पुणे में Phulewada के पुनर्विकास को मंजूरी, महाराष्ट्र सरकार खर्च करेगी 230 करोड़ रुपये

महाराष्ट्र कैबिनेट की उप-समिति ने समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले के पुणे स्थित आवास 'फुलेवाडा' के विकास के लिए 230 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को हरी झंडी दी है। इस योजना के तहत परिसर का सौंदर्यीकरण और अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। साथ ही राज्य के सभी 36 जिलों में ओबीसी छात्रों के लिए छात्रावास बनाने और 11 विभागों की योजनाओं को ज्योतिबा फुले का नाम देने का फैसला भी हुआ है।
महाराष्ट्र सरकार ने समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती से पहले पुणे स्थित उनके पूर्व आवास ‘फुलेवाडा’ के समग्र विकास के लिए 230 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को कहा कि इस विकास कार्य में परिसर का सौंदर्यीकरण और अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण शामिल होगा। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह निर्णय बावनकुले की अध्यक्षता में हुई अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित मंत्रिमंडल की उप-समिति की एक विशेष बैठक में लिया गया।
पुणे के भिडेवाडा स्थित उस स्मारक का काम तीन सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, जहां सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों के लिए पहला स्कूल शुरू किया था। बावनकुले ने बताया कि यह भी निर्णय लिया गया कि राजस्व, जलापूर्ति और वन सहित 11 प्रमुख विभागों के साथ-साथ सूखा राहत से जुड़े विभागों द्वारा लागू किए जाने वाले कल्याणकारी उपायों को महात्मा ज्योतिबा फुले का नाम दिया जाएगा। इस संबंध में अलग से सरकारी आदेश (जीआर) जारी किए जाएंगे।
सरकार महाराष्ट्र के सभी 36 जिलों में ओबीसी छात्रावास स्थापित करेगी और प्रत्येक को 500 छात्रों के ठहरने के हिसाब से तैयार किया जाएगा। राजस्व विभाग इन छात्रावासों के लिए एक रुपये की नाममात्र दर पर जमीन मुहैया कराएगा। महाराष्ट्र राज्य अवसंरचना विकास निगम (एमएसआईडीसी) ने इसके डिजाइन तैयार कर लिए हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया कि बैठक में विमुक्त जाति और घुमंतु जनजाति (वीजेंटी) के बजट को ओबीसी बजट से अलग करने का भी निर्णय लिया गया ताकि विकास कोष का लाभ इन समुदायों तक सीधे पहुंच सके। विज्ञप्ति के अनुसार, विभिन्न सरकारी विभागों में ओबीसी के लिए आरक्षित 27 प्रतिशत रिक्त पदों के बैकलाग को भरने के लिए कदम उठाए जाएंगे। साथ ही, ओबीसी कल्याण के लिए काम करने वाली संस्था ‘महाज्योति’ के दायरे का विस्तार छत्रपति शाहू महाराज अनुसंधान, प्रशिक्षण और मानव विकास संस्थान (सारथी) की तर्ज पर किया जाएगा।
‘सारथी’ महाराष्ट्र सरकार का एक स्वायत्त संस्थान है, जिसकी स्थापना मराठा, कुनबी, मराठा-कुनबी, कुनबी-मराठा और ओबीसी समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए की गई है।
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