कोयला संकट के बीच केंद्र पर बरसे भूपेश बघेल, बोले- देश में अगर नहीं है कमी तो क्यों बंद की गईं यात्री ट्रेन सेवाएं ?

कोयला संकट के बीच केंद्र पर बरसे भूपेश बघेल, बोले- देश में अगर नहीं है कमी तो क्यों बंद की गईं यात्री ट्रेन सेवाएं ?
प्रतिरूप फोटो
ANI Image

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अगर (कोयले की) कोई कमी नहीं है तो यात्री ट्रेन सेवाएं क्यों बंद कर दी गईं ? छत्तीसगढ़ से 23 मालगाड़ियां रद्द हुईं फिर रेल मंत्री से बात की तो 6 ट्रेनें चलाई गईं। उन्होंने कहा कि आयात किया जा रहा कोयला उच्च कीमतों पर आ रहा है।

रायपुर। देश में बिजली और कोयला संकट को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। इसी बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर (कोयले की) कोई कमी नहीं है तो यात्री ट्रेन सेवाएं क्यों बंद कर दी गईं ? दरअसल, बिजली का उत्पादन करने वाली कंपनियों तक तेजी से कोयला पहुंचाने के लिए रेलवे ने कई पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया है। 

इसे भी पढ़ें: बिजली कटौती को लेकर कांग्रेस नेता चिदंबरम का केंद्र पर तंज, ‘मोदी है तो मुमकिन है’

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अगर (कोयले की) कोई कमी नहीं है तो यात्री ट्रेन सेवाएं क्यों बंद कर दी गईं ? छत्तीसगढ़ से 23 मालगाड़ियां रद्द हुईं फिर रेल मंत्री से बात की तो 6 ट्रेनें चलाई गईं। उन्होंने कहा कि आयात किया जा रहा कोयला उच्च कीमतों पर आ रहा है और आप (केंद्र) वैसे भी राज्यों को रॉयल्टी नहीं दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि भारत सरकार कोयले और अन्य चीजों की व्यवस्था नहीं कर पा रही है... उन्होंने बिजली विभाग के अलावा अन्य क्षेत्रों में कोयले की आपूर्ति बंद कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा दरें बढ़ाई जाती हैं और राज्य द्वारा वैट कम किया जाना चाहिए ? 

इसे भी पढ़ें: भीषण गर्मी के बीच गहराया बिजली संकट, मेट्रो हो सकती है प्रभावित, नेपाल पर भी असर 

इसी के साथ ही मुख्यमंत्री बघेल ने जीएसटी बकाये को लेकर भी सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि क्या आप (केंद्र) सभी राज्यों को पूरी तरह से जीएसटी दे रहे हैं ? जीएसटी, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और कोयला जुर्माना के लिए अकेले छत्तीसगढ़ को 30,000 करोड़ रुपए का राजस्व लेना है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।