Prabhasakshi NewsRoom: Global War का खिलाड़ी है भारत में पकड़ा गया अमेरिकी नागरिक Matthew VanDyke

Matthew VanDyke
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हम आपको बता दें कि मैथ्यू एरन वैनडाइक कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। वह खुद को कभी भाड़े का सैनिक, कभी खुफिया विश्लेषक, तो कभी लोकतंत्र का सिपाही बताता रहा है। लीबिया के युद्ध से लेकर सीरिया और यूक्रेन तक, उसने खुद को हर उस मोर्चे पर खड़ा किया जहां संघर्ष था।

भारत की धरती पर एक ऐसा किरदार पकड़ा गया है जिसकी कहानी किसी फिल्म से कम नहीं, लेकिन इसके निहितार्थ बेहद गंभीर और खतरनाक हैं। अमेरिका के बाल्टीमोर में जन्मा 46 वर्षीय मैथ्यू एरन वैनडाइक अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानि एनआईए की गिरफ्त में है। उस पर आतंक से जुड़े आरोप हैं, सीमा पार गतिविधियों में उसकी संलिप्तता है और ड्रोन युद्ध का प्रशिक्षण देने जैसे संगीन आरोप भी हैं। यह मामला भारत की सुरक्षा के खिलाफ एक गहरे और सुनियोजित खेल का संकेत देता है।

हम आपको बता दें कि मैथ्यू एरन वैनडाइक कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। वह खुद को कभी भाड़े का सैनिक, कभी खुफिया विश्लेषक, तो कभी लोकतंत्र का सिपाही बताता रहा है। लीबिया के युद्ध से लेकर सीरिया और यूक्रेन तक, उसने खुद को हर उस मोर्चे पर खड़ा किया जहां संघर्ष था। शुरुआत उसने एक फिल्म निर्माता के तौर पर की, लेकिन जल्द ही कैमरे के पीछे खड़ा रहने वाला यह शख्स बंदूक उठाने वालों की कतार में जा खड़ा हुआ।

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अरब आंदोलन के दौरान लीबिया पहुंचा वैनडाइक, गद्दाफी के खिलाफ लड़ने वाले विद्रोहियों में शामिल हो गया। छह महीने तक कैद रहा, फिर भाग निकला। इस घटना ने उसे एक खतरनाक पहचान दी एक ऐसा व्यक्ति जो युद्ध को सिर्फ दिखाता नहीं, उसमें उतरता भी है। इसके बाद सीरिया में उसने विद्रोही गुटों को हथियार और रणनीति की सलाह दी। यहीं से उसकी भूमिका पर सवाल उठने लगे पत्रकार या योद्धा?

उसकी पढ़ाई भी कम खतरनाक नहीं थी। सुरक्षा अध्ययन में मास्टर्स की डिग्री के साथ पश्चिम एशिया पर उसकी गहरी पकड़ थी। उसने इस ज्ञान को जमीन पर उतारते हुए अपनी संस्था सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल बनाई। यह संस्था कथित तौर पर आतंकवाद और तानाशाही के खिलाफ लड़ने वालों को प्रशिक्षण देती है। लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा उलझी हुई है।

भारत की जांच एजेंसियों के अनुसार, वैनडाइक और उसके छह यूक्रेनी साथी बिना अनुमति के मिजोरम पहुंचे, वहां से म्यांमार की सीमा पार की और चिन राज्य में सक्रिय सशस्त्र गुटों को प्रशिक्षण दिया। यह प्रशिक्षण साधारण नहीं था इसमें ड्रोन बनाना, चलाना और उन्हें निष्क्रिय करना शामिल था। यह तकनीक अगर गलत हाथों में चली जाए तो पूरे उत्तर पूर्व क्षेत्र की सुरक्षा को हिला सकती है।

हम आपको बता दें कि 12 मार्च को कोलकाता हवाई अड्डे पर वह दुबई के लिए उड़ान भरने ही वाला था। इमिग्रेशन क्लियर कर चुका था, सामान विमान में लोड़ हो चुका था। तभी खुफिया एजेंसियों को अलर्ट मिला और आखिरी क्षण में उसे रोक लिया गया। यह दिखाता है कि मामला कितना संवेदनशील और गंभीर था।

रणनीतिक रूप से देखें तो यह घटना भारत के लिए कई चेतावनी संकेत लेकर आई है। एक तो इससे उत्तर पूर्व क्षेत्र में बाहरी हस्तक्षेप का खतरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। दूसरा, आधुनिक युद्ध तकनीक जैसे ड्रोन अब गैर राज्य तत्वों के हाथों में पहुंच रही है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए भारत के भीतर अस्थिरता फैलाने की कोशिशें हो रही हैं।

इसके अलावा, यह मामला सिर्फ कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का है। अगर ऐसे लोग बिना रोकटोक सीमाओं को पार कर प्रशिक्षण देने लगें, तो यह आने वाले समय में एक बड़ा खतरा बन सकता है। खासकर तब जब म्यांमार जैसे अस्थिर क्षेत्र भारत की सीमा से सटे हों। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह मामला हलचल पैदा कर रहा है। अमेरिका और यूक्रेन दोनों इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। लेकिन भारत के लिए प्राथमिकता साफ है अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा।

बहरहाल, मैथ्यू एरन वैनडाइक ने अपनी जिंदगी खुद चुने गए युद्धों में बिताई, लेकिन इस बार हालात उसके नियंत्रण में नहीं हैं। अब उसकी कहानी अदालतों और जांच एजेंसियों के हाथ में है। यह गिरफ्तारी एक सख्त संदेश है भारत की सीमाओं से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं।

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