Prabhasakshi NewsRoom: Diljit Dosanjh की ललकार सुन Abhijeet Dipke ने मांगी माफी, कहा, ''पाजी, छोटा भाई समझ के मिट्टी पाओ''

हम आपको बता दें कि शुक्रवार को अपने दिल्ली कॉन्सर्ट के दौरान दिलजीत ने उस आलोचना का जवाब दिया, जिसका सामना उन्हें पिछले कई महीनों से करना पड़ रहा था। उन्होंने कहा, "मैं आप सभी से प्यार करता हूं, क्योंकि मैं एक कलाकार हूं। मैं चुप हूं तो मुझे चुप रहने दीजिए।
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में शुक्रवार शाम दिलजीत दोसांझ का कॉन्सर्ट उस वक्त सिर्फ संगीत का मंच नहीं रह गया, जब पंजाबी सुपरस्टार ने अपने आलोचकों को सीधे शब्दों में जवाब दिया। NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के आंदोलन पर चुप्पी को लेकर महीनों से घिरे दिलजीत ने बिना किसी का नाम लिए ऐसा बयान दिया कि कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए आगे आना पड़ा। दिलजीत ने मंच से दो टूक कहा कि पंजाबियों को लड़ना सिखाने की जरूरत किसी को नहीं है। इसके बाद दिपके ने सोशल मीडिया पर उन्हें बड़ा भाई बताते हुए पुरानी तल्खी भुलाने की अपील की।
हम आपको बता दें कि शुक्रवार को अपने दिल्ली कॉन्सर्ट के दौरान दिलजीत ने उस आलोचना का जवाब दिया, जिसका सामना उन्हें पिछले कई महीनों से करना पड़ रहा था। उन्होंने कहा, "मैं आप सभी से प्यार करता हूं, क्योंकि मैं एक कलाकार हूं। मैं चुप हूं तो मुझे चुप रहने दीजिए। मैं आप सभी का समर्थन करता हूं। लेकिन पंजाबियों को लड़ना मत सिखाइए।" उनके इस बयान को अभिजीत दिपके और उनकी पार्टी की ओर से की गई आलोचना के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
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दिलजीत यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपनी फिल्म 'सतलुज' का जिक्र करते हुए कहा कि जिस फिल्म का मंच पर मजाक उड़ाया जा रहा है, वह मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है। इस फिल्म के लिए उन्होंने और उनकी टीम ने लंबे समय तक संघर्ष किया है। दिलजीत ने कहा कि कोई उनसे नफरत करता है तो भी उन्हें कोई परेशानी नहीं, क्योंकि वह सभी से प्यार करते हैं।
जून में शुरू हुआ था विवाद
हम आपको याद दिला दें कि इस पूरे विवाद की शुरुआत जून में हुई थी, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन चल रहा था। इसी दौरान इंस्टाग्राम लाइव पर एक प्रशंसक ने दिलजीत से पूछा कि क्या वह भी छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल होंगे। इस सवाल पर दिलजीत ने कहा था, "मुझे इन सब चीजों से दूर रखिए। मैं एक कलाकार हूं, कोई राजनेता नहीं हूं।" उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब की पंक्ति 'नानक दुखिया सब संसार, सो सुखिया जिस नाम आधार' का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया में सब कुछ कभी भी पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता। उन्होंने आंदोलन कर रहे लोगों और जिनके लिए आंदोलन हो रहा है, दोनों के लिए शुभकामनाएं दीं।
हालांकि, उनके इस जवाब ने विवाद खड़ा कर दिया। आलोचकों ने सवाल उठाया कि जब 2020 में किसान आंदोलन के दौरान दिलजीत खुलकर किसानों के समर्थन में सामने आए थे, तब अब छात्रों के आंदोलन से दूरी क्यों? अभिजीत दिपके ने भी इसी विरोधाभास को आधार बनाकर उनकी आलोचना की थी। उनका तर्क था कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों में काम करने वाले कलाकारों को वास्तविक जीवन के सवालों पर भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
'छोटा भाई समझकर मिट्टी डाल दीजिए'
दिलजीत के दिल्ली कॉन्सर्ट में दिए गए बयान के बाद अभिजीत दिपके ने इंस्टाग्राम पर सार्वजनिक माफी मांगी। उन्होंने लिखा कि जून में जब छात्र आंदोलन कर रहे थे, तब दिलजीत की टिप्पणी से उन्हें थोड़ी निराशा हुई थी। यह नाराजगी व्यक्तिगत नहीं थी, बल्कि इसलिए थी क्योंकि वह दिलजीत को हमेशा ऐसे कलाकार के रूप में देखते आए हैं, जो जरूरी मुद्दों पर अपनी आवाज उठाता है। दिपके ने यह भी बताया कि वह दिलजीत के प्रशंसक रहे हैं और मई में भारत लौटने से पहले शिकागो में उनका कॉन्सर्ट देखने भी गए थे। उन्होंने दिलजीत की प्रतिभा, साहस, प्रामाणिकता और भारतीय संगीत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में उनके योगदान की सराहना की। अपने संदेश के अंत में दिपके ने बेहद भावुक और दोस्ताना अंदाज अपनाते हुए लिखा, "बाकी पाजी, छोटा भाई समझ के मिट्टी पाओ।" उन्होंने दिलजीत के ही गाने की पंक्तियों के जरिए अपनी बात खत्म की।
'सतलुज' ने भी बढ़ाया था विवाद का तापमान
देखा जाये तो इस पूरे प्रकरण में दिलजीत की फिल्म 'सतलुज' भी एक अहम कड़ी है। जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित यह फिल्म पंजाब में 1980 और 1990 के दशक के दौरान कथित गैरकानूनी हत्याओं और गुप्त अंतिम संस्कारों के मामलों को उजागर करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता की कहानी कहती है। फिल्म को रिलीज होने में लगभग तीन साल लगे। सेंसर प्रमाणन को लेकर विवाद के बाद यह कुछ समय के लिए ZEE5 पर उपलब्ध हुई, लेकिन दो दिनों के भीतर हटा दी गई। रिपोर्टों के मुताबिक, इसे हटाने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और शत्रुतापूर्ण तत्वों द्वारा संभावित दुरुपयोग की आशंकाओं का हवाला दिया गया।
बहरहाल, दिलजीत दोसांझ और अभिजीत दिपके के बीच यह प्रकरण केवल एक कलाकार की टिप्पणी और राजनीतिक आलोचना तक सीमित नहीं रहा। इसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या कलाकारों को हर सामाजिक आंदोलन पर अपना पक्ष रखना चाहिए या उन्हें अपनी पेशेवर और व्यक्तिगत सीमाएं तय करने का अधिकार है? फिलहाल, दिल्ली के मंच से दिलजीत का जवाब और सोशल मीडिया पर दिपके की माफी इस विवाद का सबसे नया अध्याय बन गए हैं।
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