फिल्म Surya के खिलाफ चिकित्सकों की याचिका पर Delhi High Court ने CBFC और केंद्र से मांगा जवाब

फिल्म Surya के खिलाफ चिकित्सकों की याचिका पर Delhi High Court ने CBFC और केंद्र से मांगा जवाब
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने फिल्म 'सूर्या : अंत से आरंभ तक' में चिकित्सकों की कथित गलत छवि दिखाने और हिंसा भड़काने के आरोपों पर केंद्र और फिल्म निर्माताओं को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने टीजर पर रोक लगाने का कोई आदेश दिए बिना मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर तय की। याचिका में आरोप है कि फिल्म में निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को भ्रष्ट दिखाकर उनके लिए वास्तविक खतरा पैदा किया गया है।

नयी दिल्ली, दो नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को आगामी हिंदी फिल्म ‘सूर्या : अंत से आरंभ तक’ के खिलाफ दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और फिल्म के निर्माताओं से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में निजी अस्पतालों के चिकित्सकों को भ्रष्ट दिखाया गया है और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दिया गया है। सनी देओल अभिनीत यह फिल्म 20 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

न्यायमूर्ति अमित महाजन ने चिकित्सकों के एक समूह की ओर से दायर याचिका पर सीबीएफसी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, फिल्म निर्माता एम एम मूवीज और जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड को नोटिस जारी किया। अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 16 नवंबर को सूचीबद्ध किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता वरुण सिंह ने अदालत से फिल्म का ‘टीजर’ दिखाए जाने पर रोक लगाने का अनुरोध किया।

हालांकि, अदालत ने इस पर कोई आदेश पारित नहीं किया। संबंधित याचिका चार चिकित्सकों ने दायर की है। इनमें कॉरपोरेट सोसाइटी के चिकित्सकों के संगठन डीओसीएस (डॉक्टर्स ऑफ कॉरपोरेट सोसाइटी) के पदाधिकारी भी शामिल हैं।

याचिका में कहा गया है कि फिल्म के टीजर के संबंध में अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण यह याचिका दायर की गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि इस तरह की अप्रमाणित और मानहानिकारक सामग्री से पैदा होने वाला खतरा काल्पनिक नहीं है। याचिका में कहा गया है कि देश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने में योगदान देने वाले अग्रिम मोर्चे के स्वास्थ्यकर्मियों को पहले से ही मरीजों के नाराज परिजनों के हमलों का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में उनके खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाला फिल्म का टीजर कॉरपोरेट अस्पतालों में काम करने वाले चिकित्सकों के लिए वास्तविक खतरा पैदा करता है। इसमें मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह फिल्म मलयालम फिल्म ‘जोसेफ’ का हिंदी रूपांतरण है। ‘जोसेफ’ 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुई थी और इसका निर्देशन भी एम पद्मकुमार ने किया था।

याचिका के अनुसार, ‘जोसेफ’ एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी की कहानी है, जो एक निजी अस्पताल में ‘ब्रेन-स्टेम डेथ’ प्रमाणन के जरिए अंग निकालने के गिरोह का पर्दाफाश करता है। यह याचिका डॉ. निशांत सोनी, डॉ. आशीष तोमर, डॉ. रवि भाटिया और डॉ. शिवम वत्सल ने दायर की है, जो यहां अलग-अलग कॉरपोरेट अस्पतालों में कार्य करते हैं।

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