प्रवासियों को भा रहा भारत, प्रवासी दिवस के लिए अब तक हुआ 5802 लोगों का पंजीकरण

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Jan 17 2019 8:39AM
प्रवासियों को भा रहा भारत, प्रवासी दिवस के लिए अब तक हुआ 5802 लोगों का पंजीकरण

सुषमा ने बताया कि 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रवासी भारतीय दिवस का उदघाटन करेंगे और 23 जनवरी को राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द इसका समापन करेंगे।

लखनउ। उत्तर प्रदेश की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में 21 से 23 जनवरी के बीच होने वाले 'प्रवासी भारतीय दिवस' के लिए अब तक 5802 लोगों का पंजीकरण हो चुका है। यह जानकारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में दी। विदेश मंत्री ने बताया, ‘‘इस बार के प्रवासी भारतीय दिवस में दो नये आकर्षण हैं, जिनके कारण आप पाएंगे कि पिछली बार के मुकाबले ढाई से तीन गुना अधिक पंजीकरण इस बार हुआ है। अब तक इसके लिए 5802 लोगों का पंजीकरण हो चुका है।’’ दो नये आकर्षण के बारे में सुषमा ने बताया, ‘‘प्रयागराज में कुंभ मेला चल रहा है और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह होना है। ऐसे में एक स्वर से यह मांग आयी कि क्या प्रवासी भारतीय दिवस की नौ जनवरी की तारीख को आगे बढाकर ऐसा नहीं कर सकते कि हम कुंभ मेले में भी जा सकें और राजपथ पर परेड भी देख सकें।

 


विदेश मंत्री ने बताया कि इसी मांग की वजह से प्रवासी भारतीय दिवस की तारीखें आगे बढायी गयीं। इस बार के प्रवासी भारतीय दिवस को हर मायने में खास बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘जो पुराने लोग हैं, वो तो फिर भी भारत के बारे में कुछ जानते हैं लेकिन जो युवा हैं और नौजवान हैं, जिन्हें भारतवंशी कहा जाता है, वे आज भारत के बारे में नहीं जानते । जानते भी हैं तो भारत के बारे में होने वाले दुष्प्रचार को ही जानते हैं।’’ उन्होंने बताया, ‘‘इसी के चलते तय किया गया कि एक दिन केवल युवा प्रवासी भारतीय दिवस के लिए रखा जाएगा, जो 21 जनवरी को होगा । उसी दिन उत्तर प्रदेश प्रवासी दिवस भी होगा । सभी प्रवासी भारतीय युवा शाम को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय :बीएचयू: जाएंगे जहां छात्रों से उनका संवाद होगा।’’ 
 
 
सुषमा ने बताया कि 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रवासी भारतीय दिवस का उदघाटन करेंगे और 23 जनवरी को राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द इसका समापन करेंगे। इस पूरे आयोजन के दौरान प्रवासी भारतीयों को सम्मानित भी किया जाएगा और कई रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। विदेश मंत्री ने बताया, ‘‘जब 2003 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसकी शुरुआत की थी तो उन्होंने प्रवासी भारतीयों से कहा था कि हमें आपका धन नहीं, अनुभव का लाभ चाहिए। तब से ये परंपरा चली आ रही है।’’ इस सवाल पर कि क्या विदेश मंत्री पाकिस्तान को कोई संदेश देना चाहेंगी कि वह ऐसे अवसरों का वह लाभ उठाये, क्योंकि वहाँ रहने वाले उत्तर प्रदेश के भारतवंशी ऐसे आयोजनों को सराहते हैं, सुषमा ने कहा, ‘‘पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं हो रही है । क्योंकि यह बात स्पष्ट है कि आतंकवाद और संवाद साथ साथ नहीं चल सकते । जब सीमा पर गोलियों की बौछार हो रही हो तो वहां जाना व्यावहारिक नहीं है।’’ 

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