुड़ा मामला SEM के समक्ष सूचीबद्ध है।

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13 अक्टूबर को दास और रंका को CJP के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ हिरासत में ले लिया गया। आरोप है कि वे जंतर-मंतर में घुस गए थे, जिसे अब विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है। पुलिस की कार्रवाई से पहले, इस समूह ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए। शांति बॉन्ड के कथित उल्लंघन के मामले में इन दोनों नेताओं को एहतियातन गिरफ्तार किया गया। इसके बाद, 14 अक्टूबर को एक SEM ने उन्हें पांच दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

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