लद्दाख की 'स्तार्तासापुक सो' और 'सो कर' झील को रामसार आर्द्रभूमि की सूची में किया गया शामिल

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 24, 2020   14:09
लद्दाख की 'स्तार्तासापुक सो' और 'सो कर' झील को रामसार आर्द्रभूमि की सूची में किया गया शामिल

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट किया कि लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में स्थित आर्द्रभूमि को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि की सूची में शामिल किया गया है। इस क्षेत्र में दो झीलें आपस में जुड़ी हैं। ‘स्तार्तासापुक सो’ मीठे पानी की झील है और ‘सो कर’ का पानी खारा है।

नयी दिल्ली। रामसार प्रस्ताव संधि के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थलों की सूची में भारत की एक और आर्द्रभूमि को शामिल किया गया है। इसके साथ ही अब देश में इस प्रकार की आर्द्रभूमि की संख्या 42 हो गई है जो दक्षिण एशिया में सर्वाधिक है। इस सूची में लद्दाख स्थित आपस में जुड़ी हुई दो झीलों ‘स्तार्तासापुक सो’ और ‘सो कर’ की आर्द्रभूमि को शामिल किया गया है। 

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट किया, “लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में स्थित आर्द्रभूमि को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि की सूची में शामिल किया गया है। इस क्षेत्र में दो झीलें आपस में जुड़ी हैं। ‘स्तार्तासापुक सो’ मीठे पानी की झील है और ‘सो कर’ का पानी खारा है। भारत में अब 42 रामसार स्थल हैं।” पिछले महीने महाराष्ट्र की लोनार झील और आगरा की सुर सरोवर झील को रामसार स्थलों की सूची में शामिल किया गया था। इससे पहले बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित कबरताल झील को रामसार प्रस्ताव के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि की सूची में शामिल किया गया था। 

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, राज्य में यह पहला स्थल है जिसे इस सूची में शामिल किया गया है। इस साल अक्टूबर में उत्तराखंड के देहरादून स्थित ‘असन कंजर्वेशन रिजर्व’ को सूची में शामिल किया गया। भारत में अन्य रामसार स्थलों में ओडिशा की चिल्का झील, राजस्थान का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, पंजाब की हरिके झील, मणिपुर की लोकटक झील और जम्मू कश्मीर की वुलर झील शामिल है। आर्द्रभूमि की पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए 1971 में ईरान के रामसार शहर में प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये गए थे।





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