Delhi Police ने कपड़ा कारोबारी और मेडिकल फर्म से 62.68 लाख रुपये ठगने वाले तीन आरोपी पकड़े

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राष्ट्रीय राजधानी में कारोबारियों से लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। दो आरोपियों ने कपड़ा व्यापारियों को 45 लाख रुपये के चेक बाउंस कराकर चूना लगाया, जबकि तीसरे ने जाली बैंक ट्रांसफर स्क्रीनशॉट दिखाकर मेडिकल उपकरण हासिल किए।

दिल्ली पुलिस ने थोक कपड़ा कारोबारी और मेडिकल उपकरण की आपूर्ति करने वाली कंपनी से कथित तौर पर 62.68 लाख रुपये की धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मामलों में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, दो आरोपियों ने कपड़ा व्यापारियों से कथित तौर पर लगभग 45 लाख रुपये के कपड़े लिए और उनका भुगतान नहीं किया जबकि तीसरे आरोपी ने बैंक में रुपये अंतरित करने के फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर 17.68 लाख रुपये के उपकरण हासिल कर एक मेडिकल कंपनी से ठगी की।

कपड़ा व्यापारियों से ठगी को लेकर ओखला औद्योगिक क्षेत्र थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार आरोपियों ने एक ऑनलाइन मंच के जरिए व्यापारियों से संपर्क किया, ऑर्डर दिए और कपड़े हासिल किए। भुगतान के एवज में जारी किए गए चेक बाउंस हो गए और अन्य माध्यमों से भुगतान भी नहीं हो पाया। पुलिस के अनुसार, आपूर्तिकर्ताओं द्वारा बार-बार कॉल और संदेश भेजे जाने के बावजूद आरोपियों ने बकाए का भुगतान नहीं किया और बाद में संपर्क खत्म कर दिया।

इसके बाद जब जांच की गई तो उनके कार्यालय और कारखाने बंद पाए गए तथा उनके मोबाइल फोन भी बंद आ रहे थे। पुलिस ने बताया कि दो गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सराय काले खां निवासी मुशीर खान और मौजपुर निवासी शाहरुख उर्फ मोहम्मद इशहाक के रूप में हुई है। अपराध में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन डिजिटल जांच के लिए जब्त कर लिए गए हैं।

पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दूसरे मामले में, पुलिस ने ओखला स्थित एक मेडिकल उपकरण आपूर्ति करने वाली कंपनी से 17.68 लाख रुपये की ठगी करने के आरोप में राजस्थान के अलवर निवासी असलम (28) को गिरफ्तार किया है। यह मामला 19 जनवरी को मिली एक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि बैंक में रुपये अंतरित करने के फर्जी स्क्रीनशॉट का इस्तेमाल कर ‘मैसर्स कृष्णा एंटरप्राइजेज’ से लगभग 17.68 लाख रुपये के मेडिकल उपकरण हासिल किए गए थे।

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस टीम ने असलम का सुराग लगाने के लिए तकनीकी निगरानी रखी और उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण किया। असलम अपना मोबाइल फोन बंद करके पुलिस की पकड़ से बचने की कोशिश कर रहा था। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि असलम अलवर के एक सरकारी अस्पताल में तकनीशियन सहायक के रूप में काम कर चुका है और उसे चिकित्सा उपकरणों की अच्छी जानकारी थी।

पुलिस महाराष्ट्र में हुए इसी तरह के ठगी के मामलों में भी उसकी संभावित संलिप्तता की जांच कर रही है। इन मामलों में ऑनलाइन थोक मंच के जरिए आपूर्तिकर्ताओं को निशाना बनाया जाता था और धोखाधड़ी से सामान हासिल किया जाता था। राजस्थान में दर्ज मामलों और परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत जारी कानूनी कार्यवाहियों में उसकी कथित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।

पूछताछ के दौरान असलम ने कथित तौर पर खुलासा किया कि उसने दिल्ली के रमेश नगर-मानसरवर गार्डन इलाके में स्थित ‘मैसर्स स्वस्तिक सर्जिकल्स’ को बेहद कम कीमत पर यह मेडिकल सामान बेच दिया था। फर्म के मालिक रमेश चंद्र जसूजा (67) को जांच में शामिल होने और सत्यापन के लिए सामान पेश करने को कहा गया है। पुलिस के मुताबिक लगभग 17 लाख रुपये मूल्य के इस सामान को कथित तौर पर छह से सात लाख रुपये में खरीदा गया था।

इस खरीदारी में उनकी भूमिका और परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

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