भारत के शिया मुस्लिम Iran के समर्थन में उतरे, Kargil से लेकर Lucknow तक उठ रही समर्थन में आवाजें

Kashmir Iran
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रैलियां करगिल के प्रमुख इलाकों से होकर गुजरीं जहां लोगों ने बैनर और तख्तियों के माध्यम से अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि ईरान क्षेत्र में आत्मसम्मान और स्वतंत्र नीति के लिए खड़ा है और ऐसे समय में उसका समर्थन जरूरी है।

देश के अलग अलग हिस्सों में शिया समुदाय के लोग ईरान के समर्थन में सामने आ रहे हैं। लद्दाख के करगिल जिले और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से इस मुद्दे पर मजबूत प्रतिक्रियाएं सामने आयी हैं। शिया समुदाय का कहना है कि ईरान के साथ हो रहा व्यवहार अन्यायपूर्ण है और भारत को इस मुद्दे पर चुप नहीं रहना चाहिए। हम आपको बता दें कि करगिल में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और ईरान की सरकार तथा वहां की जनता के साथ एकजुटता प्रकट की। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा जिसमें पुरुष महिलाएं और युवा शामिल हुए। लोगों ने अमेरिका और इजराइल के विरोध में नारे लगाए और ईरान पर लगाए गये प्रतिबंधों की आलोचना की। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बाहरी दबाव से आम जनता को नुकसान होता है।

रैलियां करगिल के प्रमुख इलाकों से होकर गुजरीं जहां लोगों ने बैनर और तख्तियों के माध्यम से अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि ईरान क्षेत्र में आत्मसम्मान और स्वतंत्र नीति के लिए खड़ा है और ऐसे समय में उसका समर्थन जरूरी है।

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वहीं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शिया धर्मगुरुओं ने केंद्र सरकार से अपील की है कि भारत को ईरान के पक्ष में संतुलित और सहयोगपूर्ण रुख अपनाना चाहिए। धर्मगुरुओं ने कहा कि ईरान भारत का पुराना मित्र रहा है और वर्तमान हालात में उसका साथ देना नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पश्चिमी देशों की नीतियों को क्षेत्र में तनाव का कारण बताया। धर्मगुरुओं का कहना है कि भारत को वैश्विक मंच पर शांति और न्याय के पक्ष में खड़े होकर ईरान के साथ संवाद और सहयोग को मजबूत करना चाहिए। उनका मानना है कि चुप रहना सही विकल्प नहीं है और भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का परिचय देना चाहिए। देखा जाये तो करगिल से लेकर लखनऊ तक उठ रही ये आवाजें यह दिखाती हैं कि शिया समुदाय ईरान के मुद्दे पर एकजुट है और चाहता है कि भारत खुलकर ईरान का साथ दे।

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