Operation Sindoor के बाद बढ़ी BrahMos की मांग, 600 Million Dollar पार होगा निर्यात

ऑपरेशन सिंदूर में अपनी क्षमता साबित करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल भारत के रक्षा निर्यात का मुख्य आधार बन चुकी है। फिलीपींस सहित कई देशों से बढ़ते ऑर्डरों को देखते हुए इसकी सप्लाई चेन और उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही, उन्नत ब्रह्मोस-एनजी का पहला प्रोटोटाइप 2027-2028 तक तैयार होने की उम्मीद है।
ब्रह्मोस अब सिर्फ एक मिसाइल नहीं रह गई है, बल्कि यह एक आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर 'नए भारत' की ताकत, सटीकता और गर्व का प्रतीक है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान, भारतीय सशस्त्र बलों ने पहली बार इस हथियार प्रणाली को सक्रिय युद्ध में तैनात किया। नूर खान जैसे पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेस सहित कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाकर, भारतीय सशस्त्र बलों ने इस हथियार प्रणाली की जबरदस्त ताकत का प्रदर्शन किया। ब्रह्मोस प्रणाली भारत के रक्षा निर्यात का एक मुख्य आधार भी है; भारत का रक्षा निर्यात अब 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें सालाना 62.7% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। ब्रह्मोस की इस सफलता पर बात करते हुए, ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ और एमडी डॉ. जयतीर्थ जोशी ने कहा, "निर्यात के क्षेत्र में ब्रह्मोस की सफलता की कहानी, 2025 में इस हथियार के युद्ध में परखे जाने से पहले ही शुरू हो गई थी। 2022 में हमें अपना पहला ऐतिहासिक निर्यात ऑर्डर मिला, और उस कई मिलियन डॉलर के सौदे ने वैश्विक स्तर पर भारत के रक्षा निर्यात के लक्ष्यों को नई गति दी। आज, ब्रह्मोस भारत की सैन्य निर्यात रणनीति में सबसे आगे है। एक प्रमुख उत्पाद के रूप में, इस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ने अपने निर्यात का दायरा लगातार बढ़ाया है—खासकर मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अपनी बेहतरीन क्षमताओं को साबित करने और एक 'युद्ध में परखी गई' (war-proven) प्रणाली बनने के बाद। फिलीपींस के साथ अपने पहले निर्यात सौदे के बाद, इस साल हमने दक्षिण-पूर्व एशिया के दो और देशों के साथ समझौते किए हैं। इस तरह, आज हम अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत स्थिति में हैं और अपने निर्यात के दायरे को और अधिक बढ़ाने की दिशा में आगे देख रहे हैं।
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डॉ. जोशी ने कहा कि ब्रह्मोस बढ़ती मांग को पूरा करने और जरूरत पड़ने पर क्षमता बढ़ाने के लिए अपनी सप्लाई चेन को और मजबूत करने पर काम कर रहा है। हमारी निकट और दीर्घकालिक प्राथमिकता यह है कि हमारे सशस्त्र बलों से हमें जो भी ऑर्डर मिले हैं, उन्हें पूरा किया जाए। हैदराबाद, नागपुर, पिलानी और लखनऊ (जो हमारी सबसे नई यूनिट है) में स्थित हमारी सभी प्रोडक्शन यूनिट्स इस दिशा में पूरी तेजी से काम कर रही हैं। हम अगली पीढ़ी के ब्रह्मोस को विकसित करने और उसका परीक्षण करने के लिए जरूरी खास तकनीकों के वास्ते टेक-ब्रिक्स (tech-bricks) स्थापित करके अपने R&D (अनुसंधान और विकास) कार्यों को भी तेज करना चाहते हैं। हमारा लक्ष्य सप्लाई चेन को इतना मजबूत बनाना है कि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके और किसी भी आपात स्थिति में क्षमता को तुरंत बढ़ाया जा सके। पहले हर सिस्टम या सब-सिस्टम के लिए हमारे पास 1-2 इंडस्ट्री पार्टनर होते थे, अब हम 45 स्रोत (सोर्स) विकसित करना चाहते हैं। इससे गुणवत्ता और कीमत के मामले में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी," उन्होंने कहा। ब्रह्मोस भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने में सबसे आगे है। फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम को मिलने वाले ऑर्डर और डिलीवरी के साथ, भारत का रक्षा निर्यात 600 मिलियन डॉलर के पार पहुंचने वाला है। दुनिया हमेशा से ही ब्रह्मोस को विस्मय और आश्चर्य की दृष्टि से देखती रही है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद, इस बेहद बहुमुखी मिसाइल ने साबित कर दिया है कि यह वाकई एक पहेली की तरह है आज के जटिल, मल्टी-डोमेन और तीव्र युद्ध के माहौल के लिए यह एक अत्यंत उन्नत और शक्तिशाली सिस्टम है। भारत के बेजोड़ 'फर्स्ट स्ट्राइक' हथियार के रूप में, ब्रह्मोस ने अपनी ताकत और श्रेष्ठता साबित की है। यह अपनी श्रेणी का सबसे घातक हथियार है, जो पूरी तरह से गुप्त रहकर, तेजी और फुर्ती के साथ दुश्मन के ठिकानों को सटीक रूप से नष्ट करने में सक्षम है।
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इस दिशा में एक अहम विकास 'ब्रह्मोस-NG' (नेक्स्ट जनरेशन) होगा। यह एक छोटी, हल्की और 'स्टेल्थ' (रडार की पकड़ में न आने वाली) सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जिसे भारत के DRDO और रूस की NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया ने 'ब्रह्मोस एयरोस्पेस' के ज़रिए मिलकर विकसित किया है। इससे भारत की 'एयर-लॉन्च्ड स्ट्राइक क्षमता' (हवा से हमला करने की क्षमता) का विस्तार होगा। डॉ. जोशी के अनुसार, इसका पहला प्रोटोटाइप 2027-2028 तक तैयार हो जाएगा।
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