चक्रवात निसर्ग प्रभावितों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की जरूरत, 100 करोड़ का राहत पैकेज बहुत कम है: फडणवीस

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जून 6, 2020   19:46
चक्रवात निसर्ग प्रभावितों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की जरूरत, 100 करोड़ का राहत पैकेज बहुत कम है: फडणवीस

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि केंद्र ने राज्य को 75,000 करोड़ रुपये का ऋण लेने की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को ऋण के माध्यम से धन जुटाना चाहिए और लोगों को सहायता प्रदान करनी चाहिए।

मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को महाराष्ट्र के उन क्षेत्रों के लिए एक वित्तीय पैकेज की मांग की जो तीन जून को आए चक्रवात ‘निसर्ग’ से प्रभावित हुए हैं। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा घोषित 100 करोड़ रुपये बहुत कम है। उन्होंने कहा, ‘‘इस समय प्रभावितों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की जरुरत है। जब पिछले साल राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ आई थी, तो मेरी सरकार ने सतारा, सांगली और कोल्हापुर को 4,708 करोड़ रुपये और नासिक और कोंकण को 2,108 करोड़ रुपये दिए थे।’’ राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि केंद्र ने राज्य को 75,000 करोड़ रुपये का ऋण लेने की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को ऋण के माध्यम से धन जुटाना चाहिए और लोगों को सहायता प्रदान करनी चाहिए। 

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कोरोना वायरस के प्रकोप ने राज्य को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, जिसपर फडणवीस ने कहा कि संक्रमण के लिए 10,000 जांच हो रही हैं, जबकि क्षमता 35,000 है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को फिर से शुरू करने और राज्य को सामान्य स्थिति में लाने के लिए राज्य सरकार के मिशन बिगिन अगेन अच्छा है लेकिन इसके लिए जमीनी स्तर पर पूरी मशीनरी के समर्थन की आवश्यकता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने प्रकोप से निपटने के लिए निजी अस्पतालों में 80 प्रतिशत से अधिक बेड लेने की घोषणा की थी, लेकिन यह केवल एक घोषणा ही रही क्योंकि बड़े अस्पतालों ने खुद को इस योजना से अलग कर लिया था। फडणवीस ने कहा कि उद्धव ठाकरे सरकार नीति और कार्रवाई के स्तर पर पंगु हो गई है क्योंकि महा विकास अघाड़ी सरकार के तीनों घटक दल शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के बीच संवाद नहीं हो रहा है।





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