लाल किले का भयावह मंजर, जब प्रदर्शनकारियों के बवाल से पुलिस बैरक में डरे-सहमे बैठे रहे बच्चे

लाल किले का भयावह मंजर, जब प्रदर्शनकारियों के बवाल से पुलिस बैरक में डरे-सहमे बैठे रहे बच्चे

लाल किला परिसर में हुई हिंसा के बाद सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त कर दी गई है। लेकिन लाल किला पर फैली अराजकता के बीच सैकड़ों बच्चे और सैकड़ों कलाकार फंस गए थे। हंगामें की वजह से ये लोग वहां से बाहर नहीं निकल पा रहे थे।

26 जनवरी हर्षोल्लास का दिन लेकिन दोपहर आते-आते यह दिन पूरे देश के लिए दागदार बन गया। राष्ट्रीय राजधानी में कृषि कानूनों के खिलाफ ट्रैक्टर परेड के दौरान घंटो फैली अराजकता और उत्पात का केंद्र दिल्ली का आईटीओ और लाल किला बन गया। यही वो जगह रही जहां किसानों ने लाल किला परिसर में घुसकर अपना झंडा फहराया। दिल्ली में हुई अराजकता को लेकर पुलिस का एक्शन भी शरू हो चुका है। विभिन्न थानों में 22 एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है और पुलिस उपद्रवियों के पहचान में जुटी है। वहीं लाल किला परिसर में हुई हिंसा के बाद सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त कर दी गई है। लेकिन लाल किला पर फैली अराजकता के बीच सैकड़ों बच्चे और सैकड़ों कलाकार फंस गए थे। हंगामें की वजह से ये लोग वहां से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। 

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बता दें कि करीब 12:30 बजे सारी झाकियां राजपथ और पुरानी दिल्ली से होते हुए लाल किला परिसर में पहुंची। यहां बच्चों को जलपान देने का कार्य हो ही रहा था कि अचानक पुलिस को उपद्रवियों के लाल किला पहुंचने की सूचना मिली। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बच्चों को तुरंत सुरक्षा प्रदान करते हुए सुरक्षित जगह पर ले गए। पुलिस बच्चों और कलाकारों को अपने बैरक में लेकर चली गई। जैसे-जैसे पुलिस बल की संख्या ला किला परिसर में पहुंची और लाल किला प्राचीर को खाली कराया गया। जिसके बाद सात बजे के करीब बच्चों को बैरक से बाहर निकाला गया। और उन्हें एस्कार्ट करते हुए धौला कुआं इलाके में पहुंचाया गया। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल लाल किला का जायजा लेने पहुंचे। उसके बाद गांधी स्मृति में उड़ीसा के काला हांडी के बच्चे जो कल लाल किले में फंस गए थे। उन्हें रात को गांधी स्मृति में ठहराया गया। प्रह्लाद पटेल खुद उनसे मिलने पहुंचे। 





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