नाबालिग बेटे के Kochi Mercedes हादसे में फंसे Judge को अग्रिम जमानत, Kerala High Court का आदेश

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ANI
अभिनय आकाश । Oct 29 2026 12:55PM

केरल उच्च न्यायालय ने उस अतिरिक्त जिला न्यायाधीश को अग्रिम जमानत दे दी है, जिनके 17 वर्षीय बेटे की मर्सिडीज कार से हुई टक्कर में एक स्कूटर सवार की मौत हो गई थी। अदालत ने न्यायाधीश की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने और जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया।


केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश को अग्रिम जमानत दे दी, जिनके बेटे का हाल ही में एक कार दुर्घटना में हाथ था, जिसमें एक स्कूटर सवार की मौत हो गई थी। जमानत के मामले में, जस्टिस कौसर एडप्पागाथ ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश दिया और कहा कि जज को जांच में सहयोग करना होगा। बार एंड बेंच के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक पुलिस आवेदक को गिरफ्तार नहीं करेगी। हालांकि, उसे आज दोपहर 1:00 बजे जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा और जरूरत पड़ने पर, बुलाए जाने पर फिर से आना होगा। आवेदक से पूछताछ सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाएगी। आरोपी जज की ओर से पेश हुए सीनियर वकील पी विजय भानु ने हाई कोर्ट को बताया कि मर्सिडीज दुर्घटना के संबंध में पुलिस स्टेशन में जज से चार घंटे तक पूछताछ की गई थी। अदालत ने कहा उसे 4 घंटे तक पूछताछ करने की क्या ज़रूरत थी, और अब फिर से पूछताछ क्यों? उसकी गिरफ़्तारी की क्या ज़रूरत है? वह एक न्यायिक अधिकारी हैं। वह जांच में सहयोग करेंगे। हादसे के पीड़ितों की ओर से पेश वकील ने इस फ़ैसले का विरोध किया। उन्होंने उस जज पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है, जो त्रिशूर ज़िले के इरानजालकुडा में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) में तैनात हैं।

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मामले के बारे में


त्रिशूर में MACT जज के 17 वर्षीय बेटे ने मर्सिडीज-बेंज चलाते हुए, इस हफ्ते की शुरुआत में कोच्चि में एक दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी। इस हादसे में स्कूटर सवार की मौत हो गई। नाबालिग के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने और गैर-इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) जैसे आरोपों में मामला दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। कोच्चि पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या, जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (MVA) की धाराओं 181, 183, 199A(1) तथा 199A(2) के तहत एक FIR दर्ज की है। MVA की धारा 199A के तहत, यदि कोई नाबालिग मोटर वाहन से जुड़ा कोई अपराध करता है, तो उसके अभिभावक या वाहन मालिक पर मुकदमा चलाया जाता है और उन्हें ही इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है।

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